> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-08-23

Pawan Jury BhilwaraRj

पीएम को चिट्ठी भेजना जनआन्दोलन (Mass Movement) खड़ा करने का सबसे प्रभावी एवं निरापद तरीका है। इस तरीके का इस्तेमाल करके कार्यकर्ता पीएम को किसी भी मांग को मानने के लिए आसानी से बाध्य कर सकते है। इस पोस्ट में मैंने लेटर-रजिस्टर मेथड की कई विशेषताओ में से कुछ के बारे में बताया है।
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(1) पीएम जब चिट्ठी पढ़ते ही नहीं है तो चिट्ठी भेजने से क्या लाभ है ?
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इक्का दुक्का लोग यदि चिट्ठी भेजेंगे तो जाहिर है कि प्रधानमंत्री कार्यालय पीएम को इस बारे में सूचित भी करने वाला नहीं है। लेकिन यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक (46 करोड़ मतदाता) पीएम को चिट्ठी भेजते है तो पीएम को अमुक मांग मानने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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लॉकडाउन के उदाहरण से इसे समझते है :
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भारत में 550 जिले (संसदीय क्षेत्र) , 4000 कस्बे (विधानसभा क्षेत्र) और लगभग 2 लाख गाँव (ग्राम पंचायत) है।
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एक जिले में लगभग 20 लाख नागरिक रहते है। अब मान लीजिये कि, किसी जिले में सिर्फ 1% नागरिक यानी 20 हजार नागरिक 5 तारीख को 5 बजे शहर के पोस्ट बॉक्स पर पहुँच कर पोस्टकार्ड / बुकपोस्ट / लिफाफे / अंतर्देशीय पत्र आदि भेजने के लिए पहुँचते है। और मान लीजिये कि ऐसा भारत के 100 जिलो में होता है।
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तो पहले चरण में 5 तारीख को सड़को पर कितने लोग होंगे ?
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20,000*100 = 20,00,000 ( 20 लाख !!)
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अब अगले पूरे सप्ताह कार्यकर्ता ट्विटर, फेसबुक, यू ट्यूब, इन्स्टाग्राम आदि की सहायता से नागरिको में प्रचार करते है कि वे भी चिट्ठी डालने आये। तो अगली बार जब ये लोग चिट्ठी डालने जायेंगे तो कितने लोग होंगे ?
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मेरा अनुमान है कि यदि किसी समय चिट्ठी डालने वालो की संख्या 20 लाख पहुँच जाती है तो अगले दफा यह संख्या लगभग 5 गुना तक बढ़ जाएगी !! 20 लाख*5 = 1 करोड़ !! और अगले प्रत्येक चरण में ये संख्या इसी अनुपात में बढती रहेगी जब तक कि सरकार लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त न कर दें !!
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तो सरकार कितनी संख्या सड़को पर सह सकती है ?
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मेरा अनुमान है कि, 1 से 5 करोड़ की संख्या को सड़को पर सहना सरकार की शक्ति से बाहर है। और यदि सरकार फिर भी इसकी अवहेलना करती है तो यह संख्या लगातार बढती जाएगी।
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सार यह है कि, जो कार्यकर्ता कहते है कि पोस्टकार्ड भेजने से कुछ नहीं होता वे जानबूझकर या अनजाने में इस बिंदु की अवहेलना करते है कि, जब करोड़ो नागरिक पीएम को चिट्ठी भेजेंगे तो डाकखानो को चिट्ठियां पीएम तक पहुँचाने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी, पीएम द्वारा चिट्ठी पढ़ना तो बहुत आगे की बात है !!
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पीएम सीधा यह पूछेंगे कि लोगो का ये हुजूम सड़को क्यों है ?
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और जवाब होगा - लॉकडाउन ख़त्म करो !!
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यदि 1 करोड़ नागरिक चिट्ठी भेजने के लिये निकल आते है तो बिना किसी प्रयास के फेसबुक पर लगभग 5 गुना, यानी 5 करोड़ वाल पर 'EndLockdownTotally' के पोस्ट घूम रहे होंगे, ट्विटर पर यह हेश निरंतर ट्रेंड कर रहा होगा और देश के विभिन्न क्षेत्रो से हजारो की संख्या में पोस्टकार्ड डालने वाले समूहों के असीमित फोटो अपलोड हो रहे होंगे !!
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और सबसे जरुरी बात, इस प्रक्रिया को किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकेगा। क्योंकि यह मूवमेंट पूरी तरह से विकेन्द्रित होगी और इसका स्विच न तो किसी नेता के हाथ में होगा और न ही पेड मिडिया के पास !! मतलब एक बार शुरू होने के बाद यह रुकेगा नहीं !! ( A Leader less Media Less Mass Movement )
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और यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी होगी। सरकार एवं नागरिको के बीच कोई घर्षण नहीं होगा !! यदि यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो पेड मीडिया के प्रयोजको के पास इसे रोकने का कोई तरीका नहीं है। सरकार पोस्टकार्ड आदि की सप्लाई रोक देगी, किन्तु इस मामूली समस्या का समाधान 50 पैसे के बुकपोस्ट छपवाकर किया जा सकता है। और बुक पोस्ट पर डाक टिकेट लगा दिए जायेंगे !!
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दुसरे शब्दों में, मॉस मूवमेंट खड़ा करने की अब तक खोजे गए तरीको में यह सबसे प्रभावी तरीका है।
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(2) क्या यह सब होना इतना आसान है ?
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यह सब उससे भी ज्यादा आसान है, जितना आप सोच रहे है। किसी भी कार्य को करने में 2 प्रकार की चुनौतियाँ हो सकती है :
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(2.1) व्यवहारिक समस्या
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(2.2) मनोवैज्ञानिक समस्या
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(2.1) व्यवहारिक समस्याएं : यहाँ कोई व्यवहारिक समस्या नहीं है। चिट्ठी भेजने के लिए किसी व्यक्ति को अपन नजदीकी पोस्ट ऑफिस जाकर सिर्फ 50 पैसे का एक पोस्टकार्ड खरीदना है। यदि पोस्टकार्ड न हो तो इनलेंड लेटर, या लिफाफा भी खरीद सकता है। पूरे भारत में यह उपलब्ध है !!
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पोस्टकार्ड में आपको सिर्फ एक लाइन लिखनी है -- प्रधानमंत्री जी, लॉकडाउन_पूर्णतया_समाप्त_करें
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और अपना नाम, दिनांक एवं वोटर नम्बर लिखकर इसे पोस्ट बॉक्स में गिरा देना है। यदि फोटो कॉपी की सुविधा उपलब्ध हो तो इसकी एक फोटोकॉपी करवा ले या अपने मोबाइल से इसकी एक साफ़ फोटो ले ले, ताकि आप इसे रिकॉर्ड के लिए रख सके। बस हो गया। क्या इसमें आपको किसी विशेष प्रशिक्षण, अतिरिक्त धन, अतिरिक्त ऊर्जा या अतिरिक्त समय की आवश्यकता है ? नहीं है !! तो चिट्ठी भेजने में कोई व्यवहारिक समस्या नहीं है।
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(2.2) मनोविज्ञानिक समस्याएं :
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(a) फेसबुक स्क्रोल करते हुए बेतरबीब ढंग से कमेन्ट करने की तुलना में पोस्ट बॉक्स तक की दूरी तय करने में मनुष्य को जो साधारण तकलीफ उठानी पड़ती है, कार्यकर्ता यथासंभव उससे बचना चाहते है।
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(b) कुछ कार्यकर्ता यह सोचते है कि जब काफी सारे लोग चिट्ठी भेजेंगे तो मैं भी भेजूंगा। अमुक व्यक्ति बहुधा किसी कार्य को सिर्फ तब करते है, जब काफी सारे लोग उसे करना शुरू करें, या यह ट्रेंड में आ जाए। और इस तरह शुरुआत ही नहीं हो पाती।
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(c) कई कार्यकर्ता किसी ब्रांडेड व्यक्ति या पेड मीडिया द्वारा दी गई दिशा में बढ़ने के आदि होकर ब्रेन डेड हो जाते है। अत: वे उन सभी कदमो को उठाने से बचते है जो पेड मीडिया द्वारा बताए गए तरीको में शुमार न हो।
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और इसी तरह के दर्जनों मनोवैज्ञानिक कारक इसमें और भी जोड़े जा सकते है। यदि किसी कदम को उठाने में व्यवहारिक समस्या है तो यह एक वाजिब कारण है, किन्तु मनोवैज्ञानिक कारणों का कोई हल नहीं होता। इसे व्यक्ति को स्वयं ही हल करना होता है। मतलब कोई व्यक्ति आपको कंधे पर लादकर पोस्ट ऑफिस नहीं ले जा सकता। जाना तो आपको स्वयं ही पड़ेगा।
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और जब तक कुछ कार्यकर्ता यह तकलीफ उठाकर आगे कदम नहीं बढ़ाते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। और शुरुआत कार्यकर्ताओ को ही करनी होगी, नागरिक इसमें काफी बाद में जुड़ना शुरू होंगे। और जितने ज्यादा कार्यकर्ता कदम उठाना शुरू करेंगे उतनी तेजी से नागरिको तक यह सूचना पहुंचेगी, और एक बार यदि नागरिक इससे सूचित हो जाते है तो वे तेजी से इसमें भागीदार बनना शुरू कर देंगे।
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और यदि आपको लगता है कि पीएम को "कहने" के लिए चिट्ठी भेजना एक कमतर तरीका है, तो कृपया हमें कोई बेहतर तरीका बताइये, जिससे हम भी पीएम को "कहने" में उसका इस्तेमाल कर सके। सिर्फ "पोस्टकार्ड भेजने से कुछ नहीं होता" का एलान पर्याप्त नहीं है। आपको इसका विकल्प भी बताना चाहिए।
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बहरहाल, यदि आप पीएम को चिट्टी भेजेंगे ही नहीं तो पीएम द्वारा आपकी चिट्ठी पढ़ने की सम्भावना शून्य है। और यदि आप पीएम को चिट्ठी भेज देते है तो पीएम इसे पढ़ भी सकते है और नहीं भी पढ़ सकते है। इसीलिए यदि आप पीएम को चिट्ठी भेजते है तो इसे पढ़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।
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पीएम के दफ्तर में भेजी गयी सभी चिट्ठियों को पढ़ा जाता है, और इनका रिकॉर्ड रखा जाता है। आज के 10 वर्ष पहले भी यदि किसी व्यक्ति ने कोई चिट्ठी भेजी है तो आपको प्रधानमंत्री कार्यालय में इसका रिकॉर्ड मिल जायेगा। आप चाहे तो सीधे पीएम को ट्विट करके पूछ सकते है, या आरटीआई लगाकर पता कर सकते है।
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