Pawan Jury BhilwaraRj
राज्य टी सी पी ; पारदर्शी शिकायत प्रणाली
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( State TCP ; Transparent Complaint Procedure )
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इस क़ानून का सार : भारत में शासन एवं नागरिको के बीच यदि संवाद करने की अधिकृत एवं पारदर्शी प्रक्रिया नहीं होने के कारण नागरिक अपनी मांग, सुझाव आदि पीएम या सीएम तक नहीं पहुंचा पाते, और विभिन्न अनाधिकृत एवं बेतरबीब तरीको का सहारा लेने के लिए बाध्य होते है। यह क़ानून गेजेट में आने के बाद नागरिक अधिकृत रूप से अपनी मांग सरकार एवं जनता के सामने रख सकेंगे, और मतदाता किसी भी मांग पर अपनी सहमती या सहमती दर्ज कर सकेंगे। #StateTcp , #RRP19
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यदि आप टीसीपी क़ानून चाहते है तो अपने सीएम को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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--------क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ--------
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इस कानून में 2 खंड है :
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(i) नागरिको के लिए निर्देश
(ii) अधिकारियों एवं नागरिको के लिए निर्देश
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[ टिप्पणी : यह कानून ड्राफ्ट राजपत्र में छापकर मुख्यमंत्री द्वारा सीधे लागू किया जा सकता है। इसके लिए विधानसभा से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ]
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भाग - I : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) यह कानून आपको (यहाँ आप से आशय है – राज्य का मतदाता) को यह अधिकार देता है कि वे अपने ज़िला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर कोई भी शपथपत्र जमा करवा सकेंगे।
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(1.1) यह शपथपत्र आपके द्वारा प्रस्तुत कोई शिकायत, सुझाव या आरटीआई आवेदन या प्रस्तावित कानून या अन्य कोई याचनात्मक समाधान हो सकता है।
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(1.2) आप शपथपत्र जमा करते समय 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क अदा करेंगे।
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(1.3) कलेक्टर कार्यालय प्रस्तुत शपथपत्र को चिन्हित करने के लिए एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(1.4) कलेक्टर कार्यालय आपके द्वारा दिए शपथपत्र को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर इस तरह अपलोड करेगा कि कोई भी व्यक्ति यह शपथपत्र बिना लॉग-इन (Log in) के देख सके।
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(2) कोई भी मतदाता किसी भी दिन पर पटवारी ( तलाटी, ग्रामीण अधिकारी ) कार्यालय जाकर धारा 1 के तहत प्रस्तुत शपथपत्र के नंबर का उल्लेख करते हुए अमुक शपथपत्र पर अपनी हाँ / ना दर्ज करवा सकता है।
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(2.1) कलेक्टर कार्यालय मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को मतदाता के नाम एवं मतदाता संख्या को मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से दर्ज करेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / ना को देख सके।
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(2.2) किसी शपथपत्र पर हाँ / नहीं दर्ज करने या उसे बदलने के लिए मतदाता को शुल्क देना होगा। बीपीएल कार्ड धारकों के लिए यह शुल्क 1 रू तथा अन्य नागरिको के लिए यह 3 रू होगा।
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(2.3) मतदाता किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी अपनी हाँ / ना को किसी भी दिन कितनी भी बार बदल भी सकते है।
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(3) सभी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी : किसी शपथपत्र पर दर्ज की गयी हाँ / ना की यह गिनती मुख्यमंत्री या किसी मंत्री या किसी अधिकारी या किसी अदालत पर बाध्यकारी नहीं होगी। फिर भी, यदि राज्य के 51% से अधिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो मुख्यमंत्री शपथपत्र में दर्ज किये गए कार्यों की पालना के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकते है, या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। या मुख्यमंत्री चाहे तो अपना इस्तीफ़ा भी दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नही है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(4) धारा 1 में शपथपत्र देने के लिए कलेक्टर आपसे मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड लाने के लिए कह सकता है, एवं आपकी फोटो और फिंगरप्रिंट भी ले सकता है। कलेक्टर आपसे शून्य से लेकर पांच गवाह तक, जो कि आपको निजी रूप से जानते हो, लाने के लिए भी कह सकता है।
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(4.1) यदि आप एक बार शपथपत्र फ़ाइल कर देते है तो फिर आप इसे हटा नहीं सकेंगे। अदालत के आदेश को छोड़कर किसी भी अधिकारी को आपका शपथपत्र हटाने की अनुमति नहीं होगी।
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(4.2) आपको सूचित किया जाता है कि - शपथपत्र में अनुचित जानकारी या मानहानि कारक, या निन्दात्मक कथन के लिए आप पर किसी भी पक्षकार द्वारा अदालत में वाद दायर किया जा सकता है, और दोष सिद्ध होने पर अदालत आपको सजा दे सकती है।
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(5) आपको भारत भर में दर्ज सभी शपथपत्रो पर हाँ / ना दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है। ये आपकी इच्छा पर निर्भर है कि आप किस शपथपत्र पर विचार करना चाहते और किस शपथपत्र को नकारना चाहते है। जिस भी शपथपत्र पर आप हाँ / ना दर्ज करना चाहते है, उन पर अपनी राय दर्ज करवा सकते है। किसी भी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करने पर आपको कोई भी सजा नहीं होगी, तब भी जबकि अमुक शपथपत्र में कोई अनुचित या निन्दात्मक कथन है।
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(6) आप अपना मोबाइल नंबर मतदाता सूची का रखरखाव करने वाले क्लर्क को दर्ज करवा सकते है। अमुक फ़ोन नंबर आपके नाम पर या आपके नजदीकी पारिवारिक सदस्य के नाम पर होना चाहिए। यदि आप अपना मोबाईल नंबर दर्ज करवाते है तो जब भी आप कोई शपथपत्र फ़ाइल करेंगे या किसी शपथपत्र पर हाँ / ना दर्ज करेंगे तो आपको फीडबैक के लिए एक SMS प्राप्त होगा। यह SMS उसी तरह का होगा जैसा ATM आदि से नकदी निकालने पर खाताधारक को प्राप्त होता है। और यदि कोई अन्य व्यक्ति छल द्वारा आपके नाम पर शपथपत्र फ़ाइल करने का प्रयास कर रहा है या आपके नाम से हाँ / ना दर्ज करवा रहा है, तब भी आपको ऐसा SMS प्राप्त होगा। इस स्थिति में आप पुलिस में शिकायत कर सकते है।
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(7) आपको वोटर कार्ड जैसा एक मैगनेटिक कार्ड (एटीएम कार्ड के समान) भी दिया जा सकता है, और तलाटी कार्यालय के पास एटीएम जैसी मशीन भी लगवायी जा सकती है, ताकि आप मशीन में किसी शपथपत्र का नंबर डाल कर उस पर अपनी हाँ / ना दर्ज कर सके। उपलब्ध होने पर आप इस सुविधा का उपयोग कर सकते है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद प्रत्येक हाँ / ना दर्ज करने या बदलने पर आपको 1 रू शुल्क चुकाना होगा।
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(8) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे आप अपनी हाँ / ना SMS या मोबाइल एप के माध्यम से दर्ज करवा सके। यदि आप किसी शपथपत्र SMS या मोबाइल एप के माध्यम से हाँ / ना दर्ज करते है तो इसके लिए शुल्क का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
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भाग-II: अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(09) नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (National Informatics Centre) के प्रभारी सचिव को आदेश जारी किये जाते है कि वे ऐसी आवश्यक वेबसाइट आदि की रचना करे जिससे कलेक्टर, पटवारी आदि ऊपर दी गयी धाराओं में दर्ज प्रक्रिया को लागू कर सके।
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(10) मेयर, जिला / तहसील / ग्राम सरपंचों के लिए अबाध्यकारी निर्देश : आप इस कानून में वांछित बदलाव करके ( जैसे मुख्यमंत्री शब्द को मेयर आदि से बदलकर और अन्य आवश्यक परिवर्तन करके ) पारित कर सकते है, एवं नगर / जिला / तहसील / ग्राम स्तर पर यह टीसीपी क़ानून लागू कर सकते है।
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टीसीपी कानून किस तरह से काम करेगा ?
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(1) हम कलेक्टर को अपनी मांग का ज्ञापन दे सकते है, फिर टीसीपी की क्या जरूरत है ?
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जब आप ज्ञापन देते हो कलेक्टर आपकी मांग को बंद लिफाफे में रखकर पीएम को भेज देता है। आपके ज्ञापन को अख़बार ने नहीं छापा है तो आपके ज्ञापन के बारे में सिर्फ 3 लोग जानते है - जिला कलेक्टर, पीएम एवं आप। यदि आप अपने साथ 10-15 लोग साथ में लेकर गए हो तो भी इसके बारे में सिर्फ 100-50 लोगो से ज्यादा को जानकारी नहीं हो पाएगी। सीमित व्यक्तियों द्वारा रखी गयी इस तरह की व्यक्तिगत मांग में पीएम / सीएम का ध्यान आकृष्ट करने का बल नहीं होता। किन्तु टीसीपी में आपकी मांग पीएम के साथ साथ देश के करोड़ो नागरिको के सामने भी दृश्यमान रहेगी।
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शपथपत्र फ़ाइल करने के बाद आप अपनी मांग का प्रचार नागरिको में कर सकते है। अपनी मांग के पेम्पलेट बाँट सकते है, इसके बारे में व्हाट्स एप, फेसबुक, यू ट्यूब आदि सोशल मीडिया मंचो का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा नागरिको से आग्रह कर सकते है, कि वे आपकी मांग का समर्थन करें। यदि उन्हें आपकी मांग ठीक लगती है, और वे इसका समर्थन करना चाहते है तो वे इस पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकेंगे। यदि ज्यादा से ज्यादा नागरिक आपके शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवाते है तो आपकी मांग के समर्थको की संख्या बढती जाएगी और पीएम / सीएम पर इसे लागू करने का दबाब बनने लगेगा। इस तरह टीसीपी में यह व्यवस्था है कि यह अन्य नागरिको को किसी मांग का संगठित रूप से समर्थन करने का अवसर देता है, जो कि ज्ञापन में संभव नहीं है।
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(2) हम अपनी मांग सोशल मीडिया द्वारा भी तो सरकार तक पहुँचा सकते है, फिर टीसीपी की जरूरत क्यों ?
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सोशल मीडिया निजी कम्पनियां है, जबकि टीसीपी एक सरकारी व्यवस्था है। यदि आपकी मांग आगे बढ़ती है तो निजी कम्पनियां आपके प्रस्ताव को हटा सकती है, या इसका सर्कुलेशन रोक सकती है। जबकि टीसीपी में एक बार कोई प्रस्ताव दर्ज होने के बाद इसे न्यायालय के आदेश बिना हटाया नहीं जा सकता। इसके अलावा सोशल मीडिया में कोई भी आई टी सेल या व्यक्ति हजारों छद्म आई डी बनाकर कुछ भी लिखता रह सकता है, अत: अधिकृत नहीं होने कारण इसके कोई मायने नहीं है। पारदर्शी एवं अधिकृत प्रक्रिया होने के कारण टीसीपी विश्वसनीय है।
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(3) पेड मीडियाकर्मी एवं पेड राजनैतिक पार्टियाँ टीसीपी के समर्थन में क्यों नहीं है ?
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दरअसल , पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा समर्थित नेताओं के पास सड़को पर मजमा लगाने का संख्या बल एवं संसाधन होते है। अत: ये 5-10 शहरो में कुछ हजार लोगो को इकट्ठा करके यह स्थापित कर देते है कि जनता अमुक फैसले का विरोध / समर्थन कर रही है। और फिर पेड मीडिया यह मजमा पूरे देश को दिखाकर माहौल बनाता है कि – पूरा देश अमुक विषय का विरोध / समर्थन कर रहा है !! दुसरे शब्दों में वे जनता की मंशा की व्याख्या अपनी मर्जी से कर पाते है।
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उदाहरण के लिए, भारत में 90 करोड़ मतदाता है। लेकिन पेड मीडिया रामलीला मैदान में द अन्ना के कुछ हजार लोगो को को बार बार दिखाकर यह भ्रम खड़ा कर सकते है कि पूरा देश जनलोकपाल की मांग कर रहा है !! इसी तरह वे पेड मीडिया की सहायता से अपनी मर्जी के मुद्दों पर जनसमर्थन दिखाने का गलत भ्रम खड़ा करते है !! टीसीपी जनता की राय की व्याख्या करने का अधिकार पेड मीडिया, पेड मीडिया पार्टियों एवं राजनेताओ से छीन लेता है !! वे जनमत की व्याख्या करने का अधिकार अपने पास चाहते है अत: इस कानून की खिलाफत करते है।
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इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए हम क्या सहयोग कर सकते है ?
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1. कृपया “मुख्यमंत्री कार्यालय ” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे - मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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2. ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र ( inland letter ) भी भेज सकते है।
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3. प्रधानमन्त्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
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4. आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
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तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
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4.1. यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने में भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
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4.2. शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
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4.3. आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
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5. यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
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6. यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , मुख्यमंत्री जी, राज्य टीसीपी क़ानून गेजेट में छापें - #StateTcp
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7. Pm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
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8. अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (10) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इसकी बुकलेट अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
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