Pawan Jury BhilwaraRj
वोट वापसी सरपंच के लिए प्रस्तावित क़ानून
.
Vote Vapsi over Sarpanch
.
RSS समर्थित हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून ला रही है। दुःख का विषय है कि हरियाणा सरकार ने अभी तक (2 सितम्बर 2020) क़ानून का ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया से जो विवरण सामने आये है उससे मालूम होता है कि यह एक बैठक या हस्ताक्षर आधारित नकारात्मक (Negative) राईट टू रिकॉल क़ानून है।
.
सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण जब रिकॉल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, और सरपंच की कुर्सी तब तक खाली रहेगी जब तक अगला चुनाव नहीं होता !! हमारे विचार में, मतदाताओं के पास सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित यह क़ानून आने से अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे प्रशासन और भी बदतर हो जाएगा।
.
निचे राईट टू रिकॉल पार्टी (RRP – Right to Recall Party) द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का एक सकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट दिया गया है। हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून वोट वापसी पासबुक पर आधारित है, और इसमें सरपंच तब तक निष्काषित नहीं किया जाएगा जब तक मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच के रूप में चुन न ले। इस तरह RRP द्वारा प्रस्तावित क़ानून प्रशासन में अस्थिरता नहीं लाएगा, बल्कि सुधार लाएगा।
.
वोट वापसी सरपंच नामक क़ानून RRP द्वारा प्रस्तावित किया गया है, जबकि राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून RSS की हरियाणा सरकार द्वारा लाया जा रहा है। इन दोनों कानूनों का तुलनात्मक विवरण देखने के लिए इस पोस्ट का पहला कमेन्ट देखें।
.
#SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch , #Rrp28
.
[ पंचायतो का प्रशासन बेहतर बनाने के लिए हमने “जूरी पंचायत” नामक क़ानून भी प्रस्तावित किया है। कृपया जूरी पंचायत क़ानून भी पढ़ें। यदि जूरी पंचायत गेजेट में आता है तो इस क़ानून की जरूरत नहीं रह जाएगी। क्योंकि जूरी पंचायत क़ानून में भी सरपंच को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया गया है।]
.
यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे : मुख्यमंत्री जी, वोट वापसी सरपंच क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
.
----क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ----
.
टिप्पणी : इस ड्राफ्ट में दो भाग है - (I) नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश, (II) नागरिकों और अधिकारियों के लिए निर्देश।
.
टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
.
भाग (I) नागरिको के लिए निर्देश :
.
(01) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। ग्राम पंचायत का मुखिया यानी सरपंच इस पासबुक के दायरे में आएगा।
.
तब यदि आप सरपंच के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी दिन स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी।
.
(02) यदि आपका नाम राज्य की वोटर लिस्ट में है और आप इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहते है, तो अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय में इस क़ानून के जनता की आवाज खंड की धारा (8.1) के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकते है। कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर स्कैन करके रखेगा।
.
भाग (II) : अधिकारियों के लिए निर्देश :
.
(03) सरपंच के प्रत्याशी द्वारा आवेदन : यदि पंचायत का कोई मतदाता सरपंच बनना चाहता है तो सरपंच का चुनाव ख़त्म होने के बाद वह किसी भी दिन तहसीलदार कार्यालय में उपस्थित होकर अपना शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। तहसीलदार सरपंच के लिए तय जमानत राशि के बराबर शुल्क लेकर लेकर आवेदन स्वीकार कर लेगा।
.
(3.1) आवेदन जमा होने के बाद यदि प्रत्याशी किसी समय अपना आवेदन वापिस ले लेता है तो यह शुल्क लौटाया नहीं जाएगा।
.
(3.2) तहसीलदार शपथपत्र को स्कैन करके जिला कलेक्टर की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा और प्रत्याशी को एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
.
(04) मतदाता द्वारा प्रत्याशियों का समर्थन करने के लिए हाँ दर्ज करना :
.
(4.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर सरपंच के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी सार्वजनिक करेगा। मतदाता अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृती दे सकता है।
.
(4.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रु होगी। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS द्वारा दर्ज करता है तो सभी मतदाताओ के लिए शुल्क 50 पैसा रहेगा।
.
(4.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा। SMS / APP द्वारा स्वीकृति रद्द करने पर भी कोई शुल्क नहीं देना होगा।
.
(4.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त सभी प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
.
[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
.
रेंज वोटिंग - मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को (-)100 से (+)100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
.
(05) सरपंच के वोट वापसी चुनाव की शर्तें :
.
यदि सरपंच पद के किसी प्रत्याशी को इतनी स्वीकृतियां मिल जाती है जो कि :
.
(5.1) वर्तमान सरपंच को प्राप्त स्वीकृतियों से अधिक हो , तथा
.
(5.2a) यह स्वीकृतियां वर्तमान सरपंच को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो से अधिक हो तथा यह आधिक्य उस पंचायत क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 10% के बराबर हो।
अथवा
(5.2b) यह स्वीकृतियॉं अमुक पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% से अधिक हो।
.
यदि उपरोक्त शर्त पूरी हो जाती है तो मुख्यमंत्री वोट वापसी चुनाव कराने के आदेश जारी करेंगे।
.
स्पष्टीकरण : मान लीजिये किसी पंचायत में कुल 5000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 1500 वोट प्राप्त हुए थे तो वोट वापसी चुनाव सिर्फ तब होगा जब किसी प्रत्याशी को कम से कम 1500+500=2000 से अधिक स्वीकृतियां मिले। क्योंकि यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 1500 में जोड़ा गया है। यदि किसी प्रत्याशी को 2000 से अधिक स्वीकृतियां मिलती है, तो वोट वापसी चुनाव होगा। किन्तु यदि किसी भी प्रत्याशी को 2000 से अधिक स्वीकृतियां नही मिलती है तो चुनाव नहीं होगा।
.
(06) वोट वापसी चुनाव की प्रक्रिया :
यदि धारा (5) में बतायी गयी शर्त पूरी हो जाती है, तो वोट वापसी चुनाव आयोजित किये जायेंगे। वोट वापसी चुनाव के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा :
.
(6.1) मतपत्र पर कुल 11 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर पदासीन (वर्तमान) सरपंच का नाम रहेगा। शेष 10 प्रत्याशी (+NOTA) वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। पदासीन सरपंच को वही चिन्ह आवंटित किया जाएगा जिस चिन्ह पर उसने पूर्व चुनाव जीता है। शेष 10 प्रत्याशीयों को मतपत्र पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। जिसे ज्यादा स्वीकृतियां मिली है उसका नाम मतपत्र पर क्रमिक रूप से ऊपर एवं जिसे कम स्वीकृतियां मिली है, उसका नाम निचे रहेगा। एक बार वोट वापसी चुनावो की घोषणा होने के बाद प्रत्याशी अपना नाम वापस नहीं ले सकेगा।
.
(6.2) यदि वोट वापसी चुनाव में कोई प्रत्याशी इतने वोट प्राप्त कर लेता है कि निचे दी गयी दो में से कोई एक शर्त पूरी हो जाती है तो पदासीन सरपंच के जगह पर अमुक प्रत्याशी को सरपंच नियुक्त कर दिया जाएगा :
.
(6.2.1) यदि किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं (सभी, न कि केवल वे जिन्होंने वोट किया है) के 51% वोट प्राप्त हो जाते है। अथवा
.
(6.2.2a) यदि किसी प्रत्याशी को सबसे अधिक वोट प्राप्त होते है, एवं
.
(6.2.2b) यदि किसी प्रत्याशी को वर्तमान सरपंच को पिछले चुनाव में मिले वोटो से उतने अधिक वोट प्राप्त होते है, जितना पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं का 10% होता है।
.
स्पष्टीकरण 1 : मान लीजिये कि किसी पंचायत के मतदान क्षेत्र में कुल 5,000 मतदाता है, और पिछले चुनाव में मौजूदा सरपंच को 1500 वोट प्राप्त हुए थे तो नए सरपंच को कम से कम 1500+500=2,000 वोट लाने होंगे। क्योंकि यहाँ कुल मतदाता 5000 है अत: इसका 10% = 500 को 1500 में जोड़ा गया है। अब मान लीजिये कि वोट वापसी चुनाव में कोई प्रत्याशी 1800 वोट लाता है और पदासीन सरपंच को वोट वापसी चुनाव में 1400 वोट मिलते है तब भी मौजूदा सरपंच ही सरपंच बना रहेगा। (धारा 6.1)
.
स्पष्टीकरण 2 : मान लीजिये कि किसी पंचायत में 5000 हजार मतदाता है, और मौजूदा सरपंच को पिछले चुनाव में 3500 वोट प्राप्त हुए थे। किन्तु परिक्षण चुनाव में यदि किसी प्रत्याशी को 2600 वोट प्राप्त होते है और मौजूदा सरपंच को 2400 हजार वोट मिलते है तो मौजूदा सरपंच निष्काषित हो जाएगा। क्योंकि (6.2.1) में दी गयी 51% से अधिक मत प्राप्त करने की शर्त पूरी हो चुकी है।
.
(07) सरपंच के लिए सह-चुनाव की अतिरिक्त प्रक्रिया ( Co-Election )
.
(7.1) जब भी जिले में कोई भी पंचायत चुनाव होगा तो इन चुनावों के साथ सरपंच के चुनाव के लिए भी मतदान कक्ष में एक अलग से मतपत्र पेटी रखी जायेगी, ताकि मतदाता यह तय कर सके कि वे मौजूदा सरपंच को जारी रखना चाहते है या नहीं। मुख्यमंत्री एवं राज्य के सभी मतदाता राज्य चुनाव आयुक्त से विनती करते है कि जब भी सांसद या विधायक का चुनाव हो तो भी वे सरपंच के लिए भी एक अलग से पेटी मतदान कक्ष में रखने दें।
.
(7.2) सह चुनाव की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होगी जैसी धारा (6.2) में वोट वापसी चुनाव में बतायी गयी है। सह चुनाव में भी मतपत्र में कुल 11 प्रत्याशियों के नाम होंगे और सबसे ऊपर मौजूदा सरपंच का नाम रहेगा। शेष 10 प्रत्याशी वे होंगे जिन्होने सरपंच के प्रत्याशी के रूप में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां प्राप्त की है। जीत हार का समीकरण फार्मूला ठीक वही रहेगा जैसा वोट वापसी चुनाव में बताया गया है।
.
(08) जनता की आवाज :
.
(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
.
(8.2) यदि कोई मतदाता धारा (8.1) के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
.
[ टिपण्णी : यह क़ानून लागू होने के 4 वर्ष बाद यदि व्यवस्था में सकारात्मक एवं निर्णायक बदलाव आते है तो कोई भी नागरिक इस कानून की धारा 8.1 के तहत एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है, जिसमे उन कार्यकर्ताओ को सांत्वना के रूप में कोई औचित्य पूर्ण प्रतिफल देने का प्रस्ताव होगा, जिन्होंने इस क़ानून को लागू करवाने के गंभीर प्रयास किये है। यह प्रतिफल किसी स्मृति चिन्ह / प्रशस्ति पत्र आदि के रूप में हो सकता है। यदि कोई कार्यकर्ता तब जीवित नही है तो प्रतिफल उसके नोमिनी को दिया जाएगा। यदि राज्य के 51% नागरिक इस शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो मुख्यमंत्री इन्हें लागू करने के आदेश जारी कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। ]
.
----ड्राफ्ट का समापन---
.
इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करवाने के लिए एक आम मतदाता के रूप में आप क्या सहयोग कर सकते है ?
.
(1) कृपया “मुख्यमंत्री कार्यालय” के पते पर पोस्टकार्ड लिखकर इस क़ानून की मांग करें। पोस्टकार्ड में यह लिखे : मुख्यमंत्री जी, प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून गेजेट में छापे - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
.
(2) ऊपर दी गयी इबारत उसी तरफ लिखे जिस तरफ पता लिखा जाता है। पोस्टकार्ड भेजने से पहले पोस्टकार्ड की एक फोटो कॉपी करवा ले। यदि आपको पोस्टकार्ड नहीं मिल रहा है तो अंतर्देशीय पत्र, लिफाफा आदि भी भेज सकते है।
.
(3) प्रधानमन्त्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक रजिस्टर बनाएं। लेटर बॉक्स में डालने से पहले पोस्टकार्ड की जो फोटो कॉपी आपने करवाई है उसे अपने रजिस्टर के पन्ने पर चिपका देवें। फिर जब भी आप पीएम को किसी मांग की चिट्ठी भेजें तब इसकी फोटो कॉपी रजिस्टर के पन्नो पर चिपकाते रहे। इस तरह आपके पास भेजी गयी चिट्ठियों का रिकॉर्ड रहेगा।
.
(4) आप किसी भी दिन यह चिट्ठी भेज सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि सभी नागरिको को यह चिठ्ठी महीने की एक निश्चित तारीख को और एक तय वक्त पर ही भेजनी चाहिए।
.
तय तारीख व तय वक्त पर ही क्यों ?
.
(4.1) यदि चिट्ठियां एक ही दिन भेजी जाती है तो इसका ज्यादा प्रभाव होगा, और मुख्यमंत्री कार्यालय को इन्हें गिनने मंh भी आसानी होगी। चूंकि नागरिक कर्तव्य दिवस 5 तारीख को पड़ता है अत: पूरे देश में सभी शहरो के लिए चिट्ठी भेजने के लिए महीने की 5 तारीख तय की गयी है। तो यदि आप चिट्ठी भेजते है तो 5 तारीख को ही भेजें।
.
(4.2) शाम को 5 बजे इसलिए ताकि पोस्ट ऑफिस के स्टाफ को इससे अतिरिक्त परेशानी न हो। अमूमन 3 से 5 बजे के बीच लेटर बॉक्स खाली कर लिए जाते है, अब मान लीजिये यदि किसी शहर से 100-200 नागरिक चिट्ठी डालते है तो उन्हें लेटर बॉक्स खाली मिलेगा, वर्ना भरे हुए लेटर बॉक्स में इतनी चिट्ठियां आ नहीं पाएगी जिससे पोस्ट ऑफिस व नागरिको को असुविधा होगी। और इसके बाद पोस्ट मेन 6 बजे पोस्ट बॉक्स खाली कर सकता है, क्योंकि जल्दी ही वे जान जायेंगे कि पीएम को निर्देश भेजने वाले जिम्मेदार नागरिक 5-6 के बीच ही चिट्ठियां डालते है। इससे उन्हें इनकी छंटनी करने में अपना अतिरिक्त वक्त नहीं लगाना पड़ेगा। अत: यदि आप यह चिट्ठी भेजते है तो कृपया 5 बजे से 6 बजे के बीच ही लेटर बॉक्स में डाले। यदि आप 5 तारीख को चिट्ठी नहीं भेज पाते है तो फिर अगले महीने की 5 तारीख को भेजे।
.
(4.3) आप यह चिट्ठी किसी भी लेटर बॉक्स में डाल सकते है, किन्तु हमारे विचार में यथा संभव इसे शहर या कस्बे के हेड पोस्ट ऑफिस के बॉक्स में ही डाला जाना चाहिए। क्योंकि हेड पोस्ट ऑफिस का लेटर बॉक्स अपेक्षाकृत बड़ा होता है, और वहां से पोस्टमेन को चिट्ठियाँ निकालकर ले जाने में ज्यादा दूरी भी तय नहीं करनी पड़ती ।
.
(5) यदि आप फेसबुक पर है तो प्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री जी से मेरी मांग नाम से एक एल्बम बनाकर रजिस्टर पर चिपकाए गए पेज की फोटो इस एल्बम में रखें।
.
(6) यदि आप ट्विटर पर है तो मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर के पेज की फोटो के साथ यह ट्विट करें :
@Cmo... , कृपया यह क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRrpRtrSarpanch
.
(7) Pm / Cm को चिट्ठी भेजने वाले नागरिक यदि आपसी संवाद के लिए कोई मीटिंग वगेरह करना चाहते है तो वे स्थानीय स्तर पर महीने के दुसरे रविवार यानी सेकेण्ड सन्डे को सांय 4 बजे मीटिंग कर सकते है। मीटिंग हमेशा सार्वजनिक स्थल पर रखी जानी चाहिए। इसके लिए आप कोई मंदिर या रेलवे-बस स्टेशन के परिसर आदि चुन सकते है। 2nd Sunday के अतिरिक्त अन्य दिनों में कार्यकर्ता निजी स्थलों पर मीटिंग वगेरह रख सकते है, किन्तु महीने के द्वितीय रविवार की मीटिंग सार्वजनिक स्थल पर ही होगी। इस सार्वजनिक मीटिंग का समय भी अपरिवर्तनीय रहेगा।
.
(8) अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरित यह एक विकेन्द्रित जन आन्दोलन है। (08) धाराओं का यह ड्राफ्ट ही इस आन्दोलन का नेता है। यदि आप भी यह मांग आगे बढ़ाना चाहते है तो अपने स्तर पर जो भी आप कर सकते है करें। यह कॉपी लेफ्ट प्रपत्र है, और आप इस बुकलेट को अपने स्तर पर छपवाकर नागरिको में बाँट सकते है। इस आन्दोलन के कार्यकर्ता धरने, प्रदर्शन, जाम, मजमे, जुलूस जैसे उन कदमों से बहुधा परहेज करते है जिससे नागरिको को परेशानी होकर समय-श्रम-धन की हानि होती हो। अपनी मांग को स्पष्ट रूप से लिखकर चिट्ठी भेजने से नागरिक अपनी कोई भी मांग Pm तक पहुंचा सकते है। इसके लिए नागरिको को न तो किसी नेता की जरूरत है और न ही मीडिया की।
.
========