Pawan Jury BhilwaraRj
इस तरह पेड मिडिया ने लॉकडाउन को कोरोना के साथ मिक्स करके कार्यकर्ताओं का ध्यान बंटाया :
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(1a) कोरोना की वजह से कारोबार तबाह हो गया
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सच - कोरोबार को लॉकडाउन ने तबाह किया कोरोना ने नहीं !!
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(1b) कोरोना की वजह से अर्थव्यवस्था टूट गयी
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सच - अर्थव्यवस्था को लॉकडाउन ने तोड़ा कोरोना ने नहीं।
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और पिछले 6 महीने में उन्होंने इसी तरह लगातार गलत रिपोर्टिंग की।
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लॉकडाउन डालने का फैसला प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रियों ने किया था। और पेड मिडिया के प्रायोजक हमेशा से जानते थे कि -- कोरोना को रोकने का लॉकडाउन से कोई लेना देना नहीं है। किन्तु लॉकडाउन जारी रखने के लिए पेड मिडिया कर्मियों ने लॉकडाउन के समस्त दुष्प्रभाव कोरोना के खाते में डाल दिए।
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इससे कार्यकर्ताओ का ध्यान असली समस्या (लॉकडाउन) से हट गया और वे "कोरोना असली / कोरोना फर्जी" की टाइम पास बहस में उलझ गए।
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(2) जिन सूचित कार्यकर्ताओ को पेड मीडिया द्वारा इतनी आसानी से मामू नहीं बनाया जा सकता था उन्हें पेड मीडिया कर्मियों ने बिल गेट्स दे दिया !! यदि कार्यकर्ता बिल गेट्स के कपडे फाड़ने में खुद को व्यस्त न कर लेते तो उनके दिमाग में यह बात आती कि -
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(2a) अर्थव्यवस्था को लॉकडाउन तोड़ रहा है, कोरोना नहीं !!
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(2b) और लॉकडाउन डालने के आदेश पर हस्ताक्षर पीएम ने किये है बिल गेट्स ने नहीं
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(2c) और लॉकडाउन हटवाने के लिए पीएम पर दबाव बनाना होगा बिल गेट्स पर नहीं। क्योंकि बिल गेट्स कभी चुनाव में नहीं आने वाला है !!
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कार्यकर्ता इस बात को समय रहते समझ जाते तो लॉकडाउन हटवाने के लिए पीएम पर दबाव बनाने के लिए कार्य करना शुरू करते, और लॉकडाउन ख़त्म होने की सम्भावना बढ़ जाती। किन्तु उन्होंने अपनी सारी ऊर्जा बिल गेट्स और उसके "भविष्य लक्षी" एजेंडे को "एक्सपोज" करने में लगा दी और लॉकडाउन ख़त्म करने की मुहीम पर काम नहीं कर पाए !!
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और कृपया इस बात को नोट करें कि जिस दिन लॉकडाउन डाला गया था उसके उस दिन भी भारत के 70% नागरिक लॉकडाउन के विरोध में थे !!
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तो बिल गेट्स और उसकी वैक्सीन को चेस करने वाले कार्यकर्ताओ को इस बात पर विचार करना चाहिए कि -- पिछले 6 महीनो में भारत में जो लाखों कारोबारी तबाह हुए है, और करोडो नागरिको को जो आर्थिक / मानसिक परेशानी उठानी पड़ी है उसकी वजह वैक्सीन रही है या लॉकडाउन !! कहने की जरूरत नहीं कि, तबाही लॉकडाउन ने दी है।
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बंदगी हालत से जाहिर है, खुदा हो या न हो !!
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बहरहाल, उनका स्ट्रोक लॉकडाउन था, वैक्सीन नहीं। उन्होंने वैक्सीन-चिप को खतरे के रूप में बताया ताकि कार्यकर्ता बड़े और असली खतरे यानी लॉकडाउन पर ध्यान न दे सके !!
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(2) लॉकडाउन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ पेड मीडिया के प्रायोजकों ने इसका डिजाइन बदल दिया है। और नया डिजाइन ज्यादा घातक है।
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(a) पहले उन्होंने औचक लॉकडाउन डालकर लोगो को जाया तौर पर नुकसान पहुँचाया। यदि लॉकडाउन की पूर्व सूचना दे दी जाती तो काफी लोग नुकसान उठाने से बच जाते।
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(b) जब उन्होंने देखा कि लोग आजिज आ चुके है और अब सम्पूर्ण लॉक डाउन जारी रखना मुश्किल है तो उन्होंने यह कहना शुरू किया कि, हमें कोरोना के साथ रहने की आदत डालनी होगी।
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(c) किन्तु उन्होंने लॉकडाउन पूरी तरह से नहीं खोला। बल्कि इस तरह के निर्बंधन लगाए है जिससे कारोबार पूरी क्षमता से काम नहीं कर सके। उन्होंने अलग अलग शहरो में कारोबार के कार्य घंटे सीमित कर दिए। ट्रेन, परिवहन आदि को नहीं खोला। कभी एक शहर में ढील देते है पर दूसरे शहर में प्रतिबन्ध बढ़ा देते है।
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अर्थव्यवस्था आंशिक रूप से नहीं चल सकती। अर्थव्यस्था सिर्फ तब ही पटरी पर आएगी जब लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करके सभी निर्बंधन हटा लिए जाए।
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आधी क्षमता से काम करने के कारण कारोबार में अब भी घाटा हो रहा है। क्योंकि धंधा करने की एक स्थायी लागत होती है। जिसमें बिजली, भाड़ा, वेतन, मेंटेनेंस आदि शामिल है। यदि कारोबार पूरी क्षमता से काम नहीं करेगा तो बिक्री कम होगी और स्थायी लागत बढ़ने के कारण घाटा होगा।
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इस समय ज्यादातर कारोबारी इसी वजह से घाटा बना रहे है। जब अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगेगी तब वे फिर से प्रतिबन्ध बढ़ाकर कारोबार को तोड़ेंगे। और इस तरह का सर्कस वे अगले 1 वर्ष तक चलाएंगे !! और लगभग साल भर बाद जब लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त होगा तब न तो लोगो के पास पैसा बचेगा, न कारोबार करने की हिम्मत रहेगी !! और तब बड़ी एवं विदेशी कंपनियों का हिस्सा बाजार में बढ़ जायेगा !!
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समाधान - आने वाली 5 तारीख को 5 बजे प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजें। और अपने आस पास के कारोबारियों को सूचित करें कि यदि वे लॉकडाउन को पूर्णतया समाप्त करना चाहते है तो वे भी पीएम को पोस्टकार्ड भेजकर लॉकडाउन पूर्णतया समाप्त करने की मांग करें।
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