Pawan Jury BhilwaraRj
ज़हालतो के सारे अँधेरे मिटाकर लौट आया
मैं आज सारी किताबें जला कर लौट आया -- 'राहत इन्दोरी'
.
हालांकि , शेर, ग़ज़ल, काव्य आदि गंभीर विषय को भी रूमानी बनाकर पेश करने के लिए कुख्यात है , किन्तु मेरे मानने में यह शेर एकदम सच्चा है। एक कैफियत यह दी जानी जरुरी है कि इन किताबों में गणित-विज्ञान-तकनीक की पुस्तकों को छोड़ते हुए कक्षा 5 से कोलेज में पढाई जाने वाली सभी पाठ्यपुस्तके शामिल है। शिक्षा का स्तर जैसे जैसे बढ़ता जाता है , जहालत यानी अशिक्षा एवं मूढ़ता के अँधेरे और भी घने होते जाते है। और इनमे पाठयपुस्तको से इतर वे पुस्तके विशेष रूप में शामिल है जिनका विषय सामाजिक सौद्देश्य एवं राजनीतिक होता है। और राजनितिक विज्ञान, समाज शास्त्र , अर्थशास्त्र एवं इतिहास की पुस्तके इनमे सबसे कुख्यात है।
.
एक उम्र निकल जाती है इससे उभरने में। क्योंकि पाठक को लगता है कि वह इन्हें पढ़कर ज्ञान हासिल कर रहा है। उसे इस बात का इल्म ही नहीं होता कि शासको को उन्हें ज्ञानी बनाने में कोई रूचि नहीं है। वे उन्हें जाहिल बनाए रखना चाहते है , ताकि उन्हें शासित किया जा सके। यदि अवाम में बोध विकसित हो गया तो उन पर अनुचित रूप से शासन करना मुमकिन नहीं रह जाएगा। यदि अवाम को कचरा किताबें उपलब्ध नहीं कराई जायेगी तो वे अपना दिमाग भिड़ाना शुरू कर देंगे। इसीलिए उनकी जिज्ञासा शांत करने और उनका भ्रम बनाए रखने के लिए इस कचरे का उत्पादन किया जाता है। इस तरह अवाम को शिक्षा देने का चूपा देकर अशिक्षित रखा जाता है।
.
इसी विषय पर एक सम्बंधित लेख यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1722953651156197>
=========