> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-07-27

Pawan Jury BhilwaraRj

एक नयी समस्या जो भारत में लगातार बढ़ रही है। भारत में शिक्षा का प्रसार होने से भारत की राजनैतिक व्यवस्था में सुधार आने की संभावनाएं कमजोर होती जा रही है। जैसे जैसे शिक्षा का स्तर और दायरा बढ़ेगा, वैसे वैसे स्थिति और भी बदतर होती चली जायेगी।
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क्योंकि शिक्षित व्यक्तियों में से ज्यादातर लोग कई माध्यमो से अफीम का सेवन करने लगते है -- वे अखबार खाते है , मेगजीन पीते है, समाधान बताने की जगह राजनैतिक समस्याओं की व्याख्या करने वाले पेड बौद्धिक लेखको की किताबो की जुगाली करते है , इसी प्रकार के पेड ( कचरा ) लेखको की स्पीचे सुनते है और इसी रौ में खुद को जागरूक और सामने वाले को भेड़-बकरा मानकर चलते है। वे अपनी पूरी खुराक इसी लुगदी साहित्य से पूरी करते है। और इस मलबे की बुनियाद में उन सैंकड़ो किताबो की तह जमी रहती है, जो वे अपनी शिक्षा पूरी करने के दौरान पढ़ते है। जैसे जैसे इनकी उम्र और शिक्षा बढती जाती है मलबे का यह पहाड़ भी बढ़ता जाता है। इनके कोमन सेन्स को यह वजन पूरी तरह से आच्छादित कर लेता है। फिर जब भी ये कुछ उगलते है तो उनका स्त्रोत यही कबाड़ होता है। कला वर्ग के शिक्षितों के हालात इस मामले में सबसे ज्यादा शोचनीय है। ज्यादातर अशिक्षित व्यक्ति इस मलबे से वंचित होने के कारण यथार्थ से जुड़े रहते है।
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यथार्थ से जुड़े होने के कारण अशिक्षित व्यक्ति यह बात जल्दी समझ जाते है कि देश कि व्यवस्था में क्या दोष है और इसे किस तरह से सुधारा जा सकता है। लेकिन पढ़ लिख गए लोगो को सरल समाधान से एक तरह का परहेज होता है। उनकी रुचि राजनितिक समस्याओं को दर्शन और बौद्धिक विलास से जोड़ देने में अधिक होती है। और टुच्चेपन में इनका स्तर इतना गिरा हुआ होता है कि देश के खराब हालात के लिए अशिक्षितों को जिम्मेदार ठहराने का ये कोई मौका नहीं चूकते। इस विषय पर फिर कभी विस्तार से लिखा जायेगा।
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समाधान - राईट टू रिकॉल मानव संसाधन मंत्री एवं शिक्षा मंत्री का क़ानून आने से पाठयपुस्तको के माध्यम से पिलाई जा रही अफीम पर रोक लगाई जा सकती है , एवं राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष का क़ानून मीडिया द्वारा परोसे जाने वाले नशे पर रोक लगा देगा। इसके अलावा शेष फुटकर नशे के कारोबारियों को साधने के लिए जूरी सिस्टम भी आवश्यक है।
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इन क़ानूनो के प्रस्तावित ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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