Pawan Jury BhilwaraRj
"न्याय में देर है अंधेर नहीं है" --- यह कहावत एक अन्यायी एवं दोषपूर्ण व्यवस्था का औचित्य साबित करने की दार्शनिक कोशिश है। यह डायलोग एक प्रकार से उन करोडो वादीयो का मजाक भी उड़ाता है, जो बरसो से अदालतों में चक्कर लगा रहे है। इस तरह की कहावतें इसीलिए प्रचलित की गयी है ताकि अवाम के बरसो तक धूल फांकने के बावजूद मिले विलम्बित न्याय को महिमामंडित किया जा सके। यथार्थ यह है कि अपराधियों को दंड मिलने में जितनी देरी होती है , अपराधियों के हौंसले उतने ही बुलंद होते जाते है। अपराध की रोकथाम के लिए तवरित दंड जरुरी है। हालाँकि "न्याय में देर है अंधेर नहीं है" ईश्वरीय दंड के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता है। मतलब जब व्यवस्था असफल रहेगी तो ईश्वर दंड देगा। व्यवस्था द्वारा दिया गया दंड त्वरित होता है और इसे त्वरित ही होना चाहिए।
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भारत में कुल 3 करोड़ से ज्यादा मुकदमे अदालतों में लंबित है !! हमारे देश में जजों कि संख्या कुल 20 हजार है , चीन में यह संख्या 2 लाख है !! जबकि अमेरिका-ब्रिटेन में ज्यूरी सिस्टम होने के कारण किसी भी मुकदमे का फैसला हफ्ते दो हफ्ते में ही आ जाता है। "न्याय में देरी" उस कारखाने मालिक को तबाह कर देती है जिसकी फेक्ट्री फर्जी मुकदमो के कारण बंद पड़ी है और जब तक फैसला आता है तब तक वह कभी न उबरने वाले घाटे में डूब चुका होता है !!
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समाधान -- ज्यूरी सिस्टम, राइट टू रिकॉल जज के क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए। एवं भारत में जजों कि संख्या बढाकर 2 लाख की जाए।
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इन क़ानूनो के प्रस्तावित ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>
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another example of wrongful saying is -- we want justice !!
dont say we want justice, say -- "we want to give justice" . jury system will bring this choice.
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