> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-07-29

Pawan Jury BhilwaraRj

न्यू इंडिया ( newindia. in ) पोर्टल शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद।
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न्यू इंडिया वेबसाईट को मोदी साहेब ने अगस्त 2014 में शुरू किया था। इससे पहले ऐसा कोई मंच नहीं था जहाँ व्यक्ति अपना सुझाव पीएम के सामने रख सके। लेकिन अब ये व्यवस्था उपलब्ध है। इस वेबसाईट पर कोई भी व्यक्ति अपने विस्तृत सुझाव का पीडीऍफ़ डाउनलोड कर सकता है। पीएम किसी सुझाव पर अमल करेंगे या नहीं यह उन पर निर्भर है , किन्तु कम से कम अब व्यक्ति अपना सुझाव सीधे पीएम को भेज सकते है। वो भी त्वरित गति से।
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न्यू इण्डिया पर सुझाव / प्रस्ताव रखने का तरीका :
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1) mygov पर आई डी बनाकर लॉग इन करें
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2) अपने लिखित सुझाव का पीडीऍफ़ बनाकर newindia पर इसे सम्बंधित वर्ग में डाउनलोड करें।
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3) प्रपोजल अपलोड करने के बाद आप इसका लिंक अपनी फेसबुक एवं ट्विटर वाल पर शेयर कर सकते है।
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उदाहरण के लिए यह लिंक देखें --<https://newindia.in/causes/twochildlaw5/>;
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न्यू इण्डिया पर रखे गए किसी प्रस्ताव पर वोटिंग करने की प्रक्रिया :
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न्यू इण्डिया में एक फीचर और है। यदि कोई व्यक्ति newindia पर रखे गए किसी प्रस्ताव से सहमत है तो वह इस प्रस्ताव पर अपना वोट कर सकता है। यदि आपने newindia पर आई डी नहीं बनायी है तो वोट करने के लिए पहले आपको अपनी आई डी बनानी होगी। यदि आपने आई डी बना ली है तो आप लॉग इन करके किसी भी प्रस्ताव पर वोट कर सकते है, एवं इस प्रस्ताव को अपने फेसबुक / ट्विटर वाल पर शेयर कर सकते है।
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उदाहरण के लिए इस प्रस्ताव पर वोट करके देखें -- <https://newindia.in/causes/twochildlaw5/>;
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newindia के लाभ :
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1) सुझाव आमंत्रित करने के लिए newindia भारत सरकार एवं प्रधानमंत्री कि अधिकृत वेबसाईट है। एवं इसे इसीलिए शुरू किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति अपना सुझाव त्वरित गति से भारत के प्रधानमंत्री के सम्मुख रख सके। यह पूरी तरह से निशुल्क है।
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2) newindia पर किसी सुझाव पर वोट भी किया जा सकता है।
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3) newindia पर रखे गए प्रस्ताव को प्रस्तावक द्वारा न तो एडिट किया जा सकता है और न ही इसे डिलीट किया जा सकता है। इससे प्रस्ताव कि विश्वसनीयता बनी रहती है।
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newindia की मुख्य कमियां :
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1) newindia में आधार कार्ड के साथ साथ फेसबुक , ट्विटर , इ मेल आदि से भी लॉग इन किया जा सकता है। इस तरह newindia पर की गयी वोटिंग काउंट में विश्वसनीयता नहीं है। एक ही व्यक्ति सैंकड़ो आई डी बनाकर किसी प्रस्ताव पर वोटिंग कर सकता है। अत: नागरिक यह कभी नहीं जान सकते कि किसी प्रस्ताव को समर्थन देने वाले "वास्तविक मतदाताओं" की संख्या क्या है।
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किन्तु उल्लेखनीय है कि newindia में आधार कार्ड से लॉग इन करने का भी विकल्प है। अत: यदि प्रधानमंत्री चाहे तो यह जान सकते है कि किसी प्रस्ताव को कितने वास्तविक लोगो ने समर्थन दिया है।
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2) newindia पर एक बार वोट करने के बाद अपना वोट बदला नहीं जा सकता।
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3) newindia सिर्फ केन्द्रीय स्तर पर उपलब्ध है, राज्यों एवं जिला स्तर पर नहीं।
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4) सरकार खुद ही इसे प्रमोट नहीं कर रही है , अत: यह पोर्टल नामालूम एवं मुख्य धारा से कटा हुआ है। जब तक इस पर यूजर नहीं बढ़ेंगे तब तक इसमें सुधार आने कि गुंजाइश भी नहीं के बराबर है।
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हमें केंद्र के साथ साथ राज्य एवं जिला स्तर पर भी जनमत संग्रह की ऐसी प्रक्रिया चाहिए जिससे मतदाता ( न कि व्यक्ति ) अपना सुझाव प्रधानमन्त्री एवं नागरिको के सम्मुख रख सके एवं किसी प्रस्ताव पर अपना समर्थन / विरोध दर्ज करवा सके। newindia यह सुविधा तो देता है कि आप पीएम के सम्मुख अपनी मांग रख सके , किन्तु यह व्यवस्था नहीं देता जिससे यह जाना जा सके कि कितने मतदाता अमुक प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में है। बहरहाल , मोदी साहेब ने आधा काम तो किया है, और इससे कार्यकर्ताओ को अपनी बात सीधे पीएम तक पहुँचाने की सुविधा मिली है। उन्होंने इसे आधा अधुरा क्यों लागू किया है इस विषय पर किसी अन्य पोस्ट में लिखा जाएगा। दरअसल यह आधा टीसीपी है। टीसीपी का पूरा ड्राफ्ट मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पिक्चर के डिस्क्रिप्शन में देखें।
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newindia को लेकर मेरा रुख :
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मेरा कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि यदि वे पीएम से कोई मांग करना चाहते है तो इस मागं को लिखित रूप में newindia पर अपलोड करें एवं अन्य नागरिको से इस प्रस्ताव पर वोट करने को कहे। फेसबुक, ट्विटर आदि सरकार द्वारा शुरू किये गए मंच नहीं है, बल्कि नागरिको के आपसी संचार के लिए है। इसीलिए यदि आप पीएम तक कोई मांग पहुँचाना चाहते है तो, सबसे पहले इसे newindia पर रखें , और तब सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रस्ताव का नागरिको में प्रचार करें। यदि आप अपनी मांग का प्रचार सिर्फ नागरिको में करते है किन्तु पीएम को नहीं भेजते है तो आप उस वकील की तरह पेश आ रहे है जो पान के गल्ले पर बढ़ चढ़कर दलीले देता है , किन्तु जज के सामने जाते ही खामोश हो जाता है।
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जैसे जैसे ज्यादा नागरिक newindia का इस्तेमाल करने लगेंगे वैसे वैसे पीएम पर यह दबाव बनेगा कि वे newindia में सुधार लाये। हमने newindia के माध्यम से प्रधानमंत्री को यह प्रस्ताव भेजा है कि newindia पर लॉग इन के लिए आधार को अनिवार्य किया जाए, तथा newindia पर वोटिंग की सुविधा पटवारी कार्यालय पर भी उपलब्ध कराई जाये , ताकि मतदाता बिना इंटरनेट एवं बिना मोबाइल के भी अपना वोट कर सके।

newindia पर रखा गया यह प्रस्ताव यहाँ देखें -- <https://newindia.in/causes/allowvotingonnewindiaviapatwarioffice/>;
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