Pawan Jury BhilwaraRj
जिओ इंस्टिट्यूट -- मौजूदा नीति के अनुसार अभी जिओ इंस्टीट्यूट को कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलेंगे , लेकिन इसे IoE = institute of excellence का दर्जा होने के कारण आने वाले समय में इसे भारी भरकम प्रोजेक्ट के नाम पर सरकार से बड़ी धनराशि मिलेगी।
.
-----------
.
ONGC / GAIL आदि ने तेल की वास्तविक रॉयल्टी से कम चुका कर भारत में बड़े पैमाने पर लूट चलायी और इस घपले से ONGC / GAIL के कर्मचारीयों / मंत्रीयों / जजों ने मोटा पैसा बनाया। ONGC के सामान्य कर्मचारी के पास भी करोड़ो की सम्पत्ति है !! मेरे एक परिचित 2010 में ONGC के शीर्ष अधिकारी के संपर्क में आये थे , और ये अधिकारी तब 300 करोड़ का निवेश करने के लिए प्रॉपर्टी ढूंढ रहे थे !!!
.
तो भारत के सभी सार्वजनिक उपक्रम = PSU संसाधनों को लूटने के अड्डे बने हुए है , और यह लूट मंत्रियो की मिली भगत से चलायी जाती है। और तेल के धंधे में लगे हुए सार्वजनिक उपक्रम इस प्रकार के घपलो के महारथी है।
.
रिलायंस ने भी इस तरह से लूट चलायी। रिलायंस ने मंत्रियो को घूस दी और एवज में मंत्रियो ने उनके लिए रॉयल्टी की सस्ती दरें तय की। और इस तरह रिलायंस ने भारी मुनाफा कमाया। लेकिन रिलायंस के कर्मचारियों के पास घपले करके करोड़ो रूपये बनाने का अवसर नहीं है। हालांकि रिलायंस के शीर्ष अधिकारियों ने इससे हजारो करोड़ रूपये बनाये , किन्तु रिलायंस के मध्यम दर्जे के अधिकारीयों की तुलना में ONGC के कर्मचारी काफी अधिक अमीर है।
.
मुफ्त में लूटे गए इसी पैसे के एक हिस्से का इस्तेमाल जिओ मोबाइल जैसी चैरिटी योजना में किया गया , और जिओ इंस्टीट्यूट भी इसी तरह की चैरिटी योजना है। इस तरह की चैरिटी में व्यक्ति से उसके हिस्से के 100 रूपये नियमो के अधीन लूट लिए जाते है और इसमें से 2 रूपये चैरिटी के रूप में लौटा दिए जाते है। । लेकिन ONGC इस तरह की लूट चलाने के बावजूद इस तरह की कभी कोई चैरिटी नहीं करता। ONGC सिर्फ मंत्रियो एवं कर्मचारियों के लिए ही पैसा बनाता है !!
.
और रिलायंस रोकेफेलर की कम्पनी है। रोकेफेलर सामने से रिलायंस का CEO बनकर इसे नहीं चलाना चाहता, क्योंकि उसे मालूम है कि भारतीयो को गोरो से एलर्जी है। और इसीलिए रोकेफेलर को भारत में कारोबार करने के लिए एक भारतीय चेहरा चाहिए। तो इसीलिए हमारे पास अम्बानी है। 1858 के बाद ब्रिटिश भारतीय राजाओ के माध्यम से ही अपना संचालन करते थे। यह वही स्थिति है।
.
कहानी का सबक यह है कि -- जब तक भारत में ONGC जैसी संस्थाएं लूट चलाती रहेगी तब तक वे ऐसी निजी कंपनियों को खड़ा रखेंगे जो ONGC जैसी अति भ्रष्ट कम्पनियो की तुलना में ज्यादा अच्छी नजर आये।
.
समाधान -- हमारा प्रस्ताव है कि MRCM , Rtr पेट्रोल मिनिस्टर , Rtr ओएनजीसी चैयरमेन और इन सार्वजनिक उपक्रमों पर ज्यूरी सिस्टम क़ानून लागू किया जाए। MRCM यह सुनिश्चित करेगा कि तेल की रॉयल्टी ऊँचे दाम पर तय हो और यह प्रत्येक भारतीय के खाते में सीधे जमा की जाए। साथ ही राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम इन संस्थाओ में घपले होने की सम्भावना न्यूनतम कर देगा।
.
इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए मेरी फेसबुक प्रोफाइल के कवर पेज को क्लिक करे , एवं @pmoindia पर ट्वीट भेजे कि इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
.
====================