> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-07-23

Pawan Jury BhilwaraRj

लोकतंत्र की मेरी परिभाषा :
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साम्यवाद , उदारवाद , पूंजीवाद , राष्ट्रवाद आदि की तरह ही लोकतंत्र भी एक वाद है। वाद मतलब -- जिसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा न हो , जिसकी अपने मन मुताबिक़ व्याख्या की जा सके, जिसमे आदर्श एवं अव्यवहारिकता का अजीब घालमेल हो , जिसको लागू करने की कोई प्रक्रिया न हो। कुल मिलाकर लोगो को कन्फ्यूज करने और अपनी बौद्धिकता का आतंक जमाने के लिए की गयी शुद्ध दार्शनिक राजनैतिक बकवास। माने फुल सर्कस !!
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मैं बहुधा लोकतंत्र शब्द का इस्तेमाल करता हूँ। अत: मैं जब "लोकतंत्र" कहता हूँ तो मेरा इस लफ्ज से आशय क्या है उसकी परिभाषा नीचे दी गयी है। यह परिभाषा राजनीति विज्ञान की किताबों में लिखी गयी लोकतंत्र की परिभाषा की बकवास ( 'जनता का जनता के लिए जनता द्वारा' ) से भिन्न है।
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लोकतंत्र की परिभाषा एवं इसकी प्रक्रिया -
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इन पांच प्रक्रियाओं से युक्त व्यवस्था को लोकतंत्र कहा जाता है --- १) इलेक्शन , २) रिकॉल , ३) रेफरेंडम , ४) ज्यूरी ट्रायल , ५) हथियार बंद नागरिक समाज
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१) लोक = नागरिको के पास नोड़ल अधिकारियो एवं प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार होना चाहिए।
२) नागरिको के पास बहुमत का प्रदर्शन करके नोड़ल अधिकारियो एवं प्रतिनिधियों को किसी भी समय नौकरी से निकालने का अधिकार होना चाहिए।
३) नागरिको के पास जिला, राज्य एवं केंद्रीय स्तर पर जनमत प्रक्रियाएं होनी चाहिए।
४) दंड देने की शक्ति नागरिको के पास होनी चाहिए।
५) नागरिको के पास बन्दुक रखने का अधिकार होना चाहिए।
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इन प्रक्रियाओ को लागू करने के लिए जिन क़ानून ड्राफ्ट्स को गेजेट में प्रकाशित करने की जरूरत है उन्हें देखने के लिए इस लिंक पर जाएँ -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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भारत में ऊपर दिए गए 5 बिन्दुओ में से नागरिको के पास सिर्फ एक ही प्रक्रिया है, शेष नदारद है। अत: भारत में लोकतंत्र कि जगह छद्म लोकतंत्र या लोकतंत्र का विकृत रूप है।
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