> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2021-10-29

Pawan Jury BhilwaraRj

Hitesh Shakya – Thinker Vs Doer
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कुछ 2 वर्ष पूर्व जब हितेश जी से मेरी पहली मुलाकात हुई थी तो हमने राजनैतिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की थी । इसी दौरान इस बिंदु पर भी तफसील से बात हुई कि क्यों कोई भी राजनैतिक बदलाव लाने के लिए युवाओं को अधिक से अधिक चुनावी राजनीती में भाग लेना चाहिए।
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मुझे जरा भी उम्मीद नहीं थी, कि हितेश जी चुनाव लड़ने के महत्त्व को इतनी जल्दी समझ लेंगे। अमूमन जब कोई व्यक्ति राईट टू रिकॉल मूवमेंट के संपर्क में आता है तो वोट वापसी, जूरी कोर्ट कानूनों के ड्राफ्ट्स की उपयोगिता समझने में उसे हफ्तों एवं कभी कभी महीनो लग जाते है।
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और ड्राफ्ट्स की उपयोगिता समझने के बाद भी उसे यह बात समझने में और भी ज्यादा वक्त लगता है कि, क्यों इन कानूनों की मांग आगे बढ़ाने के लिए उन्हें चुनावों में आना होगा, और इससे भी ज्यादा वक्त उन्हें चुनावों में आने की हिम्मत जुटाने में लगता है, (जिसके पीछे वजह वास्तविक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक है)।
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हितेश जी ने ये पूरा फासला सिर्फ 48 घंटो में तय कर लिया था !! उन्होंने ड्राफ्ट पढने के दुसरे दिन ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी, और उन्होंने वोट वापसी, जूरी कोर्ट के मुद्दे पर दो बार चुनाव लड़ा भी।
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यह अंतर ज्ञान होने और कदम उठाने का है। आपके पास कितना भी ज्ञान हो, यदि आप कदम नहीं उठाते तो ऐसे ज्ञान की कोई व्यवहारिक उपयोगिता नहीं। क्योंकि बदलाव सिर्फ कदम उठाने से ही आता है। कोरा ज्ञान कोई बदलाव लेकर नहीं आता।
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