Pawan Jury BhilwaraRj
देश की राजनीती में आपकी हैसियत एक वोटर है, वोटर के अलावा कुछ नहीं। आपको जितना भी राजनैतिक ज्ञान है उसका इस्तेमाल अंत में आप सिर्फ यह तय करने में करते है / कर सकते है कि, आपको वोट किसे देना है !!
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जब आप अशिक्षित होते है या आप पढ़ लिख जाते है तब भी सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे देना है
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जब आप ज्ञानी हो जाते है तब भी सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे देना है
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यदि आप जागरूक है तब भी और जागरूक नहीं है तब भी आप सिर्फ यह फैसला करते है कि वोट किसे करना है।
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आपकी सारी राजनितिक समझ, राजनैतिक ज्ञान, राजनैतिक जागरूकता अंत में आपके लिए सिर्फ एक फैसला लेकर आती है कि -- आप वोट किसे देंगे !!
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पूरे राजनैतिक परिदृश्य में अधिकृत रूप से आपकी सिर्फ एक भूमिका है कि -- आप वोट करते है और आपकी समझ इससे तय होती है कि आप किसे वोट करते है !!
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जब एक व्यक्ति A जो कि काफी पढ़ा लिखा, ज्ञानी एवं जागरूक है और पार्टी X को वोट करता है, और एक व्यक्ति B जो कि अशिक्षित एवं अजागरूक है, और वह भी पार्टी X को वोट करता है तो राजनैतिक रूप से दोनों (A+B) की भूमिका एक ही सफ में आ जाती है।
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तो आगे से जब भी आप किसी कार्यकर्ता को सोशल मीडिया पर राजनैतिक पंचायत करते देखे तो उससे पहला प्रश्न यह अवश्य पूछे कि आगामी चुनाव में वो किसे वोट करने वाला है, और वह किस पार्टी के उम्मीदवार को वोट करने की सलाह देता है। यदि अमुक व्यक्ति इस प्रश्न का जवाब देने में आनाकानी करता है, या इस प्रश्न को टाल देता है, आगे से उसे सुनना बंद कर दें। क्योंकि वह काम की बात का जवाब देने के अलावा सभी तरह की बकवास करके आपका टाइम खराब कर रहा है।
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मैं उदाहरण से इसे और भी स्पष्ट करता हूँ :
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(1) उल्लेखनीय है कि - कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी, सपा, बसपा, शिवसेना आदि को शामिल करते हुए भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ भी FDI के समर्थन में ही है। और यदि पेड मीडिया पार्टियाँ सत्ता में आती है तो यह नीति जारी रहेगी। और भारत की किसी भी पेड मीडिया पार्टी के घोषणा पत्र में आपको यह लिखा नहीं मिलेगा कि वे fdi के खिलाफ है।
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अभी मोदी साहेब धड़ाधड़ सभी क्षेत्र FDI के लिए खोल रहे है, और देश के सार्वजनिक उपक्रम (जो कि हम नागरिको की संपत्ति है) औने पौने दामो में बेच रहे है। और आपको फेसबुक पर ऐसे लाखों कार्यकर्ता मिलेंगे तो मोदी साहेब की इस "India on OLX"योजना के विरोध में लिख रहे है, और मोदी साहेब को गलिया रहे है। सोशल मीडिया पर आपको ऐसे हजारो राजीव वादी कार्यकर्ता मिलेंगे जो FDI के विरोध में है।
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लेकिन जब आप इन लोगो से पूछेंगे कि - FDI को रोकने के लिए हमें किस पार्टी को वोट करना चाहिए ? तो ये आपको सीधा कोई जवाब नहीं देंगे !! और बीजेपी का विरोध करने वाले ये लोग घूमा फिरा कर आपको उन्ही पार्टियों को वोट करने को कहेंगे जो पार्टियां fdi के समर्थन में है !!
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(2) इसी तरह भारत की किसी भी पेड मीडिया पार्टी ने लॉकडाउन और बाध्यकारी वैक्सीन का विरोध नहीं किया, और न ही आज कोई भी पार्टी इसका विरोध कर रही है। लेकिन न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ताओ से आप पूछेंगे कि न्यू वर्ल्ड ऑर्डर को रोकने के लिए आगामी चुनावों में किस पार्टी को वोट करना चाहिए तो वे कोई सीधा जवाब नहीं देंगे। वे घूमा फिरा कर आपको उन्ही पार्टियों को वोट करने कोई कहेंगे जो पार्टियाँ न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के समर्थन में है।
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राजनैतिक ज्ञान बाँटने वाले ये सभी कार्यकर्ता किसी न किसी पेड मीडिया पार्टी से सम्बद्ध होते है और इनकी मंशा यही होती है कि सरकार की गलत नीतियों के प्रति आपके असंतोष को तिरोहित करके यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप पेड मीडिया पार्टियों को ही वोट करते रहे। और जब तक आप पड़ी मीडिया पार्टियो को वोट करते रहेंगे पेड मीडिया पार्टियों की ताकत बनी रहेगी।
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