Pawan Jury BhilwaraRj
चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म नहीं भरने का खामियाजा जो हमने भुगता !!
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(1) 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में हम भीलवाड़ा की 7 विधानसभाओ से चुनाव लड़ रहे थे और हमें 7 नोमिनेशन फॉर्म भरने थे। 12 नवम्बर को फॉर्म मिलने शुरू हुए और 19 नवम्बर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी। नोटिफिकेशन निकलने से पहले तक हममे से किसी ने भी न तो नोमिनेशन फॉर्म भरा था, और न ही इसे देखा था। 13 नवम्बर को हम कलेक्ट्री से फॉर्म लाये और 14 को हमने इन्हें भरना शुरू किया।
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(2) नतीजा : मैं, और अन्य कार्यकर्ता सुबह 11 बजे से फॉर्म भरना शुरू करते थे, और रात 2-3 बजे तक फॉर्म भरते रहते थे। इस तरह हम अगले 6 दिन तक 14 से 16 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से फॉर्म भरने का काम कर रहे थे !! बावजूद इसके हम अपने सभी फॉर्म अंतिम दिनांक (19 नवम्बर 2018) तक ही पूर्ण कर पाए, और सभी फॉर्म अंतिम तारीख को ही जमा किये गए !!
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(3) खामियाजा :
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(3.1) हमारे 2 फॉर्म रिजेक्ट हुए। ये दोनों फॉर्म यदि हमने सिर्फ 2 दिन पहले भी (यानी 17 तारीख को) जमा कर दिए होते तो ये फॉर्म स्वीकार हो सकते थे। क्योंकि तब हमारे पास इनमे सुधार करने का वक्त होता।
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(3.2) फॉर्म भरने के दौरान हमें जिस तनाव से गुजरना पड़ा उसमें हमारी पूरी ताकत ख़त्म हो चुकी थी। और हम केम्पेन ठीक से नहीं चला पाए।
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राहुल भाई ने मुझे 2017 से ही यह बोलना शुरू कर दिया था कि, चाहे मैं चुनाव लडूं या न लडूँ लेकिन मुझे नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास कर लेना चाहिए। लेकिन चूंकि मैं पार्टी के दीगर कार्यो (ड्राफ्ट, पेम्पलेट बनाना आदि) में भी व्यस्त था अत: मैंने फॉर्म भरने के अभ्यास पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन यह भी सच है कि, मैं चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म भरने की उपयोगिता तो समझ नहीं पाया था, और मैंने इसे लापरवाही में लिया।
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(4) 2021 में भीलवाड़ा में पार्षद चुनाव आये, और इस बार हम 24 सीट लड़ने वाले थे। लेकिन बार बार आग्रह करने के बावजूद किसी भी कार्यकर्ता ने चुनाव पूर्व नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास नहीं किया था !!
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(5) नतीजा : हमने नोटिफिकेशन आने के बाद फॉर्म भरने शुरू किये। रोज हमारे 12-14 घंटे फिर से फॉर्म भरने में जाया होना शुरू हुए। हमने पूरी कोशिश की कि अंतिम तारीख से एक दिन पहले ही सभी फॉर्म जमा कर दें, किन्तु फिर भी 24 में से 7 फॉर्म हम फिर से अंतिम तिथि को ही जमा कर पाए।
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(6) खामियाजा :
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(6.1) हमारे फिर से 2 फॉर्म अस्वीकृत हुए और 1 फॉर्म समय निकल जाने के कारण हम जमा नहीं कर पाए।
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(6.2) फॉर्म भरने की प्रक्रिया ने हमें मानसिक-शारीरिक रूप से काफी थका दिया था, और इसने हमारे प्रचार एवं प्रचार सामग्री के निर्माण की तैयारी पर असर डाला।
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विधानसभा चुनावों में फॉर्म भरने के दौरान मैं, रामेश्वर जी, ईश्वर जी, स्वप्नेश जी, महावीर जी आदि कार्यकर्ता नामांकन फॉर्म भरना सीख चुके थे, और सिर्फ इस वजह से पार्षद चुनावों में हमारे सिर्फ 2 फॉर्म अस्वीकार हुए। यदि हमनें विधानसभा चुनावों में फॉर्म न भरे होते तो पार्षद चुनावों में अस्वीकृत होने वाले फॉर्म की संख्या और भी बढ़ जाती थी।
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(7) 2019 के लोकसभा चुनावों में मुझे फॉर्म भरने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। क्योंकि 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान मुझे फॉर्म भरने का अभ्यास हो गया था, और मेरे पास विधानसभा चुनाव में दाखिल किये गए फॉर्म की फोटो कॉपी मौजूद थी। लोकसभा में सिर्फ मैं ही प्रत्याशी था, अत: अन्य फॉर्म भरने का वजन भी नहीं था।
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तो मुझे लोकसभा फॉर्म को भरने में सिर्फ 2 घंटे लगे। मैंने सिर्फ एक सिटींग में ही आसानी से फॉर्म भर दिया और फॉर्म स्वीकृत हो गया। और इस वजह से लोकसभा चुनावों के दौरान मैं प्रचार पर ज्यादा संतोषप्रद काम कर पाया।
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(8) बहरहाल, इससे हमें यह सबक मिला कि प्रत्येक कार्यकर्ता को नामांकन फॉर्म भरने का अभ्यास करके यह कौशल अवश्य जुटाना चाहिए। इससे 2 तरह के लाभ होंगे :
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(8.1) यदि आप भविष्य में चुनाव लड़ने का फैसला करते है तो आपकी काफी ऊर्जा एवं समय जाया होने से बच जायेगी। और चुनाव लड़ने के दौरान फॉर्म भरने के दौरान जाया होने वाला समय काफी कीमती होता है।
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(8.2) यदि आप चुनाव नही लड़ने वाले तब भी आप उन कार्यकर्ताओ को फॉर्म भरने में सहयोग कर सकेंगे, जो चुनाव लड़ रहे है।
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