Pawan Jury BhilwaraRj
RSS द्वारा लागू किया गया विकल्पहीन राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून (सिर्फ़ निकालने की प्रक्रिया वाला) भारत में किस पैमाने का ग़दर मचा सकता है इसे आप लेटिन अमेरिकी देशों के कुछ उदाहरणों से समझिए :
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(1) पेरू में वर्ष 1997 से 2013 के बीच नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ 20,000 रिकॉल याचिकाएँ दायर की गयी !! जिसमें से 5,300 याचिकाओ पर रिकॉल इलेक्शन आयोजित हुए, और 745 जनप्रतिनिधियों को निष्कासित किया गया !!!
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(2) इक्वाडोर में 1998 से 2008 के बीच 785 दायर याचिकाओं में से 80 याचिकाओं पर रिकॉल इलेक्शन हुए !! और कमोबेश यही स्थिति कोलंबिया, बोलीविया, वेनेजुएला आदि देशों की है !!!
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किसी भी देश की बेंड बजाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि वहाँ पर विकल्पहीन राईट टू रिकॉल लागू कर दो।
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और पेड मीडिया के प्रायोजक (रॉकफ़ेलर, रॉथस्चाइल्ड) एक एक करके उन सभी देशों में विकल्पहीन प्रक्रिया वाला राईट टू रिकॉल लागू करवा रहे है जहाँ उनका नियंत्रण है। ताकि सोसायटी में विभाजन-वैमनस्य बढ़े, स्थानीय स्तर पर झगड़ों में इजाफ़ा हो और शासन में अस्थिरता आए।
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JSM के कार्यकर्ताओ से अपील है कि वे RSS द्वारा हरियाणा में लागू किए गए विकल्पहीन राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून का सार्वजनिक रूप से विरोध करें। क्योंकि RSS इस क़ानून को भारत के शेष राज्यों में भी लागू करने की दिशा में काम कर रहा है।
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