Pawan Jury BhilwaraRj
मुख्यमंत्री एवं राज्य स्तर के मंत्रियो पर वोट वापसी लागू करने का प्रस्ताव (Repost)
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(Vote Vapsi over Cm and ministers)
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इस कानून का सार : यह कानून मुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री के अधीन मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के लिए लिखा गया है। इस कानून को विधानसभा से पास करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को निम्नलिखित आदेश भेजें-
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“मुख्यमंत्रीजी, कृपया मुख्यमंत्री एवं मंत्रियो को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाने के आदेश जारी करें – #VvpCM #VoteVapsiCm
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===क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ===
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टिप्पणियाँ इस क़ानून का हिस्सा नहीं है। नागरिक एवं अधिकारी टिप्पणियों का इस्तेमाल दिशा निर्देशों के लिए कर सकते है।
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(01) यह कानून राज्य के गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री पर लागू नहीं होगा।
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(02) इस कानून में मंत्री शब्द से आशय है, राज्य के गृह एवं वित्त मंत्री के अतिरिक्त राज्य सरकार एवं मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले सभी मंत्रालयों के मंत्री।
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(03) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर राज्य के प्रत्येक मतदाता को एक वोट वापसी पासबुक मिलेगी। निम्नलिखित जनप्रतिनिधि इस वोट वापसी पासबुक के दायरे में आयेंगे :
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3.1. मुख्यमंत्री
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3.2. धारा (1) में बताये गए 2 मंत्रियो को छोड़ते हुए राज्य सरकार के अधीन सभी मंत्रालयों के मंत्री।
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तब यदि आप मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के काम-काज से संतुष्ट नहीं है, और उसे निकालकर किसी अन्य व्यक्ति को लाना चाहते है तो पटवारी कार्यालय में जाकर स्वीकृति के रूप में अपनी हाँ दर्ज करवा सकते है। आप अपनी हाँ SMS, ATM या मोबाईल APP से भी दर्ज करवा सकेंगे। आप किसी भी दिन अपनी स्वीकृति दे सकते है, या अपनी स्वीकृति रद्द कर सकते है। आपकी स्वीकृति की एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी। यह स्वीकृति आपका वोट नही है। बल्कि यह एक सुझाव है।
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(04) मुख्यमंत्री एवं मंत्री बनने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा आवेदन करना :
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30 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक यदि मुख्यमंत्री या मंत्री बनना चाहता है तो वह कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर विधायक के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर अर्हित पद के लिए उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, और एफिडेविट को स्कैन करके मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(05) मतदाताओ द्वारा स्वीकृति दर्ज करना :
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(5.1) कोई भी नागरिक किसी भी दिन अपनी वोट वापसी पासबुक या मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में जाकर किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर / रजिस्टर एवं वोट वापसी पासबुक में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
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(5.2) स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
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(5.3) यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
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(5.4) प्रत्येक सोमवार को महीने की 5 तारीख को, कलेक्टर पिछले महीने के अंतिम दिन तक प्राप्त प्रत्येक प्रत्याशियों को मिली स्वीकृतियों की गिनती प्रकाशित करेगा। पटवारी अपने क्षेत्र की स्वीकृतियो का यह प्रदर्शन प्रत्येक सोमवार को करेगा।
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[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी स्वीकृति SMS, ATM एवं मोबाईल एप द्वारा दर्ज करवा सके।
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रेंज वोटिंग - मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।]
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(06) मुख्यमंत्री की नियुक्ति एवं निष्कासन :
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पदासीन मुख्यमंत्री निचे दी गयी दोनों परिस्थितियों में से अपनी पसंद के अनुसार उच्च संख्या को चुन सकते है –
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(6.1) नागरिको द्वारा दी गयी स्वीकृतियों की संख्या, अथवा
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(6.2) मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधानसभा विधायको को चुनाव में प्राप्त हुए मतों का कुल योग।
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(6.3.) यदि किसी प्रत्याशी की स्वीकृतियों की संख्या पदासीन मुख्यमंत्री की स्वीकृतियों या मुख्यमंत्री का समर्थन करने वाले विधायको को प्राप्त मतों की कुल संख्या से 10 लाख अधिक हो जाती है तो पदासीन मुख्यमंत्री अपना पद त्याग सकते हैं या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है, और विधायको से सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने के लिए कह सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। अथवा विधायक सबसे अधिक स्वीकृतियां प्राप्त करने वाले व्यक्ति को नया मुख्यमंत्री चुन सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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[ स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, 3 करोड़ आबादी एवं 200 विधानसभा सीटो के राज्य में X मौजूदा सीएम है, और उसे विधानसभा में 120 विधायको का समर्थन प्राप्त है। मान लीजिये कि, इन 120 विधायको को चुनाव में कुल 1 करोड़ मत प्राप्त हुए थे, और X को नागरिको से सीधे प्राप्त होने वाली स्वीकृतियो की संख्या 80 लाख है।
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(i) मान लीजिये, Y सीएम का एक प्रत्याशी है और उसे 90 लाख नागरिक स्वीकृतियां दे देते है तो भी X सीएम बना रहेगा, क्योंकि X को जिन विधायको का समर्थन प्राप्त है, उनके मतों का योग 1 करोड़ है। किन्तु यदि Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है तो X अपना इस्तीफा दे सकता है, या नहीं भी दे सकता है।
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(ii) अब मान लीजिये, Y को 1.10 करोड़ स्वीकृतियां मिल जाती है, किन्तु यदि X सीएम के रूप में संतोषप्रद काम कर रहा है, अत: X की स्वीकृतियां बढ़कर यदि 1.15 करोड़ हो जाती है, तो भी X सीएम बना रहेगा। ]
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(07) यदि किसी मंत्रालय के मंत्री पद के किसी प्रत्याशी को राज्य की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ की 30% से अधिक स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां अमुक मंत्रालय के पदासीन मंत्री से 2% अधिक भी है, तो मुख्यमंत्री मौजूदा मंत्री को निकाल कर सबसे अधिक स्वीकृति पाने वाले व्यक्ति को अमुक मंत्रालय में मंत्री नियुक्त कर सकते है, या नहीं भी कर सकते है। मंत्री की नियुक्ति के बारे में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री का ही होगा।
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(08) जनता की आवाज :
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(8.1) यदि कोई मतदाता इस कानून में कोई परिवर्तन चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में एक एफिडेविट जमा करवा सकेगा। जिला कलेक्टर 20 रूपए प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर एफिडेविट को मतदाता के वोटर आई.डी नंबर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके रखेगा।
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(8.2) यदि कोई मतदाता धारा 8.1 के तहत प्रस्तुत किसी एफिडेविट पर अपना समर्थन दर्ज कराना चाहे तो वह पटवारी कार्यालय में 3 रूपए का शुल्क देकर अपनी हां / ना दर्ज करवा सकता है। पटवारी इसे दर्ज करेगा और हाँ / ना को मतदाता के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ मुख्यमंत्री की वेबसाईट पर सार्वजनिक करेगा।
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===ड्राफ्ट का समापन==