Pawan Jury BhilwaraRj
समाज में गंदगी परोसने वाली पठान, पीके, पद्मावती और ऐसी ही फिल्मों को रोकने के लिए एक मात्र स्थाई इलाज है —
.
सेंसर बोर्ड चेयरमैन को वोट वापसी पासबुक के दायरे में लाना।
.
यदि सेंसर बोर्ड चेयरमैन वोट वापसी के दायरे में होता तो वह इस फ़िल्म को कोई न कोई हवाला देकर लटका कर रख देता। साल दो साल या पाँच साल तक भी !! और फ़िल्म डिब्बा बन जाती।
.
और यदि सेंसर बोर्ड चेयरमेन इसे पास कर भी देता तो अब तक नागरिक पासबुक का प्रयोग करके उसे निकालकर ऐसे व्यक्ति को नौकरी पर रख देते जो इस फ़िल्म को बेन करे। और नया चेयरमेन आते ही पहला काम इस फ़िल्म को बैन करने का करता ।
.
और यदि भारत में जूरी कोर्ट का क़ानून होता तो चेयरमेन पर अब 50 लोगो की नागरिक जूरी के सामने मुक़दमें की सुनवाई होती। और जूरी उसके सार्वजनिक नार्को टेस्ट का आदेश देती। और तब पूरे देश के सामने यह बात खुल जाती कि इस ग़लीज़ फ़िल्म को यहाँ तक पहुँचाने में सरकार में बैठे कौन कौन लोगो ने कितना पैसा खाया है !!!
.
अब सेंसर बोर्ड चेयरमैन का पद काफ़ी महत्त्वपूर्ण हो चुका है । क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक इसका इस्तेमाल समाज में अलगाव के बीज बोने, धर्म-जाति संघर्ष को बढ़ावा देने, अपसंस्कृति को फैलाने और भारत के मित्र देशों से संबंध ख़राब करने में कर रहे है ।
.
#JuryCourt
.