Pawan Jury BhilwaraRj
ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि जीएसटी की दरें और रिटर्न भरने की अवधि में किये गए ज्यादातर बदलाव अस्थायी यानी चुनावी है और दी गयी ये राहते 14 दिसंबर 2017 को शाम 6 बजे फिर से वापिस ले ली जायेगी। ज़ाहिर है ये सभी राहतें सिर्फ गुजरात चुनावों के मद्देनजर दी गयी है।
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कल्पना कीजिये कि यदि देश की सभी विधानसभाओ एवं लोकसभा के चुनाव एक ही दिन एक साथ हो। और फिर अगले 5 साल तक कोई चुनाव न हो !! क्या तब हमें जीएसटी में आये ये बदलाव देखने को मिलेंगे ?
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कुल मिलाकर सिर्फ चुनाव ही है जिनकी वजह से कांग्रेस / बीजेपी / आपा / सीपीएम के नेता भारत में ग़दर नहीं मचा पा रहे है !! स्वतंत्रता सेनानियों के कुछ नैतिक मूल्य थे। लेकिन आजादी के बाद के नेताओ पर यदि चुनावी अंकुश न होता तो ये लोग देश को अब तक पूरी तरह से हजम कर चुके होते। तब हमें वास्तविक जीवन में एक हॉरर फिल्म देखने को मिलती !!
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तो ऐसे कौन कौन सज्जन है जो मोदी साहेब के समकालिक चुनावो के प्रस्ताव का समर्थन करते है ? मतलब , देश की सभी विधानसभाओ एवं लोकसभा के चुनाव एक साथ करवा देना !! ( सिर्फ 5 सप्ताह में ) ? और अगले 5 साल तक कोई चुनाव नहीं ?
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समाधान ?
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मेरा प्रस्ताव है -- राईट टू रिकॉल पीएम , सांसद एवं राईट टू रिकॉल विधायक की प्रक्रियाएं लागू की जाये।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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