> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-11-11

Pawan Jury BhilwaraRj

अपराधी सिर्फ कुछ ही लोगो का क़त्ल कर सकते है। लेकिन मनोविकृति के शिकार नेता जान बूझकर ऐसे "बुरे" कानून लागू करते है जिससे हजारो अपराधी लाखों नागरिको की जान ले सके और करोड़ो नागरिको का उत्पीड़न कर सके !!
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एक अच्छा उदाहरण जुवेनाइल एक्ट है। यह क़ानून संघ के नेता वाजपेयी और जेटली ने 2002 में लागू किया था। तब कांग्रेस / संघ / सीपीएम / आपा* के सभी नेताओ ने भी इसका समर्थन किया था। और आज भी सोनिया-मोदी-केजरीवाल इस क़ानून के घोर समर्थक है। *( तब आम आदमी पार्टी के नेता सीपीएम में थे )
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वाजपेयी द्वारा छापा गया और मोदी साहेब द्वारा समर्थित यह क़ानून कहता है कि , "यदि आप 18 वर्ष या इससे कम आयु के है तो -- जितने चाहे उतने लोगो को मार दो और मर्जी हो जितने लोगो का अपहरण या बलात्कार कर लो, लेकिन आपको ३ वर्ष से अधिक अवधि का कारावास नहीं दिया जायेगा !!"
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और ऐसा क़ानून रेयान स्कूल के आपराधिक मिजाज वाले युवा छात्र को योजना बनाकर ठन्डे दिमाग से हत्या करने के लिए प्रोत्साहित कर देता है !!
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हत्यारा वकील का पुत्र है और उसे क़ानून की समझ है !! उसे यह जानकारी है कि अपराध करने पर भी उसे अधिकतम 3 साल तक की ही सजा मिलेगी। इससे ज्यादा नहीं। और इसी सूचना ने उसे हत्या करने के लिए उकसाया।
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यदि लड़के को यह पता होता कि उसे पूरी जिन्दगी के लिए जेल में डाला जा सकता है तो वह हत्या नहीं करता।
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महिलाओं के खिलाफ अपराधो का उदाहरण लीजिये -- इस श्रेणी के अपराधियों में आधे से ज्यादा अपराधियों की आयु 14 से 18 वर्ष के बीच होती है !! वे यह अपराध करते है क्योंकि उन्हें पता है कि अधिकतम सजा 3 वर्ष है !! दिसम्बर में हुए निर्भया बलात्कार पर विचार कीजिये। मुख्य आरोपी की आयु 18 वर्ष से कम थी, ( स्कूली प्रमाण पत्र के अनुसार ) और उसे यह जानकारी थी कि उसे अधिकतम सजा 3 वर्ष तक की ही दी जा सकती है !! जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो उसके पास आयु प्रमाण पत्र था , और उसने तुरंत पुलिस को प्रमाण पत्र दिखाकर कहा कि उसे न तो रिमांड पर लिया जा सकता है और न ही जेल में भेजा जा सकता है। लिहाजा पुलिस को उसे बाल-गृह भेजना पड़ा !!
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वाजपेयी / जेटली को शामिल करते हुए नेतृत्व गुणों से लबरेज सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे नेता इसी प्रकार के मनो विकार से ग्रस्त है, और अपने कैरियर को चमकाने के लिए किसी भी हद तक गिर कर दिखा सकते है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके द्वारा लागू कानूनों से समाज के कितने निर्दोषों को इसका तावान चुकाना पड़ेगा।
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समाधान ?
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राईट टू रिकॉल कानूनों के अलावा इन्हें किसी भी तरह से सुधारा नहीं जा सकता। समाधान यह है कि इन सभी पदों पर राईट टू रिकॉल एवं देश में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू की जाए, ताकि कोंग्रेस / संघ / सीपीएम / आपा के भ्रष्ट नेताओं द्वारा लागू किये गए कानूनों को जनता बहुमत से खारिज कर सके।
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तो यदि आप देश के व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल पर अपना समय नष्ट न करे, बल्कि राईट टू रिकॉल एवं टीसीपी जैसे कानूनों की मांग करें।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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