> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2017-11-14

Pawan Jury BhilwaraRj

MRCM ; खनिज रॉयल्टी सीधे नागरिकों व सेना के खाते में जमा करने के लिए कानूनी ड्राफ्ट
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यह क़ानून केंद्र सरकार के अधीन आने वाली समस्त खदानों एवं सरकार के नियंत्रण में भूमि , स्पेक्ट्रम आदि को देश के नागरिको की सम्पत्ति घोषित करता है। इन मदों से आने प्राप्त राशि के दो हिस्से किये जायेंगे। 34% हिस्सा सेना को मिलेगा तथा शेष 66% हिस्सा देश के सभी ( सभी नागरिको को न की सिर्फ कुछ को ) नागरिको में बराबर बराबर बांटा जाएगा। नागरिको को यह राशि प्रतिमाह सीधे उनके खाते में प्राप्त होगी।
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इस ड्राफ्ट की पीडीऍफ़ फाइल, sha1 हैश एवं मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक कमेंट बॉक्स में देखें। यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो कृपया अपने पीएम को ट्विट करके कहें कि इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए।
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प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले ट्वीट का प्रारूप :
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@PmoIndia #Ddmrcam , #Mrcam 77d18a7660e4d5e1104be104629d821927b9cdd4 <https://newindia.in/causes/ddmrcm/>; put mineral royalty,GoI land rent in citizens' accounts.
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==== MRCM कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ ====

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[ टिप्पणी : यह कानूनी ड्राफ्ट राजपत्र अधिसूचना के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा सीधे गेजेट में प्रकाशित किया जा सकता है। इसे लागू करने के लिए लोकसभा या राज्यसभा की अनुमति आवश्यक नहीं है।
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इस ड्राफ्ट के 3 भाग हैं -
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भाग -1 : नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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भाग -2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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भाग -3 : नागरिकों और अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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महत्वपूर्ण खंड हैं-- (1.1) , (1.2) , (1.3) , (3.1) , (3.2) , (J.1) , (J.3.6), (RTR.2) , (RTR.4) , (CV.1) ]
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भाग -1: नागरिकों के लिए सामान्य निर्देश
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(1) नागरिकों के लिए कुछ सामान्य निर्देश इस प्रकार है -
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(1.1) इस कानून को प्रधानमंत्री द्वारा राजपत्र में छापने के दो महीनो के अन्दर भारत सरकार के पास ( खनिज आमदनी + स्पेक्ट्रम आमदनी + भारत सरकार द्वारा अधिग्रहत जमीनों का किराया ) के रूप में प्राप्त होने वाली राशि को भारत के समस्त नागरिकों की संख्या से विभाजित करने पर आपके हिस्से में आया पैसा ( आप अर्थात भारत के मतदाता ) सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगा।
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(1.2) और अधिक स्पष्ट रूप से, भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज आमदनी, स्पेक्ट्रम आमदनी और केंद्र सरकार द्वारा अधिग्रहत जमीनों के किराये का लगभग 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा। और हर महीने इस धनराशि को आपके बैंक खाते में सीधा जमा कर दिया जायेगा। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा।
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(1.3) प्रत्येक नागरिक को मिलने वाला पैसा लगभग बराबर होगा, लेकिन इसमें अंतर हो सकता है, जो कि नागरिक की आयु, पुत्र और पुत्रियों की संख्या, शारीरिक या मानसिक विकलांगता आदि तत्वों पर निर्भर करेगा। यह कानून लागू होने के बाद नागरिक जितनी अधिक संताने पैदा करता है उसे मिलने वाला पैसा उतना ही कम होता जायेगा। और कुछ मामलों में किसी एक राज्य में निवास कर रहे नागरिकों को अमुक राज्य के खनिज और जमीन से प्राप्त राशि में से अधिक पैसा मिल सकता है, लेकिन ये सभी नागरिकों को मिल रहे पैसे के दो-गुना से अधिक नहीं हो सकता। और ऐसे क्षेत्रों में जिनकी सीमा शत्रु देशों से लगी हो या सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों को भी बंटने वाली राशि में अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। लेकिन उपरोक्त अपवादों को छोड़कर अन्य सभी नागरिकों को केंद्र सरकार के पास आ रहे पैसे में से बराबर हिस्सा मिलेगा।
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(1.4) प्रधानमंत्री "राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी" ( NLRO = National Land Rent Officer ) पदनाम से एक अधिकारी नियुक्त करेंगे जो नीलामियों की प्रक्रिया स्थापित करेगा और आमदनी और किराया तय करने और उसे इकठ्ठा करने और इसका 65% हिस्सा भारत के सभी नागरिको के खातों में बराबर रूप से जमा करने की अन्य प्रक्रियायें भी स्थापित करेगा। यदि आप भूमि किराया अधिकारी को किसी अन्य व्यक्ति से प्रतिस्थापित करना चाहते है, तो ये कानून आपको भूमि किराया अधिकारी पद के लिए पटवारी कार्यालय जाकर या एस.एम.एस के माध्यम से अधिकतम 5 प्रत्याशियों को अनुमोदित करने की अनुमति देगा। और आप किसी भी दिन अपना अनुमोदन निरस्त कर सकते है। बाद में कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि आप प्रत्येक प्रत्याशी के लिए 0 से 100 के बीच के अंक दे पाए। जब किसी प्रत्याशी के पास पदासीन भूमि किराया अधिकारी से अधिक अनुमोदन होंगे, केवल तब ही भूमि किराया अधिकारी को बदला जाएगा। इस तरह आपके पास राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी को बदलने की प्रक्रिया होगी।
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(1.5) भूमि किराया अधिकारी के पास आमदनी और किराया तय करने, इकठ्ठा करने और आप सभी नागरिकों के बैंक खतों में जमा करने हेतु आवश्यक कर्मचारी होंगे। यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत आती है तो अमुक जिले या राज्य या पूरे भारत से क्रमरहित तरीके से चुने हुए 25 से 1500 मतदाताओं की जूरी का चयन किया जायेगा। यह जूरी तय करेगी कि कर्मचारी निर्दोष है या नहीं और यदि वह दोषी है तो उस पर कितना जुर्माना लगेगा और क्या उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए या नहीं। यदि आपका नाम क्रमरहित तरीके से चुने हुए इन 25 से 1500 मतदाताओं की सूची में आता है तो आपको ( नागरिक को ) इस जूरी सुनवाई में जाना पड़ेगा।
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(1.6) यह कानून पानी या पानी के वितरण से मिलने वाली राशि पर लागू नहीं होगा।
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(1.7) यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने रु. 500 या रु.1000 या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो सभी नागरिकों की प्रति महीने आय भी घटेगी।
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(1.8) यह कानून सिर्फ केंद्र सरकार के अधीन आने वाली खनिज खदानों और स्पेक्ट्रम और केंद्र सरकार के अन्दर आने वाली जमीनों पर लागू होगा। अमुक कानून राज्य, नगरपालिकाओं और जिले / तहसील / ग्राम पंचायतों के अधिकार में आने वाली खदानों और जमीनों को शामिल नहीं करेगा। मुख्यमंत्री, महापौर और सरपंच राज्य / नगर / जिले / तहसील / गाँव अपने स्वामित्व की खनिज आमदनी / जमीनों के किराए से प्राप्त आय को अमुक राज्य / नगर / जिले / तहसील / गाँव के नागरिकों में बांटने का ऐसा ही कानून लागू कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है।
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भाग -2 : कानूनी ड्राफ्ट का सारांश
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(2) टिप्पणी :
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(2.1) यह सारांश बाध्यकारी नहीं है। यह मात्र एक घोषणा है जो इस क़ानून के ढांचे को समझने की एक समीप दृष्टी देती है।
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(2.2) इस कानून द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी नाम से एक अधिकारी नियुक्त कर पाएंगे। भारत के मतदाता "राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी" सेक्शन में दी गयी धाराओं का प्रयोग करके इस अधिकारी को बदल सकते है।
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(2.3) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी सम्पूर्ण भारत में सभी खनिज खदानों की नीलामी करवाएगा और बैंड विड्थ बांटने की नीलामी भी आयोजित करेगा। वह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली जमीनों के किराये के लिए भी नीलामी करवाएगा। वह इन जमीनों की रूप रेखा तैयार करेगा और इन सभी जमीनों पर लीज की लम्बाई तय करेगा।
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(2.4) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति या कंपनी जिसके पास खदाने या स्पेक्ट्रम या सरकारी जमीने लीज पर है, से आमदनी और किराया प्रति माह इकठ्ठा करेगा। किराया अधिकारी के पास जल संसाधनों पर कोई अधिकार नहीं होंगे।
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(2.5) किराया अधिकारी इकट्ठी की गयी राशि को भारत के सभी व्यस्क नागरिकों के बैंक खातों में प्रति महीने जमा करवाएगा। सभी नागरिकों को लगभग बराबर राशि मिलेगी लेकिन ये राशि व्यक्ति की आयु, उसके पुत्र या पुत्रियों की संख्या, विकलांगता आदि के आधार पर कम ज्यादा हो सकती है। वितरण अनुपात की जानकारी आगे की धाराओं में दी गयी है।
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(2.6) यदि किराया अधिकारी के किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई शिकायत आती है तो क्रमरहित तरीके से चुने हुए 25 से 1500 मतदाताओं की जूरी ये तय करेगी कि क्या उस पर जुर्माना लगना चाहिए या उसे नौकरी से निकाल देना चाहिए या उसे कोई भी सजा नहीं देनी चाहिए।
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भाग -3 : नागरिकों और अधिकारीयों के लिए निर्देश और टिप्पणियाँ
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(3) भारत सरकार के अधिकार में आने वाले भू-खंडो का स्वामित्व
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(3.1) भारत के नागरिक आई.आई.एम. अहमदाबाद के भू-खंड , सभी आई. आई. एम. के भू-खंड और जेएनयू के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली संपत्ति घोषित करते है। अमुक भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष / निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है, बल्कि ये भू-खंड भारत के नागरिकों की संपत्ति है। आगे, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टों के पास नहीं है, के सभी भू-खंडो को भारत के नागरिकों की संपत्ति घोषित किया जाता है। भारत के सभी अधिकारीयों, न्यायाधीशों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों से निवेदन किया जाता है कि भारत के नागरिकों के इस निर्णय के विरुद्ध किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें।
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(3.2) निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे :

(1) विज्ञान, चिकित्सा, गणित और इंजीनियरिंग शिक्षण का कार्य कर रहे संस्थानों को छोड़कर सभी आई.आई.एम, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय।
(2) एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन
(3) पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय
(4) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
(5) उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय
(6) मानव संसाधन विकास मंत्रालय
(7) सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
(8) ग्रामीण विकास मंत्रालय
(9) लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय
(10) सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
(11) कपड़ा उद्योग मंत्रालय
(12) शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय
(13) युवा मामलें और खेल मंत्रालय
(14) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
(15) नीति आयोग
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(3.2.1) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी का निजी व्यक्तियों या कंपनियों या ट्रस्टों या राज्य सरकार या नगरों या जिलों के स्वामित्व वाले भू-खण्डों पर किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं होगा। उसके पास सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12वी तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग किये जा रहे भू-खंडो पर भी किसी प्रकार का अधिकार नहीं होगा।
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(3.3) सभी चिकित्सा महाविद्यालयों, आईआईटी, एनआईटी, इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, आईआईएससी, विज्ञान और गणित महाविद्यालयों को स्वास्थ्य मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय या विज्ञान मंत्रालय जैसा प्रधानमंत्री तय करे, का अंग बनाया जायेगा। संबंधित मंत्री इन महाविद्यालयों में दिन-प्रतिदिन के संचालन हेतु अध्यक्ष नियुक्त करेंगे। सभी महाविद्यालय जिनमें चिकित्सा, विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग का शिक्षण कार्य हो रहा हैं, वे भूखंड किराया अधिकारी के क्षेत्राधिकार में नहीं आएंगे।
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(4) भारत सरकार के स्वामित्व वाले भू-खण्डों से किराया इकठ्ठा करना
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(4.1) अनुपयोगी भूमि के लिए -- किराया अधिकारी अपनी समझ से अमुक भूमि को उचित माप के भू-खंडो में विभाजित करेगा। किराया अधिकारी हर भू-खंड के लिए नीलामी करवाएगा। नीलामी के लिए निम्नलिखित शर्तें होगी

(1) लीज 5, 10, 15, 20 या 25 वर्षो की होगी। किराया अधिकारी इसमें से कोई अवधि तय करेगा। किन्तु लीज 25 वर्षों से अधिक नहीं हो सकती।
(2) बोली लगाने वाले मासिक किराये और लीज की अवधि के लिए बोलियां लगाएंगे जो कि अधिकतम लीज अवधि से कम हो सकती है। बोली का प्रारूप मासिक किराये, लीज महीने के अनुसार होगा। एक व्यक्ति एक से ज्यादा निविदा / बोली लगा सकता है। न्यूनतम लीज अवधि 12 महीने होनी चाहिए।
(3) निविदा का भार मासिक_ किराया / लॉग ( मासिक_लीज ) के अनुसार होगा। अर्थात जितना अधिक किराया उतना अधिक भार और जितनी लम्बी लीज, उतना कम भार।
(4) निविदा सार्वजनिक रहेगी और सभी निविदाएँ सभी को दिखेगी।
(5) किराया अधिकारी निविदाओ के भार के अनुसार भू-खंड देगा। [ मासिक_ किराया / लॉग ( मासिक_लीज ) ]
(6) किराया अधिकारी जमा राशि के रूप में 6 महीने का किराया या इसके समान राशि लेगा।
(7) अमुक किरायेदार किसी भी दिन भूमि खाली करने के लिए और अदा किये जा रहे किराये को बंद करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

(4.2) लीज अवधि के दौरान अमुक भू-खंड के आस पास के 1 वर्ग किमी क्षेत्र में जमीन के दाम में प्रतिशत बदलाव और जिस दिन से अमुक भू-खंड लीज पर दिया गया है, से लेकर उस दिन तक जब किराये में संशोधन हुआ है, की प्रधान ऋण ब्याज दर में प्रतिशत बदलाव के आधार पर किराया अधिकारी हर 3 वर्ष में किराये का संशोधन करेगा।
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(4.3) लीज अवधि समाप्त होने के बाद किराया अधिकारी एक नयी नीलामी करवाएगा, जिसमे कार्यरत लीज धारक को निम्नलिखित अतिरिक्त लाभ मिलेंगे।

(1) उसका निविदा भार 1.1 से 1.5 से गुणा हो जायेगा जो इस पर निर्भर करेगा कि उसने कितने वर्षों तक किराया चुकाया है।
(2) नीलामी समाप्त होने के बाद वह 3 महीने के अन्दर अपनी बोली बढ़ा सकता है।
(3) कार्यरत लीज धारक को 20% से 50% तक का नए लीज धारक द्वारा चुकाया जा रहा 6 महीने का अग्रिम किराया मिलेगा जो निर्भर करेगा कि कितने महीनों के लिए उस कार्यरत लीज धारक ने जमीन ले रखी थी।
(4) लेकिन यदि कार्यरत लीज धारक नीलामी से चूक जाता है, तब वह उस भूमि पर निर्मित संपत्ति को हटा सकता है या बेच सकता है। लेकिन उसे ये भूमि खाली करनी होगी।
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(4.4) यदि अमुक भू-खंड किसी कार्यरत व्यक्ति या कंपनी ने ले रखा है तो उस व्यक्ति या कंपनी को 25% अधिक (25% * लीज महीनो में /300) के साथ अधिकतम 50% तक का बोनस निविदा में प्राप्त होगा, अर्थात उसकी निविदा 1.25 से 1.50 तक गुणीत हो जायेगी, लेकिन इससे अधिक नहीं।
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(4.5) यदि अमुक भू-खंड वर्तमान में उपयोग में लिया जा रहा है, तब किराया अधिकारी भू-खंड के आस पास के 1 किमी के क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों की जमीन बिक्री के मूल्य का मध्यांतर निकालेगा और भूखंड की कीमत तय करेगा और अगले 10 वर्षों के लिए (बाजार मूल्य * प्रधान ब्याज दर / 3) के रूप में वार्षिक किराये को निर्धारित करेगा। किराया हर 3 वर्ष में संशोधित होगा। 10 वर्षों के बाद इस सेक्शन के खंड -1 और इसके आगे से बताये गए नियम लागू होंगे।
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(4.6) किराया अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 34% रक्षा मंत्री को सेना मजबूत करने और हथियार उपलब्ध करने और सभी नागरिकों को हथियार चलाने की शिक्षा देने के लिए देगा।
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(4.7) किराया अधिकारी किराया और आमदनी को निम्न प्रकार से बांटेगा
(1) किराया अधिकारी इकट्ठे हुए किराये का 33% हर महीने उन नागरिकों को भेजेगा जो पिछले 10 वर्षों से अमुक राज्य में निवास कर रहे हैं, पर इस किराये की सीमा पिछले वर्ष में भारत के नागरिकों द्वारा प्राप्त राशि के दोगुने से अधिक नहीं होगी।
(2) किराया अधिकारी शेष किराया हर महीने भारत के नागरिको को भेजेगा।
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(4.8) इस कानून के पारित होने के 1 वर्ष के बाद, किसी नागरिक को प्राप्त होने वाला किराया इस प्रकार से बदलेगा :

(1) यदि उसके पास (0 पुत्र), (0 पुत्र, 1 पुत्री), (0 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 33% अधिक मिलेगा और उसके 60 वर्ष का होने के बाद उसे किराया 66% अधिक मिलेगा।
(2) यदि उसके पास (1 पुत्र, 0 पुत्री), (1 पुत्र, 1 पुत्री), (1 पुत्र, 2 पुत्री) है, तब किराया 15% अधिक मिलेगा और उसके 60 वर्ष का होने के बाद उसे किराया 33% अधिक मिलेगा।
(3) यदि उसके पास (2 पुत्र, 0 पुत्री), (2 पुत्र, 1 पुत्री) है, तब किराया में कोई बदलाव नहीं होगा - ना बढेगा और ना घटेगा।
(4) यदि उसके पास (2 पुत्र, 2 पुत्री) या (3 पुत्र, 1 पुत्री) है, तब किराया 33% कम मिलेगा।
(5) यदि उसके पास ऊपर दिए गए सभी मामलों से अधिक संताने हैं, तब उसे किराया 66% कम मिलेगा।
(6) यहाँ, जुड़वाँ संतान एक संतान के रूप में गिनी जाएगीं और गोद ली गयी संताने नहीं गिने जाएगी।
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(4.9) 60 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 55 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 33% अधिक होगा और 75 वर्ष से ऊपर के पुरुषों और 70 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को मिलने वाला किराया 66% अधिक होगा।
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(4.10) 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे को कोई भी किराया नहीं मिलेगा ; 7 वर्ष से 14 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का एक-तिहाई (33%) होगा और 14 वर्ष से 18 वर्ष के बीच के बच्चों को मिलने वाला किराया सामान्य किराये का दो-तिहाई (66%) होगा। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे को मिलने वाला किराया उसकी माता को दिया जायेगा, जब तक कि जूरी किराया अधिकारी को उस बच्चे के पिता या किसी अन्य संबंधी को देने का आदेश नहीं करती या यदि माता जीवित नहीं है।
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(4.11) आगे, यदि जूरी पाती है कि पति एक या उससे अधिक संतान की देखभाल अच्छे से नहीं कर रहा है, तब जूरी किराया अधिकारी को निर्देश कर सकती है कि पिता को मिलने वाले किराये का आधा भाग माता को दिया जाये। ऐसी स्थिति में किराया अधिकारी किराये का आधा भाग पिता को देगा और आधा भाग माता को |
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(5) खनिज रॉयल्टी इकठ्ठा करना
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(5.1) सभी विभागीय सचिव जो खदानों या कच्चे तेल के कुओं या खदानों या कच्चे तेल के कुओं से इकट्ठी होने वाली आमदनी के प्रभारी है, उन्हें इस आमदनी को किराया अधिकारी को भेजने का आदेश दिया जाता है।
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(5.2) किराया अधिकारी प्राप्त खनिज रोयल्टी एवं भूमि किराया सेना में, राज्यों में और भारत में निवास कर रहे नागरिकों में उसी समान अनुपात में बाँटेगा जैसा कि भूमि किराया वितरण से संबंधित खण्डों में वर्णित किया है।
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(J) राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के कर्मचारियों और निर्णयों पर जूरी सुनवाई
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(J.1) जब भी कभी किराया अधिकारी या उसके अधिकारियों और लीज धारक या नागरिकों के बीच विवाद होता है, तब किराया अधिकारी या उसके अधिकारी उस मामले के निर्णय के लिए रेंडमली चुने 30-55 वर्ष की आयु के मध्य के 12 से 1500 नागरिकों की जूरी बुलाएगा। जूरी गठन के नियम इस सेक्शन में दिए गए है।
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(J.2) किराया अधिकारी प्रत्येक जिले के लिए एक जिला जूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य जूरी प्रशासक और भारत के लिए एक राष्ट्रीय जूरी प्रशासक नियुक्त करेगा।
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(J.3) आमदनी या किराया या जमा राशि का विवाद सुलझाना
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(J.3.1) किसी लीज धारक या नागरिक या किराया अधिकारी के अधिकारीयों के मध्य का विवाद उस जिले में दर्ज होगा जहाँ प्रॉपर्टी स्थित है या नागरिक रहता है। यदि वांछित नागरिक या लीज धारक या अधिकारी स्थान का बदलाव उसी राज्य में स्थित किसी अन्य जिले में चाहते है तो वे राज्य जूरी प्रशासक या राज्य के हाई कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं। और यदि दोनों में से कोई भी स्थान का बदलाव उस राज्य के बाहर किसी अन्य जिले में चाहता है तब वे राष्ट्रीय जूरी प्रशासक या सुप्रीम कोर्ट से आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
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(J.3.2) जिले में हर विवाद के लिए जिला जूरी प्रशासक रैंडमली ( क्रमरहित ) 3 से 10 गणित, विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातकों का चयन, मामले में सहायता देने के लिए तैयार स्नातकों की सूची से करेगा। चयनित इंजीनियरों की आयु 30 वर्ष से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उनके पास 5 वर्षों का कार्य अनुभव होना चाहिए।
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(J.3.3) जिला जूरी प्रशासक भारत की मतदाता सूची से रैंडमली (क्रमरहित) 30 वर्ष और 55 वर्ष के मध्य के मतदाता चुनेगा। चुना गया व्यक्ति पिछले 10 वर्षों में किसी भी जूरी में प्रस्तुत नहीं होना चाहिए और पूर्व में किसी भी अपराध में दोषी नहीं होना चाहिए।
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(J.3.4) जूरी सदस्यों की संख्या :

(1) जूरी सदस्यों की संख्या न्यूनतम 12 और अधिकतम 1500 होगी। जूरी सदस्यों की संख्या 12, 50, 200 या 500 तक हो सकेगी, तथा यह संख्या इस पर निर्भर करेगी कि क्या आरोपी कर्मचारी वर्ग-4, वर्ग-3, वर्ग-2 या वर्ग-1 का है।
(2) यदि विवाद की राशि रु. 10 लाख से कम है तो जूरी का आकार 12 होगा, और प्रति रु.10 लाख के लिए एक जूरी सदस्य बढ़ा दिया जायेगा।
(3) यदि शिकायत में राशि के साथ किसी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत भी शामिल है तो जूरी आकार का निर्धारण ऊपर बताये गए बिंदु (1) या (2) में से जो भी अधिक है, उसके अनुसार होगा।
(4) जूरी का अधिकतम आकार 1500 होगा।
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(J.3.5) जूरी सदस्यों का स्थान : जूरी सदस्य उन जिलों से चयनित होंगे जहाँ की जिला अदालतें वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग द्वारा सुनवाई करने वाली जिला अदालत से जुड़ी हो। यदि वांछित जिला वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा किसी अन्य जिले से नहीं जुड़ा है, तो सभी जूरी सदस्य उस जिले से होंगे जहाँ मामला दर्ज किया गया है।
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(J.3.6) जूरी सदस्य दोनों पक्षों को 1-1 घंटे के लिए सुनेंगे। 65% से अधिक जूरी सदस्यों के ये कहने के बाद कि वे पर्याप्त सुन चुके, सुनवाई समाप्त हो जाएगी।
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(J.3.7) यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य कहते हैं कि अमुक कर्मचारी जिसके विरुद्ध शिकायत हुई है, को नौकरी से निकाल देना चाहिए तो किराया अधिकारी उसे निकाल सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि 75% से अधिक जूरी सदस्य जुर्माना लगाने पर सहमत होते हैं तो किराया अधिकारी आरोपी से बताया गया जुर्माना ले सकता है या उसे ऐसा करने की जरुरत नहीं है। यदि अमुक शिकायतकर्ता को लगता है कि किराया अधिकारी ने जूरी सदस्यों के निर्णय को सही से निष्पादित नहीं किया है तो वह भारत के मतदाताओं से आगे के खंडो में दी गयी “राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी” प्रक्रिया के प्रयोग द्वारा किराया अधिकारी को पद से हटाने के लिए मांग कर सकता है |
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(J.3.8) जिला अदालत के जूरी सदस्यों के निर्णय के विरुद्ध याचना राज्य हाई कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है और बाद में सुप्रीम कोर्ट के जूरी सदस्य या जजों के सामने की जा सकती है जैसा अन्य प्रचलित कानून तय करें।
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(RTR) राईट टू रिकॉल राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी
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(RTR.1) यदि भारत का कोई मतदाता राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी बनना चाहता है तो वह व्यक्तिगत रूप से अपने जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित हो सकता है। जिला कलेक्टर उससे सांसद के चुनाव में जमा होने वाली राशि के बराबर का आवेदन शुल्क लेकर राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी पद के लिए उसकी उम्मीदवारी स्वीकार करेगा और उसे एक विशिष्ट सीरियल नंबर जारी करेगा।
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(RTR.2) कोई भी मतदाता पटवारी कार्यालय में 3 रू शुल्क देकर अधिकतम 5 उम्मीदवारों को राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी पद के लिए अनुमोदित कर सकता है। पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में डालेगा और उस व्यक्ति का मतदाता पहचान पत्र संख्या, समय / दिनांक और उसके द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नामो को दर्ज करके एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक द्वारा अनुमोदित व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर नागरिक के मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ रखेगा।
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(RTR.3) यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन निरस्त करने आता है तो पटवारी उसके एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए निरस्त कर देगा।
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(RTR.4) यदि किसी उम्मीदवार को भारत के 43 करोड़ से अधिक मतदाताओं का अनुमोदन प्राप्त हो जाता है तो प्रधानमंत्री सबसे अधिक अनुमोदन पाने वाले व्यक्ति को नए राष्ट्रीय भूमि किराया अधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नहीं है। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
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(RTR.5) प्रधानमन्त्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जिससे नागरिक अपने अनुमोदन एस.एम.एस या एटीएम या मोबाइल फ़ोन एप्प के माध्यम से दर्ज / रद्द करवा सके।
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(CV) जनता की आवाज (Citizen’s Voice):
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(CV.1) यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस कानून की किसी धारा में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस कानून से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के छाया चित्र एवं अन्य विवरण के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(CV.2) किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसकी किसी धारा पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड (CV.1 ) के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा। हाँ / नही की गिनती प्रधानमंत्री या किसी अधिकारी या अन्य पर बाध्यकारी नहीं होगी।
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===MRCM कानूनी ड्राफ्ट का समापन ====