Pawan Jury BhilwaraRj
पद्मावती ; फिल्म का प्रचार करने के नाम पर चलाये जा रहे फर्जी समाधान Vs वास्तविक समाधान
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(1) फर्जी समाधान -- फेसबुक प्रोफाइल पर इसके विरोध में पोस्ट लिखें , फिल्म के खिलाफ नारेबाजी करें , इसके अभिनेताओं एवं निर्देशकों को गालियां दें, थियेटर मालिकों को धमकाए, उनके साथ मारपीट करें, तोड़फोड़ करें एवं इस फिल्म के खिलाफ ट्वीटर पर अभियान चलाएं। इन सब हरकतों से इस फिल्म का प्रचार होगा और जितना ही इसका विरोध होगा उतना ही अंतराष्ट्रीय बाजार में इसका मूल्य बढ़ता जाएगा। इस प्रकार के विरोध एवं प्रचार से इस फिल्म के सेटेलाइट अधिकारों के दाम भी उछल जाएंगे और निर्माता को मोटी कमाई होगी।
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सरकार से इसे बेन करने की मांग करना भी व्यर्थ है। अव्वल तो सरकार इसे बेन नहीं करेगी। और यदि कर भी देती है तो निर्माता शेष विश्व में इसे रिलीज करके मोटा मुनाफा कमा सकेगा। हिन्दू रानी का विद्रूप चित्रण करने के आरोप में बेन करने के एवज में सऊदी अरेबिया जैसे देश इसे टेक्स फ्री भी कर सकते है या दर्शको को इसे देखने के लिए उलटे पैसे भी दे सकते है। इसके अलावा मिशनरीज तो है ही।
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तो आप देखेंगे कि पेड मीडिया इस फिल्म के विरोध को पर्याप्त हवा दे रहा है, विरोध की खबरें दिखाई जा रही है तथा विभिन्न संगठन खुद का एवं फिल्म का प्रचार करने के लिए इस फिल्म का जमकर विरोध कर रहे है। कई कार्यकर्ता भी इन सबकी मिली जुली रणनीति के शिकार होकर जाने अनजाने इस फिल्म का प्रचार करने में लगे है।
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1.a) इससे पहले पीके, ओह माय गॉड , दंगल जैसी फिल्मो का विरोध हो चुका है, और ये फिल्मे रिलीज भी हुयी और बेहद सफल भी हुयी। पद्मावती का फर्जी विरोध करने वाले जानते है कि इस विरोध से जो भी होगा वह इसका प्रचार होगा। अंततोगत्वा फिल्म रिलीज होगी और देश भर के सिनेमाघरों में चलेगी। यदि फिल्म की ओपनिंग कमजोर रहती है तो कुछ हुड़दंगी संगठन थियेटर में जाकर तोड़फोड़ कर देंगे या निर्देशक के पुतले जला देंगे जिससे इसका प्रचार होगा और शेष राज्यों में यह फिल्म भीड़ खींचने लगेगी !!!
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1.b) रिलीज होने के बाद इस फिल्म के सेटेलाइट अधिकार बेचे जायेगे और पीके , ओह माय गॉड , दंगल की तरह इस फिल्म को प्रति सप्ताह तब तक दिखाया जायेगा जब तक कि प्रत्येक भारतीय इस फिल्म को न देख ले।
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1.c) सरकार इस फिल्म को बेन नहीं करना चाहती है। किन्तु यदि बेन करने का पर्याप्त दबाव बन जाता है तो वे इसे बेन कर देंगे और निर्माता से कहेंगे कि कोर्ट से इसकी एन ओ सी ले आये। निर्माता 2 दिन में कोर्ट से रिलीज का आदेश ले आएगा। कोर्ट सरकार को यह भी आदेश देगी कि इस फिल्म के प्रसारण की समुचित सुरक्षा के प्रबंध करें। कोर्ट के आदेश पर जब पुलिस थियेटरो के बाहर खड़ी रहेगी तो तोड़फोड़ करने की मंशा रखने वाले संगठन खामोश हो कर घर चले जाएंगे। जजों का पुतला फूंकने में जो साहस चाहिए वे उससे वंचित है।
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1.d) दरअसल फिल्म से मुनाफा कमाना कोई विषय ही नहीं है। फिल्म में पैसा सऊदी अरेबिया / मिशनरीज ने लगाया है और उन्हें इससे मुनाफा कमाने की कोई फ़िक्र भी नहीं है। वे हिन्दू चरित्रों का नकारात्मक चित्रण करना चाहते है। वे यह सन्देश देना चाहते है कि जौहर करना एक अतार्किक एवं बेवकूफी भरा कदम था, और पद्मावती को खिलजी के साथ चले जाना चाहिए था। मदर इण्डिया ऑस्कर के अंतिम दौर से इसीलिए बाहर हो गयी थी क्योंकि "उनका" मानना था कि नरगिस को साहूकार से आर्थिक मदद लेने के बदले अपनी देह का सौदा कर लेना चाहिए था। मददगार को अपनी देह न सौंप कर नायिका ने बच्चों के पालन पोषण से समझौता किया था।
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(2) वास्तविक समाधान
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@pmoindia पर ट्वीट करें कि फिल्म के प्रसारण का फैसला करने के लिए ज्यूरी ट्रायल किया जाए।
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ज्यूरी मंडल का गठन :
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१) ज्यूरी में 500 सदस्य होंगे। इसमें आधे सदस्य मेवाड़ प्रदेश से तथा शेष सदस्य राजस्थान से होंगे।
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२) ज्यूरी सदस्यों का आयु वर्ग 25 से 55 वर्ष के बीच होगा।
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३) इन सदस्यों का चयन प्रदेश की मतदाता सूचियों से अक्रमत ( रेंडमली ) विधि से किया जाएगा।
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४) ज्यूरी नियमति रूप से सुनवाई करेगी और तीन चौथाई बहुमत से आरोपियों का नार्को टेस्ट ले सकेगी।
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५) ज्यूरी जो भी फैसला दे उसकी अपील राष्ट्रीय ज्यूरी में की जा सकती है। राष्ट्रीय ज्यूरी में 1500 सदस्य होंगे और इनका चयन पूरे देश से किया जाएगा।
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६) राष्ट्रीय ज्यूरी के फैसले की अपील सुप्रीम कोर्ट में नहीं की जा सकेगी न ही संसद इस फैसले की खिलाफ कोई प्रस्ताव ला सकती है। किन्तु इस फैसले को राष्ट्रिय स्तर पर जनमत संग्रह की किसी प्रक्रिया द्वारा तब पलटा जा सकेगा जब देश के 51% मतदाता ऐसा समर्थन दर्शाएं।
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इस ज्यूरी के सामने फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं विभिन्न अन्य पक्षकार फिल्म के बारे में अपना स्पष्टीकरण या पक्ष रख सकते है। ज्यूरी सदस्य फिल्म देखकर यह तय कर सकते कि फिल्म को बेन करने के अलावा राष्ट्रिय चरित्रों का विद्रूप चित्रण करने के आरोप में निर्माता , निर्देशक एवं अभिनेताओ को क्या सजा दी जानी चाहिए। यदि मुझे ज्यूरी में आने का अवसर मिलता है और यह पाया जाता है कि फिल्म में विद्रूप चित्रण किया गया है तो मेरा वोट इन्हें जेल में भेजने के लिए होगा। निर्माता , निर्देशक, एवं फिल्म के तीनो मुख्य अभिनेताओं / अभिनेत्री को कम से कम 3 साल की सजा दी जानी चाहिए। तीन साल की यह सजा इन्हें चित्तोड़ जेल में काटनी होगी और इन्हें एक भी दिन के लिए पैरोल पर रिहा नहीं किया जाएगा।
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ऐसे फैलसे से यह फिल्म देश के अलावा अन्य देशो में भी ऑफिसियली रिलीज नहीं हो पाएगी। अलबत्ता टोरेंट पर यह फिल्म उपलब्ध रहेगी और इसे किसी भी तरह से रोका नही जा सकेगा। पर सजा मिलने से आइन्दा से कोई भी निर्माता-निर्देशक ऐसी फिल्म बनाने का साहस नहीं जुटाएगा और यदि वह साहस जुटाता भी है तो उसे अभिनेता नहीं मिल सकेंगे।
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कृपया @pmoindia पर यह ट्वीट करें - @pmoindia I instruct you to order jury trial on padmavti movie makers. #JuryTrialOnPadmawatiMakers .
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स्थायी समाधान सेंसर बोर्ड चेयरमेन पर राईट टू रिकॉल प्रक्रिया है। इस क़ानून के आने से ऐसी गलीज फिल्मो रिलीज करने वाले चेयरमेन को जनता नौकरी से निकाल सकेगी, और नया आने वाला चेयरमेन तमीज से काम करेगा। ज्यूरी सिस्टम प्रक्रियाएं लागू होने से इस तरह की फिल्में बनाने वाले और इन्हे प्रमोट करने वाले अपना प्रभाव खो देंगे।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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