> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-03-25

Pawan Jury BhilwaraRj

कोरोना ; क्यों विगत दशकों में भारतीयों में प्रतिरोधक क्षमता कम हुई है
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इसके निम्नलिखित कारण है :
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(1) फलों में उच्च कीटनाशक
(2) फलों को पकाने में रसायनो का ज्यादा उपयोग
(3) पशुओ में दूध बढ़ाने वाले हार्मोन्स का इस्तेमाल
(4) रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग
(5) रासायनिक खाद्य तेल यानी रिफाइंड तेल का उपयोग
(6) पॉलिश किए हुए चावल का अधिक इस्तेमाल
(7) गुड़ की जगह चीनी का इस्तेमाल
(8) फैक्ट्रीयों में बने रिफ़ाइंड साल्ट का इस्तेमाल
(9) अफीम पर प्रतिबंध, और इससे शराब / तंबाकू के उपयोग में वृद्धि हुयी
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इसमें से प्रत्येक और प्रत्येक मामले में, पेड मीडिया पार्टियों (कांग्रेस-संघ-आपा) और पेड मीडीया नेताओ (सोनिया-मोदी साहेब-अरविंद केजरीवाल) द्वारा छापे गए कानून ड्राफ्ट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई !!
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उदाहरण के लिए, उन्होंने चीनी को सब्सिडी देने वाले कानून ड्राफ्ट्स छापे जिससे चीनी की तुलना में गुड़ की लागत बढ़ गयी। और उन्होंने ऐसे कानून लागू किये जिससे छोटी तेल मिले बाजार से बाहर हो गयी, जबकि बड़ी चीनी मिलों को अप्रत्यक्ष सब्सिडी मिली। बड़ी मिलें खाद्य तेलों में रासायन डालती है, जिसे रिफाइंड ऑइल कहा जाता है।
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फलों और वनस्पति को पकाने में रासायनो का इस्तेमाल करने से प्रतिरोधक क्षमता में काफी कमी आई है। उदाहरण के लिए केले में ऐसे कई विटामिन है जिनका निर्माण सिर्फ तब होगा जब उन्हें प्राकृतिक रूप से पकाया जाए। और प्राकृतिक रूप से पकाने के लिए कई दिनों की आवश्यकता होती है। लेकिन भारतीय शहरों में मिलने वाले ज्यादातर केलो को रसायनो का इस्तेमाल करके 4 घंटो में ही पका लिया जाता है !!! इस तरह पकाये गए केले में शून्य विटामिन होते है, और यह आपको शून्य प्रतिरक्षा देता है !!
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संतरो को पकाने के लिए भी इसी तरह के रसायनो का इस्तेमाल किया जाता है। रसायनो से पकाये गए संतरो में कीटनाशक अधिक एवं विटामिन काफी कम होते है। इस तरह किसी ज़माने में संतरे रोग प्रतिशोधक क्षमता बढ़ाते थे, किन्तु आज नहीं !!
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और रिफाइंड तेल पर विचार करें। प्राकृतिक तेल को रिफाइंड करते समय कई अच्छे या बुरे बैक्टीरिया हटा दिए जाते है, और दर्जनों हानिकारक रसायनों को इसमें मिला दिया जाता है !!! रिफाइंड तेल के पैकेट पर dirty oil या "खाने योग्य नहीं" का लेबल होना चाहिए, लेकिन इसे स्वास्थ्यवर्धक तेल के रूप में बताया जाता है !! भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया नेताओ ने ऐसे कानून छापे जो तेल निर्माताओं को इस अखाद्य तेल को रिफाइंड तेल कहने की अनुमति देते है !!!
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फैक्ट्री में बना सफ़ेद रिफ़ाइंड फ़्री फ़्लो नमक व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को घटाता नहीं है, लेकिन इसमें ऐसे कई आवश्यक घटक नहीं होते है जो कि सेंधे नमक में होते है। फैक्ट्री का नमक उच्च रक्तचाप देता है, और उच्च रक्तचाप की दवाओ के कई अन्य दुष्प्रभाव है।
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तो इस तरह पेड मीडिया पार्टियों द्वारा छापे गए कई सारे कानूनों की श्रृंखला के कारण, भारत के लोगो की प्रतिरक्षा क्षमता कफी कम हो गई है।
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लेकिन एंटी बायोटिक, बेहतर चिकित्सीय उपकरणों की उपलब्धता एवं अधिक अस्पतालों आदि के कारण व्यक्ति की औसत आयु बढ़ी है। लेकिन औसत उम्र बढ़ने बावजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता घट गयी है !!
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तो हमें प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए कई क़ानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में छपवाने की जरूरत है।
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अपनी खुराक में सिर्फ फल-सब्जियां आदि को शामिल करने से कोई बदलाव नहीं आयेगा। क्योंकि हम जितने अधिक फल खाते है उसी अनुपात में शरीर में कीटनाशक और जहरीले रसायन भी पहुंचा देते है !! और इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
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