Pawan Jury BhilwaraRj
क्या लॉकडाउन की अवधि पर नागरिको की रायशुमारी की जानी चाहिए ?
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(A) एक धारा यह है कि, यह वायरस फेफड़ो को इन्फेक्ट कर रहा है। जब ये वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो लगभग 20% लोगो (उम्र एवं इम्युनिटी के अनुसार) को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होगी और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होगी। शेष 80% मामूली सर्दी जुकाम के लक्षणों के साथ स्वयं ही ठीक हो जायेंगे।
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आवश्यकतानुसार वेंटिलेटर मिलने पर इन्हें अगले 2 हफ्ते तक आक्सीजन मिलती रहेगी, और इस दौरान शरीर कोरोना से फाईट करते हुए इम्युनिटी जुटा लेगा। वेंटिलेटर के अलावा इन्हें आइसोलेशन यूनिट्स एवं अन्य दवाइयाँ भी मिलेगी जिससे ये जी भी जायेंगे और इन्फेक्शन अन्य लोगो को भी नहीं फैलेगा। लॉकडाउन संक्रमण की गति को कम कर देता है। संक्रमण तो होगा, लेकिन स्पीड टूट जायेगी, ताकि ज्यादा लोगो को इलाज मिल सके। और इस वजह से मृत्यु दर कम होगी।
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(B) दूसरी धारा यह है कि, अन्य फ्लू की तरह ही यह एक साधारण फ्लू है। और उतना जानलेवा नहीं है जितना जानलेवा इसे पेड मीडिया द्वारा रिपोर्ट किया जा रहा है। वे अन्य प्रकार की बीमारियों से होने वाली मृत्यु, सामयिक मृत्यु, वृद्धावस्था के कारण होने वाली मृत्यु आदि को भी कोरोना के खाते में डाल रहे है, और इस वजह से आंकड़ो में भयावहता आ रही है।
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यदि लॉकडाउन न करके सामान्य सोशल डीस्टेंसिंग रखी जायेगी तो नागरिको में इस वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Herd Immunity) उत्पन्न हो जायेगी, जिससे जाने भी कम जायेगी और इकॉनोमी में नुकसान भी कम होगा। फिर इसमें काफी विरोधभासी सूचनाएं, तर्क, राजनीति, कारोबार, अफवाहें, षड्यंत्र, प्रोपेगेंडा आदि सभी कुछ है।
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अब कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश अलग अलग रणनीति का इस्तेमाल कर रहे है।
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(b1) जापान ने लॉकडाउन नहीं किया है। किन्तु वहां पर लगभग सभी लोग मास्क का इस्तेमाल कर रहे है, और जापान में हाईजीन का स्तर भी अन्य देशो की तुलना में काफी उच्च है। तो वहां पर जनजीवन सुचारू होने के बावजूद कोरोना के संक्रमण की दर काफी कम है।
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(b2) अमेरिका में ट्रंप ने इस तरह के एलान दिए है कि वे लॉकडाउन नहीं करेंगे। लेकिन अमेरिका में नागरिको के पास जिस तरह के राइट्स और प्रशासनिक व्यवस्था है वहां पर लॉकडाउन का फैसला अकेला राष्ट्रपति नहीं करता। वहां पर विभिन्न राज्यों के गवर्नर्स ने आंशिक लॉकडाउन किया है, और शेष नागरिको पर छोड़ दिया है। तो आधा लॉक डाउन सरकार की तरफ से है और आधा नागरिको पर।
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(b3) पाकिस्तान के पीएम ने लॉकडाउन से इंकार किया है, किन्तु वहां पर भी राज्य सरकारों ने लॉक डाउन किये है। पाकिस्तान में भी लॉकडाउन को जबरिया निष्पादित नहीं गया है। और वहां पर भी लॉकडाउन है भी और नहीं भी। लेकिन पाकिस्तान में सोशल डिसटेंसिंग भी नहीं है और एक बड़ा वर्ग कोरोना से बेपरवाह है।
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चूंकि इसकी मारक क्षमता को लेकर अलग अलग राय है अत: लॉकडाउन होना चाहिए या नहीं होना चाहिए या कितनी अवधि के लिए होना चाहिए, और क्या इससे कोरोना वायरस रुकेगा इस पर भी विभिन्न देश अलग अलग तरीके से कार्य कर रहे है।
दुसरे शब्दों में, कोरोना जितना ही बड़ा मुद्दा अब लॉकडाउन भी है।
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(C) भारत में लॉकडाउन : भारत में अभी लॉकडाउन भी है और कर्फ्यू भी है। और यह पूरी तरह से लागू भी है। अभी इसकी अवधि 21 दिन तय की गयी है, जिसे बढ़ाया भी जा सकता है। कितने दिनों का लॉकडाउन कितना प्रभावी होगा इस विषय पर भारत में अलग अलग लोगो की अलग राय है। और किसी को नहीं पता कि किस स्तर के और किस अवधि के लॉकडाउन से हम अपना बचाव कर पायेंगे। और चूंकि यह राय का मामला है, तथ्य का नहीं, इसीलिए सभी को सुना जाना चाहिये।
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हमारा सुझाव है कि, लॉक डाउन की अवधि पर जनता की राय जानने के लिए प्रधानमंत्री को मोबाईल SMS का इस्तेमाल करते हुए एक देश व्यापी जनमत संग्रह कराना चाहिए। और जनमत संग्रह के बावजूद अंतिम फैसला करने का अधिकार पीएम के पास ही रहेगा।
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प्रधानमंत्री SMS आधारित जनमत संग्रह के लिए निम्नलिखित प्रकिया का इस्तेमाल करेंगे :
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(1) पीएम जनमत संग्रह के लिए एक मोबाईल नंबर सार्वजनिक करेंगे।
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(2) कोई भी मतदाता अपने आधार से लिंक्ड मोबाईल द्वारा इस नम्बर पर SMS भेज सकता है।
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(3) मतदाता SMS में लॉकडाउन के दिनों की संख्या एवं अपना वोटर आई डी नंबर लिखकर भेजेगा।
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(4) यदि मतदाता 0 (जीरो) लिखकर भेजता है तो इसका आशय होगा शून्य दिनों का लॉकडाउन।
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(5) पीएम प्राप्त हुए सभी SMS को अपनी वेबसाईट पर सार्वजनिक करेंगे।
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(6) आधार कार्ड नंबर सार्वजनिक नहीं किये जायेंगे, किन्तु वोटर आई डी नंबर सार्वजनिक होंगे। और भारत के सभी मतदाताओं के वोटर आई डी पहले से ही सार्वजनिक है।
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(7) 18 वर्ष से के कम उम्र के आधार धारको के SMS ख़ारिज कर दिए जायेंगे।
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(8) प्राप्त SMS के आधार पर पीएम लॉकडाउन की अवधि का माध्य निकालेंगे। यह माध्य ही जनता की राय मानी जाएगी।
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(9) शेष लोगो का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सांसद करेंगे।
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(10) जनमत संग्रह में जो भी नतीजे आये, लेकिन लॉकडाउन की अवधि के बारे में अंतिम फैसला पीएम का ही होगा।
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हमें इस वायरस की ताकत का कोई सटीक अंदाजा नहीं है। हो सकता है कि यह स्पेनिश फ्लू की तरह करोड़ो नागरिको की जान ले ले, और हो सकता है कि ज़ीका, निपाह की तरह इसकी मारक क्षमता काफी कम हो।
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यदि जनमत संग्रह नहीं किया जाता है तो लॉकडाउन के स्तर एवं अवधि की जिम्मेदारी पीएम पर आएगी, जो कि एक बड़ा मुद्दा है। यदि जनमत संग्रह हो जाता है तो इसमें जनता की भागीदारी होगी। और पीएम को यह अधिकार होगा कि वे जनता द्वारा दिए गए फीड बेक को मान भी सकते है, और नहीं भी मान सकते है।
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इस समय लॉकडाउन के स्तर एवं इसकी अवधि का फैसला निर्णायक रूप से पीएम कर रहे है। और चूंकि पीएम पेड मीडिया के प्रायोजकों पर बुरी तरह से निर्भर करते है, अत: पीएम पेड मीडिया के प्रायोजको की सलाह पर ही फैसला लेंगे !!
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यदि आप चाहते है कि पीएम इस तरह की रायशुमारी करें ताकि आप लॉकडाउन पर अपना प्रतिभाव भेज सके तो यह ट्विट पीएम को भेजे –
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@PmoIndia, #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal कृपया एक फोन नं जारी करें ताकि नागरिक अपनी वोटर ID व लॉकडाउन की अवधी (N days) लिखकर SMS भेज सके। 0 से आशय होगा लॉकडाउन नही। मतदाता द्वारा भेजी दिनों की संख्या सार्वजनिक की जाएगी, और लॉकडाउन की अवधि पर अंतिम फैसला पीएम ही करेंगें।
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@PmoIndia, #OpenSmsVoteOnLockDown #PmDecsionFinal pls put a phno. voter can SMS his voterid, number of lockdown days he wants. 0 for no lockdown. voterid nDays be made public on PMO website. PM's decision will be final. Using adhar of each phno, ensure one adhar votes only once.
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