> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-03-17

Pawan Jury BhilwaraRj

चमचा डेमोक्रेसी = राज्य सभा सीट के लिए विधायको की नीलामी
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(1) सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज रंजन गोगोई को राज्यसभा सीट दी गयी।
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(2) बीजेपी=संघ ने पैसा फेंककर गुजरात कांग्रेस के 4 MLA खरीदे ताकि राज्यसभा सीटे नीलाम की जा सके।
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1910 से पहले तक अमेरिका में भी सीनेटर (राज्य सभा सांसद ) विधायकों द्वारा मनोनीत होते थे, अत: वे पैसा लेकर खुले आम बिक जाते थे। फिर अमेरिका के कार्यकर्ताओ ने सांसदों पर दबाव बनाया कि वे राज्य सभा सांसदों के सीधे चुनाव का कानून छापे। अमेरिका के नेता एवं धनिक इस तरह का कानून नहीं चाहते थे। किन्तु कार्यकर्ताओ के दबाव में, उन्हें यह क़ानून छापना पड़ा और 1911 से अमेरिका में राज्य सभा मेंबर भी सीधे चुनकर आने लगे। और इस तरह वहां पर राज्य सभा सांसदी पाने के लिए विधायकों की नीलामी यानि हॉर्स ट्रेडिंग ख़त्म हुई।
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जब भारत का संविधान लिखा जा रहा था तो हमारे नेताओ को पहले से पता था कि यदि विधायकों को राज्य सभा सदस्य चुनने का अधिकार दिया गया तो सभी विधायक बिकने लगेंगे और उस व्यक्ति को ही राज्य सभा सदस्य के लिए वोट करेंगे जो उन्हें ज्यादा पैसा देगा !!
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पर पेड मीडिया के प्रायोजकों यानि ब्रिटिश धनिको द्वारा उन्हें निर्देश दिए गए कि चमचा डेमोक्रेसी बनाये रखने के लिए राज्य सभा सदस्यों को चुनने का अधिकार विधायकों के पास ही रखो, ताकि जब जरूरत हो हम MLA वगैरह के सामने पैसा फेंककर अपने चमचो को राज्य सभा में भेज सके।
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संविधान लिखने वालो ने पूछा कि - लेकिन भारत के कार्यकर्ता कहेंगे कि इस क़ानून के कारण विधायकों की नीलामी हो रही है तो उन्हें क्या जवाब दिया जाएगा ?
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पेड मीडिया के प्रायोजकों ने कहा - वो आप लोग टेंशन मत लो। हम पेड मीडिया की सहायता से उनके दिमाग में यह बात अच्छी तरह से ठांस देंगे कि विधायक इसीलिए बिक जाते है कि भारतीय लोग भ्रष्ट एवं स्वार्थी है और उनका नैतिक चरित्र घटिया है आदि आदि।
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संविधान लिखने वालो ने फिर शंका रखी कि - लेकिन जब भारत के कार्यकर्ता कहेंगे कि, 1910 से पहले अमेरिका में भी राज्य सभा की वोटिंग के लिए MLA इसी तरह बिक जाते थे, लेकिन वहां डायरेक्ट इलेक्शन आने से स्थिति पलट गयी तो इस स्थिति को कैसे डील किया जायेगा।
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पेड मीडिया के प्रायोजकों ने कहा - वो बात उन्हें कभी मालूम नहीं होगी। क्योंकि हम भारत की किसी भी पाठ्य पुस्तक, मैगजीन, अख़बार, पत्रिका आदि में यह जानकारी छापने ही नहीं वाले है। अत: तुम बस हम बोल रहे वैसी इबारत छाप दो और बाकी हम पर छोड़ दो। और अगर तुम्हे इससे दिक्कत हो रही हो तो तुम संविधान सभा से निकल सकते हो, हम किसी दूसरे को तुम्हारी जगह रख देंगे।
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पेड मीडिया पार्टियां Vs राईट टू रिकॉल पार्टी
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भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियां आज भी राज्य सभा सांसदों के डायरेक्ट इलेक्शन का विरोध करती है। उनका कहना है कि - राज्य सभा सांसदों को तो विधायक ही चुनेंगे, चाहे जो हो जाए। भारत के मतदाताओ को राज्य सभा सांसदों से कोई लेना देना नहीं रखना चाहिए। और जिन मतदाताओं को राज्य सभा सांसदों के लिए वोटिंग करने का ज्यादा शौक है उन्हें अमेरिका जाकर सेट हो जाना चाहिए।
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भारत में राइट टू रिकॉल पार्टी एक मात्र पार्टी है जिसने यह प्रस्ताव किया है कि - राज्य सभा सांसदों को सीधे मतदाताओं द्वारा चुना जाना चाहिए। साथ ही हमारा प्रस्ताव राज्य सभा सांसद को वोट वापसी के दायरे में भी लाना है ताकि वह अगले 6 वर्ष तक भी मतदाताओं के नियंत्रण में रहे।
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#JuryCourt , #VoteVapsi
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