Pawan Jury BhilwaraRj
Covid 19 का क्या इलाज है ?
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कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के पास 3 विकल्प है :
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(i) प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता
(ii) खेल में बने रहने के लिए वेंटिलेटर एवं सहायक दवाइयाँ
(iii) ब्लड प्लाज्मा ट्रीटमेंट
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(1) प्रतिरोधक क्षमता विकसित होना : अभी तक के आंकड़े बताते है कि कोरोना से संक्रमित होने वालो में से औसतन 80% व्यक्तियों को किसी इलाज की जरूरत नहीं होती और मामूली लक्षण प्रकट होने के साथ ही उनका शरीर कोरोना के प्रति प्रतिरक्षा जुटा लेता है जिससे वे ठीक हो जाते है।
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आयु, स्वास्थ्य, जींस आदि व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करते है, अत: कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले शेष 15-20% को इलाज की जरूरत होगी।
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(1.1) शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कैसे विकसित होती है ?
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शरीर पर लगातार कई जीवाणु-विषाणु आदि हमला करते रहते है, और मानव शरीर इन्हें नष्ट करने के लिए निरंतर एन्टीजन बनाता रहता है। जब शरीर किसी पैथोजन (बैक्टीरिया, वायरस आदि) के खिलाफ एन्टीबॉडी बना लेता है, तो कहा जाता है कि शरीर ने अमुक पैथोजन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है।
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मान लीजिये कि कोई नया पैथोजन C शरीर पर आक्रमण करता है। अब शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C को परास्त करने के लिए एन्टीबॉडी विकसित करना शुरू कर देगी। जब तक प्रतिरोधक प्रणाली एवं C के बीच में यह लड़ाई चलेगी तब तक शरीर बीमार रहेगा।
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यदि पैथोजन C हावी हो गया तो शरीर के कई महत्त्वपूर्ण अंगो को डेमेज कर देगा और व्यक्ति मर जायेगा। लेकिन यदि शरीर C की सेना को मारने वाले एन्टीबॉडी बना लेता है तो एन्टीजन के सैनिक पैथोजन की सेना को मार देंगे और व्यक्ति ठीक हो जाएगा।
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अब चूंकि शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C के खिलाफ एन्टीबॉडी बनाने का फार्मूला ईजाद कर चुकी है, अत: आने वाले समय में भी जब कभी C हमला करेगा तो शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली C को हराने वाले एन्टीबॉडी का उत्पादन करना तुरन्त शुरू कर देगी, और C चित हो जाएगा।
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कोरोना एक नया वायरस है, अत: मानव शरीर में इस वायरस का मुकाबला करने वाले एन्टीजन नहीं है। जब व्यक्ति में कोरोना प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए यह एक नया दुश्मन है। अत: शरीर को इसके खिलाफ एन्टीबॉडी बनाने पड़ेंगे। और लगभग 80% मानव शरीर कोरोना को परास्त करने वाले एन्टीजन बना लेंगे।
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तो संक्रमित होने वाले 80% लोग प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के कारण खुद ही ठीक होने वाले है। इन लोगो को कब इन्फेक्शन होगा और कब ये ठीक होंगे उन्हें पता भी नहीं चलेगा !!
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लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि, यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण हो जाता है तो उसे यह पता नहीं है कि वह 80% वालों में शामिल है या 20% में !! इसीलिए यह जरुरी है कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास पहुंच जाना चाहिए या खुद को कोरेंटाईन कर लेना चाहिए।
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(1.2) मेडिकल साइंस में रातों रात प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का कोई तरीका नहीं है। मतलब ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं है जो सटीक रूप से किसी व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता में 1% का भी इजाफा तुरंत कर सके।
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(1.3) नॉन मेडिकल साइंस वाले तबके से कई लोग इस बारे में अपने अपने तरीके से सलाहें दे रहे है, जिसमें अच्छे खान पान से लेकर, पूरी नींद एवं कुल्हाड़ी का सूप तक शामिल है।
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बहरहाल वांछित प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेने वाले इन 80% को लेकर कोई समस्या नहीं है, किन्तु समस्या इन शेष 20% लोगो को लेकर है। क्योंकि कुल्हाड़ी का सूप इन पर काम नहीं करेगा !!
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(2) टिके रहने के लिए वेंटिलेटर एवं सहायक दवाइयाँ : कोरोना वायरस फेफड़ो पर मौजूद जीवाणुरोधी परत / झिल्ली को खा जाता है, जिससे अन्य बैक्टीरिया फेफड़ो को संक्रमित कर देते है। यदि संक्रमित व्यक्ति को वेंटिलेटर नहीं मिला तो उसके फेफड़े जाम हो जायेंगे और मृत्यु होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। वेंटिलेटर उसे सांस देता रहेगा और इस दौरान शरीर एन्टीबॉडी बनाने का प्रयास करेगा।
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इसके अलावा डॉक्टर अपने अनुभव एवं अनुमान से अन्य सहायक दवाइयाँ (मलेरिया की दवा, HIV की दवा आदि) भी देते रह सकते है, ताकि रोगी के आवश्यक अंगो को कम नुकसान हो। यदि शरीर वक्त रहते कोरोना का एन्टीबॉडी बना लेता है तो व्यक्ति बच जायेगा वर्ना मृत्यु होना तय है।
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इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि, वेंटिलेटर एवं अन्य सहायक दवाइयाँ सिर्फ उस डेमेज को कम करने का काम कर सकते है जो डेमेज कोरोना वायरस दे रहा है। अभी तक ऐसी कोई दवा मौजूद नहीं है जो कोरोना के वायरस को मार सके। उसे शरीर द्वारा बनाए गए एन्टीबॉडी ही मारेंगे।
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लेकिन यदि रोगी को वेंटिलेटर एवं अन्य सहायक दवाइयाँ नही दी गयी तो कोरोना एक के बाद एक शरीर के अन्य अंगो को नुकसान पहुंचाता जाएगा। अन्य अंगो के निष्क्रिय हो जाने से रोगी मर जाएगा, और शरीर को एन्टीबॉडी विकसित करने का पर्याप्त समय नही मिलेगा।
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(3) कोरोना से रिकवर हुए व्यक्ति का प्लाज्मा : मौजूदा स्थिति में कोरोना का यह सबसे प्रभावी इलाज है। प्लाज्मा ट्रीटमेंट के साथ कई व्यवहारिक कठिनाइयाँ है। लेकिन यदि कोई VVIP कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो उसे यह इलाज मिल सकता है।
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(3.1) ब्लड प्लाज्मा क्या है ?
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खून के मुख्य रूप से 2 संघटक है :
(3.1.1) ब्लड प्लाज्मा - हल्के पीले रंग का एक द्रव है जो खून का मूल तत्व है। खून में लगभग 55% हिस्सा प्लाज्मा नामक द्रव होता है।
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(3.1.2) रक्त कोशिकाएं (Rbc + Wbc + Platelets) – ये कोशिकाएं प्लाज्मा नामक तरल में ही बहती है।
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शरीर में से प्लाज्मा निकालने के लिए पहले व्यक्ति का रक्त निकाला जाता है, और फिर इसमें से प्लाज्मा अलग कर लिया जाता है।
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शरीर जब भी कोई एन्टीजन बनाता है तो ये एन्टीबॉडी प्लाज्मा में संग्रहित रहते है। मान लीजिये कोई व्यक्ति X कोरोना से संक्रमित हुआ और कुछ दिनों बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया है। चूंकि अब X के प्लाज्मा में कोरोना वायरस को मारने वाले एन्टीबॉडी मौजूद है, अत: X के रक्त में से प्लाज्मा निकाल कर किसी संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता है। जब संक्रमित व्यक्ति को X का प्लाज्मा दिया जायेगा तो शरीर में कोरोना वायरस को मारने वाले एन्टीबॉडी चले जायेंगे और वे कोरोना वायरस को मार देंगे !! ( Imported Weapons )
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(3.2) प्लाज्मा ट्रीटमेंट के साथ चुनौतियाँ :
(3.2.1) यदि संक्रमण काफी फैल चुका है तो सीमित एन्टीबॉडी व्यक्ति को बचा नहीं पायेंगे।
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(3.2.2) दाता का रक्त निर्दोष होना चाहिए। मतलब उसे अन्य कोई बीमारी न हो।
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(3.2.3) खर्चीली एवं जटिल प्रक्रिया होने से सिर्फ अमीर / शक्तिशाली व्यक्ति ही इस्तेमाल कर सकेंगे।
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(3.2.4) प्लाज्मा डोनर बदले में ऊँचे दाम मांग सकता है।
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(3.2.5) यदि रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली काफी कमजोर है तो शरीर एन्टीबॉडी को एडोप्ट नहीं कर पायेगा, और सीमित संख्या के एन्टीजन कोरोना वायरस की संख्या को कवर नहीं कर सकेंगे।
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(3.3) अमेरिका में कोरोना वायरस से रिकवर हुए व्यक्तियों के प्लाज्मा से अन्य संक्रमित व्यक्तियों का इलाज करने की दिशा में काम किया जा रहा है - <https://www.theatlantic.com/science/archive/2020/03/plasma-blood-covid-19-survivors/609007/>
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(3.4) वुहान इंस्टीट्युट जब नागालेंड से चमगादड़ लेकर गया था तो उन आदिवासियों के रक्त नमूने भी ले गया था जिनमे सार्स परिवार के वाइरस के प्रति प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता मौजूद है। कोरोना सार्स परिवार का ही सदस्य है। पूरी सम्भावना है कि इन आदिवासियों के प्लाज्मा में कोरोना के एन्टीबॉडी मौजूद है।
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टाटा भी इस अध्ययन में शामिल था। हमें नहीं पता कि टाटा के पास इस बारे में क्या जानकारी है। उसने यह जानकारी भारत सरकार को दी है या नही दी है, और सरकार ने मांगी भी है या नहीं। हालांकि सरकार ने इस प्रकरण की जांच कराई थी। लेकिन नतीजे सार्वजनिक नहीं है।
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(3.5) वुहान में कोरोना का संक्रमण बड़े पैमाने पर हुआ था। लगभग पूरा प्रान्त इसकी चपेट में था। अभी उन सभी में इसके एन्टीबॉडी बन चुके है, और उनके प्लाज्मा का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है। हमें नहीं पता अगर चीन ने प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया हो।
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तो इन्फेक्शन होने पर संक्रमित व्यक्ति के पास बचाव के अतिरिक्त उपरोक्त 3 विकल्प से इतर कोई मार्ग नहीं है।
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जहाँ तक वैक्सीन की बात है, कोरोना वायरस को मारने वाली कोई दवा या वैक्सीन वास्तविक दुनिया में उपलब्ध नहीं है। हालांकि सोशल मीडिया एवं पेड मीडिया पर रोज एक न एक दवा या वैक्सीन की खोज-खबर आती रहती है !!
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Fittest will Survive…
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