Pawan Jury BhilwaraRj
एफडीआइ रिटेल के पूर्व प्रस्ताव में मोदी साहेब ने एक मह्त्त्व्पूर्ण बदलाव किया है — विदेशी कम्पनियाँ अब अपने प्रोजेक्ट में 30% भारतीय वस्तुओं एवं श्रम के उपयोग को 5 वर्षों तक के लिए टाल सकेगी !!! संघ के सभी कार्यकर्ता इस फ़ैसले का समर्थन कर रहे है ।
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पहले इस प्रकार का प्रावधान था कि — विदेशी कम्पनियों के कुल विक्रय में 30% हिस्सा “मेड इन इंडिया” होगा । उदाहरण के लिए यदि किसी विदेशी कम्पनी की सालाना बिक्री 100 करोड़ है तो उन्हें 30 करोड़ मूल्य की वस्तुएँ भारत में निर्मित ख़रीदनी होगी या इस मूल्य के बराबर श्रम का भुगतान भारतियों को किया जाएगा । इस व्यवस्था से विदेशी कम्पनियों के कारोबार में भारतीय इकाइयों की भागीदारी होती है और विदेशी कम्पनियाँ सिर्फ़ ज़रूरी वस्तुएँ / कच्चा माल / उपकरण ही आयात करती है , ग़ैर ज़रूरी नही । मोदी साहेब ने अब इस प्रावधान में छूट दे दी है ।
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गुजरात चुनावों के चलते पद्मावती का प्रदर्शन टाल दिया गया था । नतीजे आने के बाद इसे हरी झंडी दे दी गयी है । ज़ाहिर है, मोदी साहेब राजस्थान एवं एम पी चुनावों के कारण ठहरे हुये है । इन राज्यों के चुनाव निपटते ही सिंगल ब्राण्ड की तरह मल्टी ब्राण्ड रिटेल में भी FDI की सीमा बढ़ाकर 100% कर दी जाएगी ।
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इन्हें सुधारने का एक मात्र उपाय राईट टू रिकॉल क़ानून प्रक्रियाएँ है । राईट टू रिकॉल नंगी तलवार की तरह सिर पर लटका रहता है । दरअसल राईट टू रिकॉल पदासीन व्यक्ति को निरंतर कसौटी पर परखता है । जैसे ही व्यक्ति प्रजा हित की अनदेखी करेगा, वैसे ही प्रजा उसे पद से निष्कासित कर देगी । चाहे व्यक्ति जज हो या प्रधानमंत्री ।
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