Pawan Jury BhilwaraRj
बिकाऊ ओपिनियन पोल - कैसे बिकाऊ राजनीती शास्त्री, बिकाऊ अर्थशास्त्री एवं बिकाऊ पत्रकार ओपिनियन पोल के नतीजे गढ़ते है।
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एक सवाल लीजिये - भारत के 90 करोड़ मतदाताओं में से कितने प्रतिशत मतदाता सुप्रीम कोर्ट / हाई कोर्ट एवं लोअर कोर्ट के जजों पर भरोसा करते है ?
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स्पष्ट है कि किसी के भी पास इतना पैसा एवं समय नहीं है कि इस सवाल का जवाब जानने के लिए वह 90 करोड़ नागरिको की पड़ताल करे।
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तो एक तरीका यह है कि कुल मतदाताओं में से अक्रमत ढंग से किन्ही 10,000 मतदाताओं को चुना जाए एवं उनसे यह प्रश्न किया जाए। और यहीं पर बिकाऊ बुद्धिजीवी अपनी सुविधानुसार ओपिनियन पोल गढ़ देते है।
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मान लीजिये कोई बिकाऊ बुद्धिजीवी यह दर्शाना चाहता है कि भारत के 90% मतदाताओं को जजो पर भरोसा है। अब मान लीजिये कि वह इन 10,000 मतदाताओं से यह प्रश्न पूछता है , और पाता है कि उनमे से सिर्फ 2,000 नागरिक ही जजों पर भरोसा करते है, और शेष 8,000 उन्हें बदमाश एवं भ्रष्ट मानते है। तब बिकाऊ बुद्धिजीवी अपने सर्वे में उन 2,000 नागरिको को शामिल करेगा और इन 8,000 में से सिर्फ 200 को रखते हुए शेष 7,800 नागरिको को सर्वे से बाहर कर देगा !!
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और अब इस घपले का अंतिम परिणाम वे इस तरह बताएँगे -- देखिये, हमने पूरे देश से रेंडमली चुने गए 2,200 नागरिको पर सर्वे किया है , और यह पाया है कि इनमे से 2,000 नागरिक जजों पर पूरा भरोसा करते है, जबकि 200 नागरिक जजों पर भरोसा नहीं करते। और इस तरह से हम कह सकते है कि भारत के नागरिको में से 90% नागरिक जजों को ईमानदार मानते है !!! और फिर वे इस सर्वे को टीवी एवं अखबारों में प्रसारित करके देश के 100% नागरिको पर यह जताएंगे कि देश के 90% नागरिको के अनुसार हमारे जज ईमानदार है।
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तो इस तरह पिछले 100 सालों से बिकाऊ राजनीति शास्त्री, बिकाऊ अर्थशास्त्री एवं बिकाऊ पत्रकार सर्वे कर कर के और इनका प्रसारण कर कर के नागरिको की आँखों में धुल झोंक रहे है।
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समाधान ?
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हमें सभी नागरिको से यह आग्रह करना चाहिए कि वे किसी मुद्दे पर अपनी राय ट्विटर पर रखें। इससे इन बिकाऊ बुद्धिजीवियों के फर्जी ओपिनियन पोल्स गढ़ने की क्षमता घटती चली जायेगी।
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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