Pawan Jury BhilwaraRj
प्रश्न : "हमने आपने जब पद्मावती फ़िल्म देखी नहीं तो विरोध किस आधार पर कर रहे हैं ?"
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स्पष्टीकरण : निर्माता फिल्म इसीलिए बनाता है ताकि लोग इसे देखें। इस तर्क के मुताबिक चले तो इस फिल्म का समर्थन या विरोध सिर्फ उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसने यह फिल्म देखी हो !! इस लिहाज से यह फिल्म लगभग 5000 हजार करोड़ का कारोबार करेगी, और ज्यादातर लोग इसे देखने चले जायेंगे। और यही निर्माता, निर्देशक का उद्देश्य है। फिल्म देखने के बाद इसका विरोध या समर्थन करने के कोई मायने नहीं है।
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हमारा प्रस्ताव है कि - 500 नागरिको की ज्यूरी को यह फिल्म दिखायी जाए। यदि वे इसे बेन करते है तो फिल्म बेन होगी और यदि वे इसे रिलीज करने के आदेश देते है तो फिल्म रिलीज होगी।
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इस समाधान के अतिरिक्त इस फिल्म का किसी भी तरह से विरोध करना इस फिल्म का प्रचार एवं समर्थन करना है। सभी संगठनों समेत सभी नेता, पार्टियां, कलाकार , मीडिया आदि पिछले 4 महीने से यही कर रहे है। मतलब वे इस फिल्म का विरोध नहीं कर रहे है। दरअसल वे इस फिल्म का प्रचार कर रहे है। वे इस फिल्म को चर्चा में ला रहे है। जिससे लोगो में इसके प्रति कौतुहल बन जाता है। और फिर वे थियेटर की तरफ इसे देखने के लिए दौड़ लगा देते है। और जो इस फिल्म को नहीं देखने का अभियान चलाते है उनकी तरफ यह सवाल उछाला जाता है कि -- जब आपने यह फिल्म देखी ही नहीं है तो इसका विरोध या समर्थन कैसे कर सकते है। जाइये पहले देखकर आइये। गोया कहा जा रहा हो कि - आप बिना गटर में उतरे कैसे बता सकते है कि इसमें मल-मूत्र एवं विष्ठा है। जाइये पहले इस परनाले में डुबकी लगाइये !!! ऐसे नहीं होता है।
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ऐसा प्रश्न मार्केटिंग विशेषज्ञों द्वारा प्लांट किया जाता है। कोई इसे मुख्य धारा में सुनता या पढता है और वैसे ही आगे बढ़ा देता है। वर्ना दो मिनिट रूककर सोचने वाला व्यक्ति इस बात को समझ लेता है कि यह एक चालाक प्रश्न है और सिर्फ फिल्म देखने के लिए प्रेरित करने के लिए पूछा जा रहा है। हालांकि कई लोग यह चालाकी जान बूझकर नहीं करते। वे बस जैसे यह प्रश्न सुनते / पढ़ते है वैसे ही आगे बढ़ा देते है।
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