> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2018-01-16

Pawan Jury BhilwaraRj

90 के दशक में संघ के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया , मोदी साहेब और केशु भाई पटेल एक ही टीम में थे। तब संघ के नेता शंकर सिंह वाघेला व कई संघ के अन्य विधायक कोंग्रेस से जुड़ने की कोशिश कर रहे थे। कहा एवं माना जाता है कि , संघ के एक वरिष्ठ नेता एवं विधायक आत्माराम को पीटने के लिए मोदी साहेब एवं तोगड़िया जी ने संघ के कुछ कार्यकर्ताओ को उकसाया। आत्माराम पटेल की जमकर पिटाई हुयी, उनके कपडे फाड़ दिए गए और उन्हें जान बचाकर अधनंगी हालत में स्टेडियम से भागना पड़ा !! पर हमलावर कार्यकर्ताओ ने रोड़ तक उनका पीछा किया !! स्टेडियम में भरपूर पुलिस व्यवस्था थी , लेकिन उन्हें आदेश दिए गए थे कि वे कोई हस्तक्षेप न करे !!! तो उन्होंने भी इस मामले में दखल नहीं किया। आत्माराम ने थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गयी, जिसमे हत्या का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। लेकिन इस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं हुयी। यह घटना 1996 की है। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि, पूरा वाकया -- हमलावर, पीड़ित, उकसाने वाले, योजना, मारपीट और पुलिस को चुप रहने के आदेश आदि सभी कृत्य संघ के कार्यकर्ताओ एवं नेताओं द्वारा किये गए थे। कोंग्रेस एवं सीपीएम का इस घटना से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था !!
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और अब एक दिन अचानक , 21 साल बाद , 1996 के उस मारपीट के केस में मजिस्ट्रेट संघ के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया के खिलाफ "गैर जमानती वारंट" जारी करता है !!! क्यों ?
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न्याय की इतनी "जल्दबाजी" क्यों ? क्योंकि, ऐसी चर्चा है कि प्रवीण भाई तोगड़िया गुजरात के मंत्री एवं संघ के नेता नितिन भाई पटेल एवं हार्दिक पटेल के साथ गठजोड़ बना रहे है !!! तो तोगड़िया जी को सबक सिखाने के लिए संघ के शीर्ष नेता मोदी साहेब एवं गुजरात के मुख्यमंत्री रूपाणी जी ने मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि वे 21 साल पुराने इस मामले को निकालकर टॉप गियर में डाल दे !!!
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हमारी न्याय व्यवस्था को नेताओं एवं जजों ने इसी तरह से रचा है। यह खुद से ही धीमी नहीं है, इसे जान बूझकर धीमा बनाया गया है। ताकि लोगो की एक टांग में मुकदमो की रस्सी लिपटी रहे। जब जिसको खींचना हो उसकी टांग खींच कर उसे "क़ानून का शासन" के नाम पर सींखचो में डाला जा सके। चाहे मामला लालू का हो या श्री गुरमीत राम रहीम जी का, चाहे आसाराम जी बापू का। केस लम्बे चलते नहीं है। इन्हें जान बुझकर लटका कर रखा जाता है। इसी लटकाने को "केस चल रहा है" कहा जाता है। हमारे सभी नेता एवं जज इन मुकदमो का इस्तेमाल इसी तरह से अपने फायदे के लिए लोगो को काबू करने में करते है। हमारे पीएम से लेकर सभी पार्टियों के नेता एवं जज आदि इस गोरखधंधे में शामिल है।
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आप कुछ भी कर लीजिये, वे भारत की अदालतों को चुस्त नहीं करेंगे। क्योंकि इससे उनके हाथ से लोगो को काबू में रखने की ताकत निकल जायेगी। इन्हें सिर्फ राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों द्वारा ही सुधारा जा सकता है। अन्य कोई उपाय नहीं।
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राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112>;
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खबर का न्यूज लिंक - <http://indianexpress.com/article/india/attempt-to-murder-case-non-bailable-warrant-against-vhp-leader-praveen-togadia-38-others-5012212/>;
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"वेल्थ टेक्स पार्टी"
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