Pawan Jury BhilwaraRj
ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता किस तरह पब्लिक को झाँसा दे रहे है !!
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मुस्लिम शौहर अपनी बीबियों को मुख्यतया दो तरीके से तलाक देते है।
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(1) तलाक-ए-एहसान एवं तलाक-ए-हसन --- लगभग 99% मामलो में इस प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है। पुरुष एक बार तलाक कहता है और उसे दूसरी बार तलाक कहने के लिए अगले 30 दिनों तक इन्तजार करना होता है। दूसरी बार तलाक कहने के बाद शौहर को फिर से अगले 30 दिनों तक इन्तजार करना होता है , और 30 दिन गुजरने के बाद तीसरी बार तलाक कहा जाता है। मोदी साहेब द्वारा लाया गया क़ानून इस प्रकार दिए गए तलाक पर कोई प्रतिबन्ध नहीं लगाता।
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(2) तलाक-ए-बिद्दत --- इस प्रकार से तलाक 1% से भी कम मामलो में दिया जाता है। इस तरीके में शौहर सिर्फ दो सेकण्ड में तलाक-तलाक-तलाक फोन पर या आमने सामने कहता है, या व्हाट्स एप पर लिख कर भेज देता है। और तलाक हो जाता है।
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संघ के सांसदों ने लोकसभा से जो क़ानून पास किया है वह सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत (2) पर रोक लगाता है, तलाक ए हसन (1) पर नहीं। तो अब से इन 1% मामलों में शौहर को 60 दिनों तक इन्तजार करना होगा !! इतना बड़ा बदलाव !!!
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लेकिन पेड मीडियाकर्मी , मोदी साहेब, और संघ के कार्यकर्ताओ ने देश में इस तरह का माहौल बना दिया है जैसे समूचे ट्रिपल तलाक को प्रतिबंधित कर दिया गया है !! दरअसल संघ के कार्यकर्ता एवं मोदी साहेब नापते तो 100 गज है , किन्तु फाड़ते 2 गज भी नहीं है।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ पर मेरा रूख
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(1) प्रस्तावित क़ानून - यदि कोई हिन्दू युवती ( या मुस्लिम युवती ) किसी मुस्लिम युवक ( या हिन्दू युवक ) से विवाह करती है , तो चाहे वह विवाह के पूर्व या विवाह के पश्चात धर्मांतरण करे या न करे, दोनों ही परिस्थितियों में यदि युवती यह मंशा जाहिर करती है कि उसके वैवाहिक जीवन पर उसका जन्मना धर्म लागू होगा , तो वैवाहिक विवादों का निपटान युवती के जन्मना धर्म के क़ानून के अनुसार ही किया जाएगा। यह क़ानून लव जिहाद की समस्या को कुछ ही महीनो में जड़ से खत्म कर देगा।
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(2) इसके अलावा, मुस्लिम महिलाओ को इस बात की सूचना दी जानी चाहिए कि यदि वे चाहे तो निकाह के दौरान निकाहनामे में वे अपनी मर्जी से तलाक की शर्तें आदि तय कर सकती है। और उन्हें वह भी सूचित किया जाना चाहिए कि मुस्लिम युवतियां/युवक यदि चाहे तो अपना निकाह "स्पेशल मैरिज एक्ट" के तहत दर्ज करवा सकते है। ऐसे स्थिति में मामले का निपटान स्पेशल मरीज एक्ट के तहत होगा, न कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार। तो उस तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव की कोई जरूरत नहीं रह जायेगी।
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(3) भारत की मुख्य समस्या टू चाइल्ड पॉलिसी का अभाव है। इसके अलावा बांग्लादेशी घुसपेठियो को रोकने एवं उन्हें खदेड़ने के क़ानून भी तुरंत लागू करने की जरूरत है। सोनिया-मोदी-केजरीवाल इन कानूनों के विरोधी है और देश में इन्हे लागू नहीं करना चाहते। अपनी नाकामयाबी को छिपाने के लिए मोदी साहेब और संघ के कार्यकर्ता "2 सेकण्ड के ट्रिपल तलाक" को बड़ा मुद्दा बनाकर पेश कर रहे है !!
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