> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-09-23

Pawan Jury BhilwaraRj

कृषि उपज एवं वितरण में हम अब तक ठीक वैसा ही शासन भुगत रहे थे, जैसा गोरो के आने से पहले जमीदारों एवं राजाओं का था। और अब सोनिया-मोदी-केजरीवाल इस बदतर शासन को बदतरीन से बदल रहे है !!
.
हम कृषि की पूर्व व्यवस्था के भी खिलाफ थे, और नयी व्यवस्था के भी खिलाफ है - हमारे द्वारा प्रस्तावित कानून सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा समर्थित दोनों (जमीदारों का राज एवं विदेशी राज) व्यवस्थाओं से बेहतर है।
.
1870 से 1947 के दौर में सभी स्वतंत्रता सेनानी गोरो के राज से नफरत करते थे, किन्तु उनमे से भी ज्यादातर स्वतंत्रता सेनानी गोरो से भी ज्यादा घृणा देशी राजाओं एवं जमीदारों के शासन से करते थे !! और इस वजह से उन्होंने कई अवसरों पर गोरो के खिलाफ लड़ाई में राजाओं एवं जमींदारो का साथ नहीं दिया !!
.
और गोरो को भगाने के आन्दोलन में कार्यकर्ताओ ने तब तक रुचि लेना शुरू नहीं किया था, जब तक कि अहिंसामूर्ती महात्मा सचिन्द्र नाथ सान्याल एवं अहिंसामूर्ती महात्मा चंद्रशेखर आजाद ने विकल्प के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रस्ताव नहीं किया था।
.
आज हम ठीक वैसी ही स्थिति से गुजर रहे है। हम शरद पवारो और बादलो के राज का विरोध करते है, और हम सोनिया-मोदी-केजरीवाल द्वारा प्रस्तावित रोथ्स्चाइल्ड राज के भी खिलाफ है।
.
कृषि : राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित क़ानून का सारांश :
.
(01) MSP का आवंटन गरीब एवं छोटे किसानों को पहले किया जाए -
.
किसानो को उनकी जमीन, संपत्ति आदि के आधार पर घटते क्रम में 20 समूहों में वर्गीकृत किया जाये। मतलब सबसे गरीब 5% किसान सबसे निचे, इसके बाद अगले 5% और सबसे अधिक संपत्ति धारण करने वाले किसान सबसे ऊपर के वर्ग में। MSP में सबसे पहले निचले 5% को फसल बेचने का मौका मिलेगा और उसके बाद अगले 5%, फिर अगले 5% और इसी तरह से MSP में सरकार फसल खरीदेगी। एक बार डेटा बनाने के बाद इस प्रणाली को आसानी से लागू किया जा सकता है।
.
इससे निचले वर्ग के 50% से 70% गरीब एवं छोटे किसानों को सुरक्षा मिलेगी, और अमीर किसानो का नंबर बाद में आएगा। क्योंकि हमें किसानो के नाम पर प्रकाश सिंह बादल, शरद पवार, पी चिदंबरम जैसे "किसानों" को बचाने की जरूरत नही है !!
.
मौजूदा व्यवस्था में अमीर किसान अपना घटिया माल सरकार को MSP पर बेच देते है, और छोटे किसान का नंबर नहीं आता। आरएसएस, कोंग्रेस एवं सभी राजनैतिक पार्टियाँ गरीब किसानो को यह प्राथमिकता देने के खिलाफ है !! उनका कहना है कि गरीब किसानो को कोई विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए !! या तो MSP का लाभ “सभी” किसानो को मिले, या किसी भी किसान को न मिले !!
.
(02) कृषि मंत्री को वोट वापसी पासबुक के दायरे में किया जाए । कृषि मंत्री 90 करोड़ मतदाताओ द्वारा नियंत्रित होगा।
.
(03) किसान प्रतिनिधियों की राष्ट्रिय स्तर पर 5 सदस्यीय कमेटी : कमेटी के ये सदस्य भी वोट वापसी पासबुक के दायरे होंगे लेकिन इन्हें सिर्फ किसान ही वोट कर सकेंगे, गैर किसान मतदाता नहीं। 1 एकड़ = 1 वोट, लेकिन उच्चतम सीमा 10 वोट।
.
मतलब, यदि किसी किसान के पास 1 एकड़ भूमि है तो वह 1 वोट करेगा, और 2 एकड़ होने पर 2 वोट। किन्तु 10 एकड़ से अधिक भूमि होने पर भी उसके पास अधिकतम 10 वोट ही होंगे।
.
यह कमेटी वास्तविक रूप से किसानो का प्रतिनिधित्व करेगी, और किसानो के हित में नीतियों के प्रस्ताव तैयार करके कृषि मंत्री को देगी। कृषि मंत्री कमेटी के प्रस्तावों को मान सकते है, या नहीं भी मान सकते है।
.
(04) कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग पर जूरी कोर्ट – सभी कृषि अनुबंधों के विवादों का निपटान जूरी द्वारा हो, जज द्वारा नहीं।
.
(05) प्रत्येक परिवार को 7 एकड़ भूमि या 3 लाख मूल्य की भूमि ( दोनों में से जो भी अधिक हो) रखने की छूट होगी और उन्हें इस पर कोई कर नहीं चुकाना होगा। (60 वर्ष से कम आयु पर प्रति व्यक्ति 1 एकड़, 60 वर्ष से ऊपर आयु होने पर प्रति व्यक्ति 2 एकड़)
.
इससे अधिक भूमि सालाना 1% की दर से कर योग्य होगी, किन्तु इस देय कर में से किसान को उस राशि के 20% की छूट मिलेगी, जितनी राशि की उसने खाद्य फसल बेचीं है। इस तरह 90% किसान कर के दायरे से बाहर रहेंगे और जो वास्तव में अनाज आदि उगा रहे है, उन पर भी इस कर का प्रभाव नहीं आएगा।
.
(06) गेहूँ और चावल के अनुदानों में कटौती करते हुए बाजरे, ज्वार, देसी मक्के के अनुदानों में धीरे धीरे क्रमिक रूप से वृद्धि। ताकि किसान उन्हें उगाने एवं उपभोक्ता इन्हें खाने को प्रोत्साहित हो।
.
(07) कृषि में कीटनाशक, उर्वरक, बिजली, डीजल आदि के रूप में दिए जा रहे अनुदानो की राशि को सभी 90 करोड़ मतदाताओं के खाते में सीधे जमा किया जाए।
.
(08) खाद्य अनाज के आयात और निर्यात पर उच्च आयात शुल्क। सिर्फ गंभीर कमी आने की स्थिति में ही आयात शुल्क घटाया जाये।
.
(09) 300 रू प्रति किलो से ऊपर की जिंसो (जैसे मेवे आदि) को छोड़ते हुए सभी खाद्य जिंसो की खरीद-बिक्री पर कोई कर नहीं।
.
(10) कोई भी व्यक्ति किसी भी फसल का निचे दी गयी शर्तो के अधीन असीमित भण्डारण कर सकता है :
.
(i) यदि फसल किसान ने खुद उगायी है तो कोई टेक्स नहीं ।
.
(ii) यदि किसी फसल की कीमत अमुक फसल के वार्षिक औसत मूल्य से डेढ़ गुना (150%) ज्यादा हो गयी है तो डेढ़ गुना से ज्यादा हुयी राशि का 5% मासिक टेक्स चुकाना होगा।
.
स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि, टमाटर का औसत वार्षिक मूल्य 40 रू प्रति किलो है, और यदि दाम बढ़कर 60 रू हो जाते है तो भंडारण करने वालो को कोई टेक्स नहीं देना होगा। किन्तु यदि टमाटर 90 रू किलो हो जाता है तो टमाटर का स्टॉक रखने वाले को रखे गए टमाटरो पर 1.50 रू प्रति किलो के हिसाब से मासिक कर देना होगा। इस व्यवस्था के होने से जमाखोरी की प्रवृति में कमी आएगी।
.
प्रत्येक व्यापारी को रखे गए स्टॉक की सूचना जिला रसद अधिकारी के पास सार्वजनिक करनी होगी। यदि कोई व्यापारी स्टॉक की जानकारी छिपा रहा है तो सही सूचना देने वाले व्यक्ति को कुछ मात्रा में पारितोषिक मिलेगा, और रसद अधिकारी व्यापारी पर आर्थिक दंड लगा सकता है।
.
यह कुछ मोटे बिंदु दिए है । हम जल्द ही इसका पूरा ड्राफ्ट सार्वजनिक करेंगे।
.
=========