> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-09-18

Pawan Jury BhilwaraRj

(A) स्वामी विवेकानंद जी की अधिकृत बायोग्राफी के अनुसार -- स्वामी विवेकानंद जी ने गौ-मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति अभिन्न अंग बताया था और इस तरह गौ मांस सेवन का समर्थन किया था !!
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मैं वेदों का मर्मग्य नहीं हूँ। किन्तु जो वेद मैंने पढ़े है उनमें इस तरह के कोई प्रमाण नहीं मिलते। मुझे अपने जीवनकाल में भी ऐसा कोई संत / महात्मा नहीं मिला जिसने कहा हो कि, गौ मांस सेवन वैदिक संस्कृति का अंग था।
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मैं गौ मांस को लेकर दिए गए विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों से असहमत हूँ और विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों की निंदा करता हूँ।
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(B) जब भी मैं RSS के कार्यकर्ताओं से पूछता हूँ कि, क्या आप विवेकानंद जी के इन वक्तव्यों का समर्थन करते है ?, तो RSS के कार्यकर्ता निम्नलिखित तरीके से पेश आते है :
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(01) RSS कार्यकर्ता : देखिये, कौन आदमी क्या खाता है, और क्या नहीं खाता है, यह अलग बात है।
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मैं : कौन आदमी घर में बैठकर क्या खाता / नहीं खाता है, यह एक अलग बात है, किन्तु कोई व्यक्ति "सार्वजनिक" रूप से समाज को क्या खाने का सन्देश देता है, यह बिलकुल ही अलग बात है। आप इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए इन दो अलग चीजो को आपस में मिक्स कर रहे है।
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मेरा प्रश्न है कि क्या आप विवेकानंद के गौ मांस सेवन का समर्थन करने वाले इन वक्तव्यों का समर्थन करते है या नहीं !!
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(02) RSS कार्यकर्ता : क्या आप जानते है विवेकानंद जी कितने महान संत थे !! आप उनके महान कार्यो को देखिये, उनमें कमी मत निकालिए
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मैं : विवेकानंद जी महान थे या नहीं थे यह अलग विषय है। मैंने उनकी महानता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मैंने इतना कहा है कि, मैं विवेकानंद जी के इस वक्तव्य से असहमत हूँ कि - गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था।
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और मैं अपनी असहमति सार्वजानिक रूप से प्रकट कर रहा हूँ।
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आपका इस वक्तव्य पर क्या रूख है ? क्या आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(03) RSS कार्यकर्ता : विवेकानंद जी बंगाली थे, और शायद आपको नहीं पता कि बंगाली संस्कृति में मांस-मछली आदि का सेवन किया जाता रहा है !!
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मैं : आप फिर से इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए मांस एवं गौ मांस को मिक्स कर रहे है !! मैं यहाँ पर मांस की बात नहीं कर रहा हूँ, बल्कि गौ मांस की बात कर रहा हूँ। विवेकानंद जी ने गौ मांस भक्षण को वैदिक संस्कृति से जोड़ कर गौ मांस को प्रमोट किया था। और उन्होंने यह तब किया था, जब पूरे देश में गौ हत्या रोको आन्दोलन चल रहा था !!
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तो यहाँ पर यह मुद्दा नहीं है कि विवेकानंद जी मांस खाते थे या नहीं खाते थे, बल्कि मुद्दा यह है कि उन्होंने गौ मांस को वैदिक संस्कृति से जोड़ कर दिखाया !!
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क्या आप मानते है कि, गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था ? क्या आप विवेकानन्द जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(04) RSS कार्यकर्ता : आप हिन्दू धर्म को बदनाम करने का षड्यंत्र कर रहे हो !!
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मैं : अब आप इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए विवेकानंद जी को हिन्दू धर्म का पर्याय ठहरा रहे हो। हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र माना गया है और गौ मांस सेवन त्याज्य है। किन्तु विवेकानंद जी ने कहा कि, वैदिक काल में गौ मांस भक्षण की परम्परा थी !!
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उन्होंने यह भी कहा कि, - वैदिक काल में ऐसा कोई ब्राहमण न हो सकता था जो गौ मांस न खाता हो !!
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विवेकानंद जी का यह वक्तव्य हिन्दू धर्म के खिलाफ है, और चूंकि मैं एक हिन्दू हूँ अत: मैं विवेकानंद जी के इस वक्तव्य की निंदा करता हूँ !! क्या आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करते है ?
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(05) RSS कार्यकर्ता : विवेकानंद जी अंतराष्ट्रीय संत थे। तुम्हारे जैसे टुच्चे लोगो की हैसियत नहीं है कि, उनकी बातों को समझ सके !!
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मैं : कुल मिलाकर, आप विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध नहीं करेंगे कि, गौ मांस भक्षण वैदिक संस्कृति का अंग था !! कृपया मुझे बताइये कि , आपको विवेकानंद जी के इस वक्तव्य से असहमत होने में क्या आपत्ति है !!
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(06) RSS कार्यकर्ता : मुझे आपकी नियत पर शक है !! आप हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए ये कहानियाँ गढ़ रहे है !!
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मैं : दरअसल, मैं RSS=BJP से 15 वर्ष तक जुड़ा रहा हूँ। मैंने RSS द्वारा विवेकानंद जी पर आयोजित कई गोष्ठियों को सुना है, और विवेकानंद जी के चित्र पर कई बार फूल, मालाएं चढ़ाई है !! RSS के पदाधिकारियों ने विवेकानंद जी के बारे में यह महत्त्वपूर्ण बात मुझसे वर्षो तक छिपाए रखी, और इस सूचना को छिपा लेने के कारण मैं इस गफलत में रहा कि स्वामी विवेकानंद गौ हत्या के खिलाफ थे !!
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तो मैं यह सूचना नागरिको को इसीलिए देता हूँ, क्योंकि पेड मीडिया एवं आरएसएस के नेता यह सूचना नागरिको से छिपा रहे है !! कोई व्यक्ति स्वामी विवेकानंद जी का पसंद करे या नापसंद करे, इससे मुझे कोई सरोकार नहीं है। किन्तु मेरा मानना है कि नागरिको को यह सूचना दी जानी चाहिए कि विवेकानंद जी के गौ रक्षा के बारे में क्या विचार थे। और फिर व्यक्ति तय कर सकता है की, उसे विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करना है या नहीं।
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(07) RSS कार्यकर्ता : यह सरासर गलत आरोप है कि, स्वामी विवेकानन्द जी ने गौ हत्या समर्थन किया था। उन्होंने कभी भी गौ हत्या का समर्थन नहीं किया !!
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मैं : यदि कोई व्यक्ति गौ मांस सेवन का सार्वजनिक रूप से समर्थन करेगा तो नतीजे में गौ मांस खाने वालो संख्या बढ़ेगी और इस वजह से ज्यादा गौ कशी होगी। गाय का मांस सस्ता है, और मांस होने के कारण यह पोषक भी है। किन्तु तब भी हिन्दू गाय इसीलिए नहीं खाते है क्योंकि हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र एवं पूजनीय माना गया है। ट्रेक्टर, रासायनिक खाद आदि के आने बाद सिर्फ धार्मिक वजह के कारण ही गौ वंश की रक्षा हो रही है।
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यदि कोई हिन्दू संत आकर हिन्दुओ को कहता है कि हिन्दू धर्म में गाय खाना निषिद्ध नहीं है तो गौ मांस न खाने की वजह ख़त्म हो जायेगी और बड़े पैमाने पर हिन्दू युवा गाय खाने लगेंगे !! और इस वजह से गौ हत्या में विस्फोटक वृद्धि होगी !! तो जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से गौ मांस सेवन का समर्थन करता है तो इसका एक अनिवार्य असर यह है कि गौ हत्या में वृद्धि होगी।
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इस तरह, गौ मांस भक्षण को प्रमोट करना और गौ हत्या को प्रमोट करना एक ही सिक्के के दो पहलू है।
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(08) RSS कार्यकर्ता : तुम कुछ भी बकवास करते रहो, विवेकानंद बहुत महान संत थे और महान रहेंगे !!
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मैं : मूल विषय से ध्यान हटाने के लिए आपने फिर से बात “महानता” वाले खांचे में डाल दी है। मैं यहाँ विवेकानंद की महानता को चुनौती नहीं दे रहा हूँ। आप विवेकानंद को महान बताइये, उससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है, मेरा बिंदु सिर्फ यह है कि – क्या आप विवेकानंद जी के गौ मांस सेवन के वक्तव्यों का समर्थन करते है या नहीं !! बस मुझे इस पर अपना स्टेंड बताइये !!
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(09) RSS कार्यकर्ता : अभी आपको हिन्दू धर्म एवं वैदिक धर्म में अंतर समझने की जरूरत है !! पहले हिन्दू धर्म का असली मतलब समझिये फिर बात करेंगे !!
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मैं : मुझे फ़िलहाल सिर्फ इतना समझना है कि, क्या आप विवेकानंद जी के गौ मांस सेवन के वक्तव्य का समर्थन करते है या विरोध !! बस अभी इतना ही बताइये !!
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(10) RSS कार्यकर्ता : अभी आपने आरएसएस और विवेकानंद जी को समझा नहीं है !! यदि आपको आरएसएस को समझना है तो शाखा में आइये !! जब आप शाखा में आने लगेंगे तो सब अपने आप समझ आ जाएगा !!
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जय हो !!
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(C) आप देखेंगे कि आरएसएस के अलावा किसी भी हिन्दू को आप विवेकानंद जी के बारे में यह सूचना देंगे तो वे इस वक्तव्य का बचाव करने के लिए आप पर उल्टा हमला नहीं करेंगे, और न ह आपको गालियाँ देंगे । बल्कि वे इस आशय का प्रश्न करते है कि, क्या सच में विवेकानंद जी ऐसा कहा था, और यदि कहा था तो हिन्दू धर्म के खिलाफ ऐसा बयान देने के पीछे वजह क्या थी, आदि आदि !!
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दुसरे शब्दों में, एक गैर आरएसएस हिन्दू कार्यकर्ता इसके पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश करता है और जब उसे मालूम होता है कि, विवेकानंद ने ऐसा कई अवसरों पर एलानिया कहा था तो वह विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध करता है !! वह गौ मांस सेवन का बचाव करने के लिए विवेकानंद का बचाव नहीं करता बल्कि विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध करता है !!
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किन्तु आरएसएस के कार्यकर्ता हमेशा कोई न कोई तर्क देकर विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का बचाव करते है, और यह साबित करने की कोशिश करते है कि तुम्हे विवेकानंद जी की समझ पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है !! यदि उन्होंने कहा है कि गौ मांस खाना वैदिक संस्कृति का हिस्सा रहा है, तो या तो इसे मान लो, या फिर इस मुद्दे पर चुप रहो !! यदि तुम इस विषय को उठाओगे तो हम तुम्हे ट्रोल करेंगे और गालियाँ देंगे !!
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तो यह एक बड़ा फर्क है, हिन्दू और राजनैतिक हिन्दू में !! आरएसएस का कार्यकर्ता कभी भी एक हिन्दू नहीं होता, वह हमेशा एक राजनैतिक हिन्दू होता है !!
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जहाँ तक मैं देखता हूँ, आरएसएस कार्यकर्ताओ द्वारा विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का समर्थन करने की निम्न वजहें है :
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(C1) मोदी साहेब विवेकानंद जी के घोर प्रशंषक रहे है, और मोदी साहेब ने भी अपने जीवन में कभी भी विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का विरोध नहीं किया है !! आरएसएस के कार्यकर्ता मोदी साहेब के खिलाफ नहीं जा सकते अत: यह एक बड़ी वजह है कि आरएसएस के कार्यकर्ता विवेकानंद जी के इस वक्तव्य का बचाव करते है !!
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(C2) विवेकानंद जी का हमेशा से आरएसएस में काफी क्रेज रहा है। आरएसएस के कार्यालयों में आपको इनके काफी चित्र वगेरह मिलेंगे। आरएसएस के कार्यकर्ता अब इस तथ्य को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहते कि वे एक ऐसे संत को प्रचार करते आये है जिसने गौ मांस सेवन का समर्थन किया था !!
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(C3) आरएसएस में अनुशासन का काफी महत्त्व है, और संगठन द्वारा दी गयी लाइन से आगे जाकर कोई राय बनाने को काफी हिकारत की दृष्टी से देखा जाता है। आरएसएस के शीर्ष नेताओं एवं पदाधिकारियो की लाइन है कि विवेकानंद जी सबसे महान संत थे, अत: आरएसएस के कार्यकर्ता इस लाइन के खिलाफ जाने से कतराते है !!
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(C4) आरएसएस में लगातार ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ रही है, जो खुले आम गौ मांस भक्षण का समर्थन करते है। अत: आरएसएस के ग्रास रूट वर्कर्स इस बिंदु पर खामोश रहने के लिए बाध्य है।
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विवेकानंद जी पर एक पोस्ट यह भी देखें –
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3234785646639649>;
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