> Facebook Archive | Pawan Jury BhilwaraRj | 2020-09-05

Pawan Jury BhilwaraRj

मोदी साहेब के YouTube वीडियो पर इतने सारे डिसलाइक क्यों आ रहे हैं ?
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यह सामान्य समझ का विषय है कि, यू ट्यूब पर रखे गए किसी भी वीडियो पर कितने लाइक / डिस लाइक आयेंगे इसे निर्णायक रूप से यू ट्यूब का एडमिन तय करता है, दर्शक नहीं। और ऐसा करने के उनके पास दर्जनों तरीके है। 1 उदारहण मैंने निचे दिया है। यदि यू ट्यूब के प्रायोजक पीएम के किसी वीडियो की बेंड बजाना चाहते है तो वे इन तरीको का इस्तेमाल करेंगे :
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(i) यू ट्यूब अमुक वीडियो उन यूजर्स की न्यूज़ फीड वाल पर फेंकना शुरू करेगा जो संभावित रूप से मोदी साहेब का वीडियो डिसलाइक करने वाले है !!
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(ii) यू ट्यूब अमुक वीडियो उन यूजर्स की न्यूज फीड पर कम भेजेगा जो मोदी साहेब का वीडियो लाइक करने वाले है !!
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(iii) यू ट्यूब पीएम के वीडियो पर लाइक का अपर सर्किट लगा सकता है। अपर सर्किट लगाने के बाद जब भी कोई व्यक्ति लाइक करेगा, तब सिस्टम ऑटोमेटिक इसे समायोजित करके लाइक की संख्या घटाता रहेगा ताकि डिसलाइक की संख्या बढती रहे।
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(1) क्या यू ट्यूब ऐसे यूजर्स को चिन्हित कर सकता है ?
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देखिये, यदि यू ट्यूब राजनैतिक रूप से कीमती इस डेटा को वर्गीकृत नहीं करेगा तो यू ट्यूब बंद हो जाएगा। क्योंकि यह डेटा उसे राजनीतिक ताकत देता है, और इसी वजह से यू ट्यूब के प्रायोजक राजनेताओं की गर्दन मरोड़ कर उन्हें अपने काबू में रखते है।
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यू ट्यूब उन यूजर्स को वर्गीकृत करता है जो राजनैतिक सामग्रियों आदि के वीडियो देखते है। इन यूजर्स में से फिर यूट्यूब उस डेटा को वर्गीकृत करता है जिन्होंने मोदी / बीजेपी / आरएसएस विरोधी विचारधाराओं के यू ट्यूब चैनल्स को सबस्क्राइब किया हुआ है, और वे इन्हें देखते, लाइक करते और कमेन्ट करते है ।
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साथ ही यू ट्यूब के पास उन लोगो का डेटा भी है जो कोंग्रेस, कम्युनिस्ट या इसी वर्ग के चेनल्स से जुड़े है, और अमुक पार्टियों को सकारात्मक रूप से पेश करने वाले वीडियो आदि को लाइक, शेयर, फोरवर्ड करते है। यूट्यूब इन यूजर्स की फेसबुक, व्हाट्स एप आई डी से भी समायोजित करता है, ताकि और भी सटीक डेटा वर्गीकृत किया जा सके। इस समायोजन के लिए यूट्यूब मुख्य रूप से इंटरनेट के खून यानी जीमेल का इस्तेमाल करता है। जरूरत पड़ने पर यूट्यूब का एडमिन ट्विटर आदि से भी डेटा मांग सकता है।
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यू ट्यूब के पास ऐसे और भी कई तरीके है जिससे वह किसी वीडियो की पहुँच बढ़ा / घटा सकता है !!
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(2) क्या डिस लाइक करने वाले SSC Railway वाले छात्र थे !!
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देखिये, इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि ये डिस लाइक असली है या नकली है !! असली बात यह है कि, यू ट्यूब यदि नहीं चाहे तो पीएम जैसे आदमी के किसी वीडियो पर लाइक से ज्यादा डिसलाइक आना मुमकिन नहीं है। मतलब यह एकदम बचकाना है। हम यहाँ पीएम के वीडियो की बात कर रहे !! मतलब सर्कस चल रहा है क्या ?
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मेरा बिंदु यह है कि, यदि ये आंकड़े सच्चे है तब भी इसे पलट कर दिखाना यू ट्यूब एडमिन के लिए बाएँ हाथ का खेल है। और जब तब यू ट्यूब के प्रायोजक नहीं चाहेंगे तब तक पीएम के वीडियो की यह दशा होने पर भी आपको यह दशा होती नजर नहीं आ सकती। यह आपको सिर्फ तब ही नजर आ सकता है जब यू ट्यूब चाहता है कि यह नजर आये !!
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उदाहरण के लिए, कोंग्रेस+विपक्ष के जितने कार्यकर्ता / समर्थक है, और जिस पैमाने पर वे आईटी सेल चला रहे है, उसके बरअक्स कथित Ssc छात्रों की कोई हैसियत नहीं है। तो कोंग्रेस+विपक्षी दल अपनी फ़ोर्स के इस्तेमाल करके पीएम के किसी भी वीडियो आदि की बैंड बजा सकते है। किन्तु वे ऐसा आज तक इसीलिए नहीं कर पाए क्योंकि यू ट्यूब के प्रायोजक ऐसा नहीं चाहते। तो यह तर्क सिरे से ही गलत है कि कोई Ssc के छात्र यू ट्यूब के एडमिन के खिलाफ जाकर पीएम के किसी वीडियो की बेंड बजा देंगे !!
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और यू ट्यूब की तरह ही, यदि ट्विटर का एडमिन ना चाहे तो 50 लाख ट्विट होने पर भी अमुक हेश टेग ट्रेंड नहीं करेगा और यह भी पता नहीं चलेगा कि किसी हेश टेग को लेकर 50 लाख ट्विट हुए है !!
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दरअसल, इस तरह की हरकतें करके पेड मीडिया के प्रायोजक युवाओं में यह गलत धारणा बनाए रखते है कि — सोशल मीडिया प्लेटफोर्म की धारा को वाकयी सोसाइटी तय करती है और इनका इस्तेमाल पीएम को झुकाया जा सकता है !!
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और इस तरह की गलत धारणा खड़ी होने से सबसे अधिक नुकसान होता है। क्योंकि इससे उन कानूनों की मांग आगे नहीं बढ़ पाती, जिन्हें लागू करके ऐसी प्रक्रिया की स्थापना की जा सके जिससे नागरिक पारदर्शी एवं अधिकृत रूप से अपनी मांग पीएम के सम्मुख रख सके !!
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(3) तो यू ट्यूब के प्रायोजक पीएम की बैंड क्यों बजा रहे है ?
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अब यह अनुमान लगाने की बात है। और हर व्यक्ति इस बारे में अपना अनुमान लगा सकता है। मेरा अनुमान इस तरह है :
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(3.1) हो सकता है मोदी साहेब चीन-पाकिस्तान-ईरान के खिलाफ युद्ध की तैयारी में ढील बरत रहे हो। तो इस तरह की हरकतें वे वार्निंग देने के लिए करते है। इतना होने से पीएम चीन के खिलाफ भारत को युद्ध को धकलने की प्रक्रिया में तेजी ले आयेंगे।
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(3.2) पीएम ने क्लाश्निकोव को भारत में राइफल बनाने की फैक्ट्री लगाने की अनुमति दी है। हो सकता है, अमेरिकी-इस्रैली कम्पनीयां भारत के राइफल बाजार पर भी कब्ज़ा करने के लिए रूस को बाहर करना चाहती हो।
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(3.3) हो सकता है, पेड मीडिया के प्रायोजक मोदी साहेब को 2024 में रिपीट नहीं करना चाहते। अत: अब वे उनका कद गिराना शुरू कर रहे है। और एवज में पेड मीडिया के माध्यम से योगी जी / शाह या केजरीवाल जी का कद बढ़ाया जाएगा।
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और भी इसी तरह की दर्जनों निहाँ-जाहिर वजहें हो सकती है।
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बहरहाल, पेड मीडिया के प्रायोजक नोटबंदी , जीएसटी एवं लॉकडाउन लगाकर मोदी साहेब की छवि को अच्छा खासा सूंत चुके है। अत: ज्यादातर सम्भावना है कि दाढ़ी बढ़वाने के बाद उन्हें रिटायर कर दिया जाए। और जल्दी ही पेड मीडिया के प्रायोजक पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए नेताओं की भक्ति करने के आदी कार्यकर्ताओ के गले भरने के लिए योगी जी / शाह या केजरीवाल जी के लॉकेट से बाजार पाट देंगे।
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HAPPY PAID MEDIA ANDHBHAKTI
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