Pawan Jury BhilwaraRj
हरियाणा सरकार का नोटबंदी / जीएसटी / लॉकडाउन से भी ज्यादा खतरनाक राईट टू रिकॉल सरपंच नामक प्रस्तावित क़ानून
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उपाय : राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का क़ानून
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RSS समर्थित हरियाणा सरकार राईट टू रिकॉल सरपंच नामक क़ानून ला रही है। दुःख का विषय है कि हरियाणा सरकार ने अभी तक (2 सितम्बर 2020) क़ानून का ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया से जो विवरण सामने आये है उससे मालूम होता है कि यह एक बैठक या हस्ताक्षर आधारित नकारने का (Negative) राईट टू रिकॉल क़ानून है।
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सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण जब रिकॉल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी, और सरपंच की कुर्सी तब तक खाली रहेगी जब तक अगला चुनाव नहीं होता !! हमारे विचार में, मतदाताओं के पास सिर्फ नकारने की प्रक्रिया होने के कारण हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तावित यह क़ानून आने से अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे प्रशासन और भी बदतर हो जाएगा।
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राईट टू रिकॉल पार्टी (RRP – Right to Recall Party) द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच एक सकारात्मक क़ानून है। हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून वोट वापसी पासबुक पर आधारित है, और इसमें सरपंच तब तक निष्काषित नहीं किया जाएगा जब तक मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच के रूप में चुन न ले। इस तरह RRP द्वारा प्रस्तावित क़ानून प्रशासन में अस्थिरता नहीं लाएगा, बल्कि सुधार लाएगा।
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#OpooseRssRtrSarpanch , #SupportRrpVvpSarpanch , #Rrp28
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इस पोस्ट में इन दोनों कानूनों के तुलनात्मक विवरण दिए गए है। इस पोस्ट को बेहतर फोर्मेट में पढ़ने के लिए पीडीऍफ़ (8 पेज) यहाँ से डाउनलोड करें – Tinyurl. Com/VvpSarpanch
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मुख्यमंत्री को ट्विट एवं पोस्टकार्ड भेजकर उनसे कहें कि - राईट टू रिकॉल सरपंच की जगह पर वोट वापसी सरपंच का क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRssRtrSarpanch
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RSS के राईट टू रिकॉल सरपंच एवं RRP के पार्टी के वोट वापसी सरपंच कानून की तुलना।
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(1) सरपंच को बदलने की प्रक्रिया की शुरुआत
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(1.1) BJP का राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून : सरपंच को रिकॉल करने की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार संयुक्त रूप से ‘ग्राम सभा’ को दिया गया है, इकाई मतदाता को नहीं। यदि किसी पंचायत की ग्राम सभा में कुल मतदाताओं के 33% मतदाता इकट्ठे होकर सरपंच के खिलाफ रखे गए अविश्वास प्रस्ताव को हाँ / हस्ताक्षर द्वारा पारित करते है तो अमुक ग्राम पंचायत में रिकॉल इलेक्शन (Recall Poll) करवाया जायेगा।
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(1.1.1) अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए गाँव के 33% मतदाताओं को इकट्ठा होना होगा। ऐसे पूर्व नियोजित जमाव के दौरान बहस बाजी से लेकर हिंसक मारपीट तक की नौबत आ सकती है। इससे गाँव में भाईचारा बिगड़ने एवं जातीय वैमनस्य आदि की घटनाए हो सकती है। (Source : Media)
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(1.1.2) गाँवों में ज्यादातर नागरिको को हस्ताक्षर करना नहीं आता है, और सरकार के पास उनके हस्ताक्षर जांचने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अत: सरपंच अविश्वास प्रस्ताव को फर्जी बताकर कोर्ट में याचिका डाल सकता है और रिकॉल प्रक्रिया ठन्डे बस्ते में जा सकती है।
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(1.1.3) चूंकि अविश्वास प्रस्ताव की विश्वसनीयता की जांच का पॉवर BDO के पास है, अत: जब सरकार को किसी सरपंच को हटाना होगा तो वे फर्जी अविश्वास प्रस्ताव पर भी रिकॉल इलेक्शन करवा सकते है, और यदि सरकार सरपंच को बनाए रखना चाहती है तो सच्ची रिकॉल याचिका को भी जाँच के नाम पर लटका कर रख सकते है।
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(1.2) RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून : कोई भी मतदाता किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर मौजूदा सरपंच को निकालने या सरपंच पद के किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए अपनी स्वीकृति दर्ज / रद्द करवा सकता है। मतदाता अपनी स्वीकृति SMS या मोबाइल एप द्वारा भी दर्ज करवा सकेगा। यदि सरपंच पद के किसी प्रत्याशी को पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 51% मतदाताओ की स्वीकृतियां प्राप्त हो जाती है, और यदि यह स्वीकृतियां मौजूदा सरपंच को प्राप्त स्वीकृतियों से अधिक भी है, तो रिकॉल ही इलेक्शन करवाया जाएगा, अन्यथा नहीं। (धारा 5.3 देखें)
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(1.2.1) मौजूदा सरपंच को निकालने एवं किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच बनाने की स्वीकृति देने के लिए मतदाता को किसी जमाव या सभा में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। मतदाता किसी भी दिन पटवारखाने में जाकर या अपने सत्यापित मोबाइल द्वारा SMS भेजकर अपनी स्वीकृति दर्ज / रद्द करवा सकता है।
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(1.2.2) मतदाता जो स्वीकृति दर्ज करेगा उसकी एंट्री वोट वापसी पासबुक में आएगी एवं उसे फीडबेक का SMS प्राप्त होगा। स्वीकृति देने के लिए मतदाता द्वारा पटवारखाने में उपस्थित होने की सत्यापित प्रणाली के कारण इसमें फर्जीवाड़े की सम्भावना बेहद कम है।
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(1.2.3) मतदाता जो भी स्वीकृति दर्ज करेंगे उन्हें पटवारी द्वारा प्रत्येक सोमवार को सार्वजनिक किया जायेगा। यदि कोई फर्जी स्वीकृति दर्ज हो गयी है तो प्रत्येक सोमवार को स्वीकृतियों के सार्वजनिक होने के कारण इसे तुरंत जांचा जा सकेगा। दोहरा सत्यापन होने के कारण यह प्रक्रिया हस्ताक्षर की तुलना में विश्वसनीय है। अत: कोई पक्षकार इसे ख़ारिज नहीं कर सकेगा
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(2) रिकॉल इलेक्शन की प्रक्रिया एवं सरपंच का निष्कासन :
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(2.1) BJP का राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून : रिकॉल इलेक्शन में वोटिंग सिर्फ इस प्रश्न पर होगी कि, मौजूदा सरपंच को हटाना चाहिए या नहीं। सरपंच पद के अन्य उम्मीदवारों के नाम मतपत्र या इवीएम पर नहीं होंगे। यदि रिकॉल इलेक्शन में पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 60% मतदाता सरपंच को हटाने के लिए वोट कर देते है तो मौजूदा सरपंच निकाल दिया जाएगा।
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(2.1.1) RSS के ड्राफ्ट में सरपंच को सिर्फ नकारने की प्रक्रिया दी गयी है, सरपंच को बदलने की नहीं। जब भी रिकॉल सफल होगा तो सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी। और कुर्सी तब तक खाली रहेगी, जब तक अमुक पंचायत में फिर से चुनाव नहीं होते, और फिर से नया सरपंच नहीं चुना जाता।
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(2.1.2) नया सरपंच चुनने के लिए बाद में फिर से चुनाव होंगे और मतदाताओं को फिर से वोट करने के लिए आना होगा।
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(2.2) RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच क़ानून : रिकॉल इलेक्शन में मतपत्र / इवीएम पर उन 10 प्रत्याशियों के नाम भी होंगे जिन्हें मतदाताओ की सबसे अधिक स्वीकृतियां मिली है। ताकि मतदाता जिसे सरपंच बनाना चाहते है उसे वोट कर सके। यदि रिकॉल इलेक्शन में किसी प्रत्याशी को पंचायत के कुल मतदाताओ के 51% मत प्राप्त हो जाते है तो मौजूदा सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और 51% वोट लाने वाला प्रत्याशी सरपंच बन जाएगा।
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(2.2.1) RRP के क़ानून में सरपंच सिर्फ तब निष्काषित होगा जब ग्राम पंचायत के मतदाताओ का बहुमत किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए वोट करें। यदि किसी भी प्रत्याशी को बहुमत नहीं मिलता, तो मौजूदा सरपंच निकाला नहीं जाएगा। इस तरह सरपंच की कुर्सी किसी भी समय खाली नहीं रहेगी।
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(2.2.2) रिकॉल इलेक्शन में ही मतदाता नया सरपंच चुन लेंगे, अत: मतदताओ को फिर से वोट करने नहीं आना पड़ेगा।
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(3) BJP के राईट टू रिकॉल सरपंच क़ानून की खामियां एवं दुष्प्रभाव
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(3.1) हरियाणा की RSS समर्थित सरकार के इस कानून के लागू होने से निम्नलिखित परिणाम आ सकते है :
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(3.1.1) पंचायतो के प्रशासन में अस्थिरता आएगी और मतदाता राईट टू रिकॉल कानूनों को एक बदतर प्रक्रिया के रूप में देखना शुरू कर देंगे।
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(3.1.2) ग्राम पंचायतो में सरपंच के राजनैतिक प्रभाव में कटौती होगी तथा इसके एवज में विधायक एवं मंत्रीयों का राजनैतिक प्रभाव ग्राम पंचायतो में बढ़ जायेगा ।
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(3.1.3) सरपंच की मौजूदा स्थिति कमजोर होगी और उस पर सरकारी नियंत्रण बढेगा। और इससे ग्राम पंचायत के मतदाताओं की शक्ति में भी कमी आयेगी।
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(4) कुछ व्यवहारिक उदाहरण
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निचे कुछ उदाहरणों द्द्वारा बताया गया है कि, कैसे BJP द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सरपंच का यह क़ानून ग्राम पंचायत में विधायको, मंत्रियों एवं सरकारी अधिकारियों की शक्ति बढ़ाकर ग्राम पंचायतो के स्थानीय कार्यकर्ताओ, मतदाताओ एवं सरपंच की स्थिति को कमजोर करके प्रशासन को बदतर बना देगा।
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(4.1) मान लीजिये कि, कोई सरपंच ईमानदार व्यक्ति है और वह विधायक के किसी गलत आदेश को मानने से इंकार कर देता है। या मान लीजिये की, सरपंच घूस के रूप में इकट्ठा की गयी राशि में से विधायक को हफ्ता देने से मना कर देता है, तो इस स्थिति में विधायक निम्नलिखित कदम उठाएगा :
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(4.1.1) विधायक गाँव के उन कार्यकर्ताओ, नेताओं एवं उम्मीदवारों से सम्पर्क करेगा, जो सरपंच बनने के इच्छुक है, या अमुक सरपंच के सामने चुनाव हार गए थे।
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(4.1.2) विधायक, ग्राम सचिव, BDO एवं तहसीलदार को भी इसी दिशा में कदम उठाने को कहेगा।
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(4.1.3) सरपंच का विरोधी यह समूह मतदाताओ नाम से झूठे-सच्चे हस्ताक्षर / बैठक करवाकर अविश्वास प्रस्ताव की याचिका BDO को भेज सकते है।
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(4.1.4) विधायक के निर्देश पर BDO सही या गलत याचिका को सही घोषित करके इलेक्शन की घोषणा कर सकता है।
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(4.1.5) यदि सरपंच न्यायालय की शरण लेता है, तो ज्यादातर मामलों में विधायक, मंत्री आदि जज को घूस / रसूख का इस्तेमाल प्रभावित कर सकते है, और जज सरपंच की अपील या तो लेगा ही नहीं या वर्षो तक लटका कर रखेगा।
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अब मान लीजिये कि, कोई सरपंच एकदम भ्रष्ट / निकम्मा हो गया है, और पंचायत के अधिकतम मतदाता सरपंच को निकालना चाहते है। किन्तु संभव है कि, सरपंच एवं विधायक के बीच काफी अच्छा गठजोड़ हो, और सरपंच जो भी गबन करता है, उसमें से एक बड़ा हिस्सा विधायक को पहुँचा देता हो, या सरपंच विधायक का ख़ास आदमी हो, और विधायक सरपंच को बनाए रखना चाहता है तो सरपंच का रिकॉल कभी नहीं हो सकेगा। कैसे ?
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क्योंकि, यदि 60% मतदाता ग्राम सभा में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर भी देते है तो विधायक BDO से कहकर अविश्वास प्रस्ताव याचिका को ठन्डे बस्ते में डलवा देगा। तब BDO याचिका की जाँच के नाम पर इसे महीनो तक लटकाकर रखेगा, या इसे फर्जी बताकर खारिज कर देगा !! और इस तरह विधायक के पसंदीदा सरपंच को रिकॉल इलेक्शन का कभी सामना नहीं करना पड़ेगा !!
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दरअसल, विधायक एवं सांसदों के चुनाव 4-5 बड़ी पार्टीयों के नाम पर होते है, किन्तु सरपंच के चुनावों में पार्टी के नाम का इस्तेमाल नहीं किया जाता। और इस वजह से सरपंचो पर बड़ी राजनैतिक पार्टियों का नियंत्रण काफी कमजोर है। सरपंच अपने स्थानीय जनाधार पर चुनाव लड़ते एवं जीतते है। न तो चुनाव लड़ने के लिए किसी पार्टी से टिकेट लेने की जरूरत होती है, और न ही चुनाव जीतने के लिए वे किसी बड़े नेता / विधायक / मंत्री पर निर्भर होते है। अब बड़ी पार्टियों के बड़े नेता सरपंचो पर अपनी पकड़ बढ़ाना चाहते है, और यह कानून उनके इस उद्देश्य को पूरा करेगा।
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हरियाणा सरकार ने जिस प्रकार की रिकॉल इलेक्शन की प्रक्रिया रखी है, उससे बड़े नेताओं की पकड़ सरपंचो पर बढ़ेगी। यदि कोई सरपंच विधायक / मंत्री से बनाकर नहीं रखेगा तो विधायक / मंत्री उस सरपंच को BDO द्वारा रिकॉल की प्रक्रिया को शुरू करने की धमकी देंगे। धीरे धीरे लगभग सभी सरपंच विधायको के पिट्ठू बन जायेंगे और मतदाताओं के हितो के खिलाफ जाकर भी विधायकों / मंत्रियो के सभी सही-गलत आदेशो का पालन करने लगेंगे।
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी क़ानून में मतदाताओं को ग्राम सभा में इकट्ठे होकर संयुक्त रूप से प्रस्ताव पास करने की जरूरत नहीं है। मतदाता अपनी वोट वापसी पासबुक के साथ किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर या SMS / APP के जरिये अपनी स्वीकृति दे सकेगा। और यदि किसी समय पंचायत के 51% मतदाता किसी अन्य प्रत्याशी को सरपंच बनाने के लिए स्वीकृतियां दे देते है तो रिकॉल इलेक्शन होगा। इस तरह RRP के वोट वापसी ड्राफ्ट में रिकॉल इलेक्शन होगा या नहीं इसका फैसला सीधे मतदाता करेंगे, BDO या सरकार नहीं।
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सार यह है कि, BJP का क़ानून सरपंच एवं मतदाताओं की शक्ति में कटौती करके विधायको / सरकार की शक्ति में इजाफा करता है, जबकि RRP का वोट वापसी ड्राफ्ट सरपंच पर सिर्फ मतदाताओं का नियंत्रण बढ़ाता है।
(4.2) मान लीजिये कि, किसी ग्राम पंचायत में 5,000 मतदाता है, और सरपंच के किसी चुनाव में 4,000 वोट गिरते है और प्रत्याशियों को निम्न वोट प्राप्त होते है :
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X – 1500 वोट
Y – 1200 वोट
Z – 1000 वोट
अन्य प्रत्याशी – 300 वोट
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इस स्थिति में X सरपंच बन जाता है। किन्तु ध्यान देने वाली बात यह है कि जो सरपंच जीता है, उसके खिलाफ कुल 1200+1000+300 = 2500 वोट गिरे है। इस तरह अमुक ग्राम पंचायत में 4000 में से 2500 मतदाता ऐसे है जिन्होंने X को सरपंच बनाने के लिए वोट नहीं किया है। और 1000 मतदाता ऐसे है जिन्होंने किसी को भी वोट नहीं किया है। और संभव है कि इन 1000 मतदाताओ में से भी कई मतदाता X के समर्थन में नहीं हो।
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BJP द्वारा प्रस्तावित क़ानून कहता है कि, यदि पंचायत के कुल मतदाताओं के 60% मतदाता रिकॉल इलेक्शन में मौजूदा सरपंच के खिलाफ वोट करते है, तो मौजूदा सरपंच निकाल दिया जाएगा।
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(4.2.1) इस स्थिति में जब अमुक पंचायत में रिकॉल इलेक्शन होगा तो चूंकि 3500 यानी कि पंचायत के 70% मतदाता मौजूदा सरपंच यानी X के समर्थन में नहीं है अत: वे X को निकालने के लिए वोट कर सकते है और इस स्थिति में सरपंच की कुर्सी खाली हो जायेगी। और तब तक खाली रहेगी, जब तक सरपंच के फिर से चुनाव नहीं होते।
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(4.2.2) जब सरपंच के दुबारा चुनाव होंगे तो ज्यादातर सम्भावना है कि फिर से X ही चुनाव जीतेगा। क्योंकि पंचायत के कुल 5,000 मतदाताओ में से 1500 मतदाता X के समर्थन में है। अत: नए चुनाव में शेष प्रत्याशियों में वोट बंट जायेंगे और सर्वाधिक वोट फिर से X को ही मिलेंगे !!
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दुसरे शब्दों में, बीजेपी द्वारा प्रस्तावित क़ानून में कोई सरपंच तब भी निकाल दिया जाएगा जब उसे सर्वाधिक मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हो। यह एक नकारात्मक प्रक्रिया है जो मतदाताओं को सिर्फ सरपंच नकारने का अधिकार देती है।
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इसके उलट RRP द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी क़ानून में सरपंच सिर्फ तब निष्काषित होगा, जब कम से कम 51% मतदाता किसी अन्य व्यक्ति को सरपंच बनाने के लिए वोट करें। यदि मतदाता किसी अन्य प्रत्याशी को बहुमत नहीं देते तो मौजूदा सरपंच रिकॉल नहीं होगा, और कुर्सी खाली नहीं होगी। क्योंकि RRP के वोट वापसी क़ानून में सकारात्मक प्रकिया है।
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राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित वोट वापसी सरपंच का कानून ड्राफ्ट यहाँ देखें – <https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/3174296922688522>
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो मुख्यमंत्री को एक पोस्टकार्ड भेजे। पोस्टकार्ड में यह लिखे :
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मुख्यमंत्री जी, राईट टू रिकॉल सरपंच की जगह पर वोट वापसी सरपंच का क़ानून गेजेट में छापें - #SupportRrpVvpSarpanch , #OpposeRssRtrSarpanch
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