Pawan Jury BhilwaraRj
Piyush Jain:
कैसे निजीकरण का एकाधिकार राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की क्षमता को घटाता है??
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मान लीजिये एक रेलवे स्टेशन है और वहां 100 दुकानों के लिए ख़ाली निर्धारित स्थान है और मान लीजिये विक्रेता के लिए सभी निर्धारित स्थानों का मूल्य एक समान है अर्थात किसी भी विक्रेता के लिए, वह किसी भी ख़ाली निर्धारित स्थान के लिए एक जैसा किराया देगा |
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(a)स्टेशन मास्टर ने किराया प्रति महिना 10000 रूपये रखने का फैसला लिया और आवेदको की संख्या 110 हैं |
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(b)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 13000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 90 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 90 x रु.13000= रु. 11,70,000 प्रति महिना होगा
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(c)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 12000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 95 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 95 x रु.12000= रु. 11,40,000 प्रति महिना होगा
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(d)और अब उसने किराया बढ़ाकर प्रति महिना 11000 रूपये रखने का फैसला किया और उसने पाया कि अब सिर्फ 100 आवेदक ही है | ऐसे में कुल किराया = 100 x रु.11000= रु. 11,00,000 प्रति महिना होगा
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मालिक के लिए सबसे उत्तम विकल्प कौन सा है ? विकल्प (b)!!
समाज के लिए सबसे उत्तम विकल्प कौन सा है ? विकल्प (d)!!
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मान लीजिये रेलवे स्टेशन के खर्चें देने के बाद भी शेष किराया यदि नागरिकों में समान वितरण कर दिया जाए तब भी विकल्प (d) समाज के लिए सबसे उत्तम होगा क्योंकि यह प्रतिस्पर्धा, रोजगार, कुल उत्पादन आदि को बढ़ाएगा |
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इसलिए हर निजी कंपनी विकल्प (b) को चुनेगी ना कि विकल्प (d) को |
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इसलिए आप एयरपोर्ट पर कॉफ़ी महंगी पाते है और इतनी बड़ी जगह ख़ाली होते हुए भी | निजी कंपनी जो एयरपोर्ट पर रखरखाव का काम देखती है, जानबूझकर रिक्त स्थान अनावंटित रखती है जिससे कि दुकानों के लिए निर्धारित स्थानों की संख्या कम से कम रहे और ज्यादा से ज्यादा किराया वसूला जा सके!! समाज के लिए ये हर तरह से हानिकरक स्थिति है| अधिक से अधिक ग्राहको का अपने घर से खाना लाना, अक्षमता बढ़ाएगा और एयरपोर्ट पर रोजगार उच्चतम से नीचे होगा |
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लेकिन यदि कंपनी सरकार के स्वामित्व की है और नागरिको के पास राईट टू रिकॉल/ और शीर्ष लोगो /स्टाफ के ऊपर जूरी का अधिकार है तब नागरिक उस शीर्ष अधिकारी या स्टाफ को विकल्प (d) के लिए मजबूर कर सकते है |
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अब यहाँ, एकाधिकार रेलवे स्टेशन या लाल किला या ताज महल किसी प्राइवेट कंपनी के द्वारा नहीं बनाया गया है | वास्तव में, पेटेंट को छोड़कर, ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे प्राइवेट कंपनी एकाधिकार लम्बे समय तक बरक़रार रख सके क्योंकि उस कंपनी के कर्मचारी स्वयं नौकरी छोड़कर जल्द ही नए सप्लायर बन जाएंगे !!
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ताजमहल या लाल किला जैसे एकाधिकार एतिहासिक घटनाओं के कारण या शायद गलत इतिहास के कारण अस्तित्व में हैं | रेलवे स्टेशन जैसे एकाधिकार सरकारी शक्ति द्वारा रेलवे चलाने के लिए भूमि अधिग्रहण करने के लिए बनाये गए है | रेलवे स्टेशन या ताज महल, माइक्रोसॉफ्ट जिसका कभी ऑपरेटिंग सिस्टम में एकाधिकार हुआ करता था,जैसी कंपनियों की तरह किसी निजी व्यक्ति का परिश्रम या जोखिम से नहीं बनाए गए हैं |
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तो जब ऐसे एकाधिकारों का निजीकरण होता है, इनका मालिक अधिक से अधिक लाभ कमाता है जबकि इसमें पूर्व या वतर्मान के लोगों का योगदान रहा हो |
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हम देख रहे है कि आईटीसी, डालमिया आदि जैसी कंपनिया इन एकाधिकार वाले व्यवसायों में छलांग मारने को बहुत उत्सुक है | वे दावा करते हैं कि उनके पास सरकारी क्षेत्रों के मुकाबले अधिक टैलेंट है और वे इन एकाधिकारों को सँभालने का काम बेहतर कर सकते हैं | अच्छा, तो क्यों ये कंपनियां अपने टैलेंट का इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक, गूगल आदि बनाने में नहीं करती ?
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बात साफ़ है, इन कंपनियों के पास ना ज्यादा मेरिट/ टैलेंट है | ये सिर्फ मंत्रियों, अधिकारीयों और जजों को रिश्वत खिलाने में और अपनी तंत्र चलाने में और बिकाऊ मीडिया से चुप्पी खरीदने में अव्वल है |
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क्या कोई व्यक्ति लाल किले के लिए बोली लगा सकता है ?
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नहीं | कोई भी लाल किले आदि पर होटल और भोजनालय बनाकर एक बड़ा मुनाफा बना सकता है | लेकिन ये सभी एतिहासिक धरोहर है और इसलिए इनकी जमीन का व्यावसायिक उपयोग कागजों पर प्रतिबंधित है | तो केवल वही व्यक्ति जो इस कॉन्ट्रैक्ट को बदलने और इसके बाद उससे बच निकलने के योग्य है, एक बड़ा मुनाफा बना सकता है | दुसरे शब्दों में, यदि एक बोली लगाने वाले के पास जजों, अधिकारीयों, बिकाऊ मीडियावालों आदि से गहरे संबंध है तब वह जमीन का व्यावसायिक उपयोग कर सकता है और बचकर निकल सकता है| लेकिन जिस व्यक्ति के ऐसे संबंध नहीं है वह इतना बड़ा मुनाफा नहीं कमा पायेगा | तो जब एकाधिकार बोली के लिए रखे जाते हैं, धनिक जिसके पास ऐसे जघन्य संबंध है, ऊँची बोली लगा पाएंगे |
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अब सोनिया-मोदी-केजरीवाल (सब एक ही हैं, ये सभी विदेशी मालिकों की कठपुतलियां हैं) और कांग्रेस-संघ-आप के कार्यकर्ता ( फिर से सब एक ही हैं, ये राजनीती में सिर्फ पैसा बटोरने के लिए है), लाल किला, ताजमहल, सभी रेलवे स्टेशन आदि को निजी हाथों में देने के लिए बहुत उत्सुक है | ये सिर्फ जोर से चिल्लाना जानते है कि सरकारी कर्मचारी निकम्मे हैं और लापरवाह है और इसलिए निजीकरण जरुरी हैं | इनका अंतिम लक्ष्य सभी एकाधिकार संपत्तियों को विदेशी कंपनियों को देना है | क्यों? अमेरिका ब्रिटेन के धनिकों के पास मीडिया है और ये धनिक देश में परिवर्तन लाने के लिए विकल्प के रूप में सोनिया-मोदी-केजरीवाल और कांग्रेस-संघ-आप को ही दिखाने का वादा करते हैं यदि सोनिया-मोदी-केजरीवाल और कांग्रेस-संघ-आप अर्थव्यवस्था के सभी बड़े क्षेत्रों को एक के बाद एक विदेशी धनिकों को सौपतें है |
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समाधान?
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प्रस्तावित समाधान – कार्यकर्ताओं को मंत्रियों के ऊपर राईट टू रिकॉल कानूनी ड्राफ्ट और सरकारी करमचारियों के ऊपर जूरी सिस्टम कानूनी ड्राफ्ट लाने के लिए कार्य करना चाहिए | हम “राईट टू रिकॉल मंत्री” का ड्राफ्ट अपलोड करने की तैयारी में है| लेकिन जब तक आप, यदि चाहे तो राईट टू रिकॉल आन्दोलन की सहायता राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री ड्राफ्ट का समर्थन करके, कर सकते हैं |
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राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री ड्राफ्ट की लिंक -- <https://newindia.in/causes/rtrpm2>
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प्रस्तावित ड्राफ्ट का विवरण--<https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10154897547041922>
- https://l.facebook.com/l.php?u=https%3A%2F%2Fnewindia.in%2Fcauses%2Frtrpm2&h=AUBMCccNu5Wae-pbeUDsqO2vmBt_87KydDulJecy6oSe0BRms0KOzH3JLW_GWXO_QXmOn2TUdmLKxy2EqIaWKucfxpz_ePeMI3ZZA-QcjxafaIkojDRnbcP9znnpAwQP8vTOnmSVHW-_2n4am-oYzoX4ryZpnzgadXO2SPpXgS3qR8Cf&s=1
- https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10154897547041922