Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब समेत संघ के सभी नेता , एवं सोनिया-केजरीवाल-मुलायम-ममता आदि "राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" क़ानून के विरोध में क्यों है ?
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हिन्दू धर्म की धार्मिक संस्थाओ जैसे मंदिर / मठ / आश्रम आदि का प्रशासन इसाई एवं मुस्लिम धर्म की संस्थाओ की तुलना में कमजोर है। हमने SGPC act की तर्ज परहिन्दू धर्म की संस्थाओ का प्रशासन बेहतर बनाने के लिए "राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" का प्रशासनिक ढांचा प्रस्तावित किया है। इस क़ानून के आने से मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो जायेंगे और इन पर हिन्दू श्रधालुओ का नियन्त्रण रहेगा।
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ट्रस्ट के गठन के लिए हिन्दुओ की अलग से अतिरिक्त वोटर लिस्ट होंगी तथा अमुक ट्रस्ट के ट्रस्टी हिन्दुओ द्वारा चुन कर आयेंगे। यदि ट्रस्टी अकार्यकुशलता दिखाते है , प्राप्त दान का कल्याणकारी कार्यो में समुचित उपयोग नहीं करते, धर्म को मजबूत बनाने एवं इसके प्रसार के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाते है तो हिन्दू नागरिको के पास यह अधिकार होगा कि अपने बहुमत का प्रदर्शन करके उन्हें किसी भी समय पद से निष्कासित कर सके , एवं अन्य किसी काबिल व्यक्ति / संत / गुरु / प्रशासक को चुन सके। इस प्रक्रिया का प्रस्तावित ड्राफ्ट ( रोड मेप ) निचे दिए गए लिंक में दिया गया है। यदि पीएम इस पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में छपवा दे तो यह क़ानून लागू हो जाएगा।
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"राष्ट्रीय सनातन देवालय प्रबंधक ट्रस्ट" के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/838551942989668>
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हम यह ड्राफ्ट मोदी साहेब एवं संघ के को कई बार भेज चुके है। किन्तु वे इसके विरोध में है। उन्हें भय है कि इससे हिन्दुओ का नेतृत्व उनके हाथ से निकल जाएगा। वे धर्म के उत्थान के लिए अलग से किसी संस्था / नेता को पनपने नहीं देना चाहते। उनका मानना है कि हिन्दुओ को राजनैतिक रूप से संघ के निचे ही संगठित रहना चाहिए किसी अन्य धार्मिक संस्था के अंतर्गत नहीं। उनका कहना है कि यदि हिन्दूओ को हिन्दू धर्म के उत्कर्ष के लिए अन्य कोई विकल्प मिल गया तो वे हिन्दू धर्म को बचाने के लिए उनके एक मात्र विकल्प संघ की और दौड़ लगाना बंद कर देंगे और उन्हें वोटो की हानि होगी।
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कोंग्रेस एवं आम पार्टी मिशनरीज एवं इस्लाम के प्रयोजको पर बुरी तरह से निर्भर है। चूंकि इस क़ानून के आने से हिन्दू धर्म मजबूत होगा और इस्लाम एवं इसाई धर्म के भारत में बढ़ते गैर वाजिब प्रभाव में कमी आएगी अत: कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी इस क़ानून का विरोध कर रहे है। कोंग्रेस को लगता है कि इस क़ानून के आने से मोदी जी / योगी जी / तोगड़िया जी जैसे नेता ही इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी चुन लिए जायेंगे और इस वजह से कोंग्रेस के सत्ता में आने बावजूद वे हिन्दू धर्म को नुकसान पहुंचाने की क्षमता खो देंगे।
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मिशनरीज द्वारा प्रायोजित मीडिया इसका विरोध इसीलिए करता है कि इस क़ानून के आने से मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो जायेंगे और वे मंदिरों में आये हुए दान का इस्तेमाल मिशनरीज की गतिविधियाँ बढाने में नहीं कर पायेंगे। अभी मंदिर सरकार के नियंत्रण में होने के कारण वे नेताओं को प्रलोभन देकर / दबाव बनाकर मंदिरों में आये दान का मनमाना इस्तेमाल कर पाते है। इस क़ानून के आने से वे सरकार एवं अदालत के जरिये मंदिरों पर अपना नियंत्रण खो देंगे।
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