Pawan Jury BhilwaraRj
१) चित भी मेरी पट भी मेरी , और अंटा मेरे बाऊजी का
२) रहजनो से तो भाग निकला था , अब मुझे रहबरों ने घेरा है
.
चित भी मेरी पट भी मेरी ,
और अंटा मेरे बाऊजी का
.
मोदी साहेब , येदुरप्पा और अमित शाह को छोड़कर पूरा देश जानता था कि बीजेपी के पास आवश्यक संख्या नहीं है। लेकिन उन्होंने फिर भी सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनकी योजना थी कि विधायको को पैसा फेंककर अपने पाले में मिला लिया जाएगा। कोंग्रेस / जेडीएस के विधायक दूध के धुले तो है नहीं , सबके पास अपार बेनामी संपतियां है जो उन्होंने भ्रष्टाचार करके खड़ी की है , कई पर अदालतों में मामले चल रहे है , तो जो पैसे से नहीं आएगा उन्हें सीबीआई या आयकर रेड की धमकी देकर अपनी तरफ खींच लिया जाएगा। सिर्फ इसी वजह से उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। और उन्होंने इसके लिए खरीद फरोख्त शुरू भी की।
.
प्रत्येक विधायक को 20 करोड़ तक का ऑफर दिया गया, और कुछ को टोकन पेमेंट कर भी दी गयी थी। लेकिन भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी समय सीमा को 15 दिन से समेट कर सिर्फ 1 दिन तक सीमित कर दिया था। तो बिकने वाले और खरीदने वाले दोनों ही तालमेल नहीं बिठा पाए। नतीजा -- येदुरप्पा को सदन में पहुच कर मालूम हुआ कि, अरे हमारे पास तो बहुमत ही नहीं है !! जाहिर है , संघ के नेताओं ने विधायको को खरीदने के लिए अपने सारे घोड़े खोल दिए थे। पर मामला बैठा नहीं।
.
लेकिन नतीजा आते ही अब संघ के कार्यकर्ताओ ने बिजली की गति से अपना स्टेंड बदल लिया है। संघ के कार्यकर्ता अब कह रहे है -- "संघ ईमानदारी पार्टी है , और हम विधायको की खरीद फरोख्त नहीं करते" !! इन्हें दोनों हाथों में लड्डू चाहिए !!! संघ के कार्यकर्ता इस संदेह में गिरफ्तार है कि देश में अनाज सिर्फ वे ही खा रहे है , शेष भारत तो मैदान में जाकर घास चर आता है। विधायको को खरीद कर सरकार बनाते ही ये लोग तुरंत "लोकतंत्र की जीत" की पुकारा लगाने लगते , और अब नैतिकता के एलान दे रहे है !!! चित भी मेरी पट भी मेरी , और अंटा मेरे बाऊजी का !!! संघ के कार्यकर्ता कलाबाजी दिखाने में अब बिलकुल नए स्तर को छू रहे है।
.
-----------
.
रहजनो से तो भाग निकला था ,
अब मुझे रहबरों ने घेरा है
.
यह कहने की जरूरत नहीं है कि, यदि संघ की जगह कोंग्रेस को इतनी सीटे मिलती तो वे भी सरकार बनाने का दावा पेश करते और संघ के विधायको को खरीदने के लिए आकाश को पाताल से मिला देते। उनको मौका नहीं मिला तो अभी वे सफेदपोश बनकर गर्दने चला रहे है। इस तरह का गुल गपाड़ मचाने में कोंग्रेस कितनी हुनरमंद है यह बात देश से छुपी हुयी नहीं है l
.
बहरहाल कोंग्रेस / जेडीएस के लिए सरकार बनाने में अब कोई बाधा नहीं है। लेकिन चिंता का विषय यह है कि कर्नाटक को अब जेडीएस और कोंग्रेस का शासन झेलना पड़ेगा। शासन के स्तर पर कोंग्रेस=बीजेपी=जेडीएस में कोई अंतर नहीं है। और कर्नाटक के लोगो ने कोंग्रेस को इस बात के वोट नहीं दिए थे कि वे जेडीएस के साथ सरकार बना ले, और न ही जेडीएस के मतदाताओ ने उन्हें कोंग्रेस से गठबंधन के लिए वोट किये थे। पर नारा यह है कि जो भी जैसे तैसे जीत जाए उसी तरफ लोकतंत्र की जीत दिखा दी जाती है।
.
तो यह कुश्ती अच्छे और बुरे विकल्प के बीच नहीं थी। यह लड़ाई 3 बदतर लोगो के समूहों के बीच थी। सरकार कोई भी बनाए , शासन बदतर ही मिलेगा। और ख़ास तौर पर तब जब जनता की इसमें कोई भागीदारी न हो।
.
यदि नागरिको को यह अधिकार दे दिया जाए कि वे अपने राज्य का मुख्यमंत्री सीधे चुन सके , तो इस सर्कस का अंत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री का सीधा चुनाव होने से जनता यह तय कर सकेगी कि उनके प्रदेश का सीएम कौन होगा। और असली तमाशा तो अब शुरू होगा। अब कोंग्रेस+जेडीएस उसी बदतर ढंग से शासन करेंगे जिस तरह से करते आये है , और कर्नाटक के मतदाताओ को इसे भुगतना होगा। क्योकी उनके पास 5 साल से पहले इन्हें बदलने का अधिकार नहीं है।
.
हमारा प्रस्ताव है कि भारत में राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री का क़ानून लागू किया जाए। इसके लिए प्रस्तावित प्रकिया यहाँ देखें -- <https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859860654192130>
.
इस बात पर विशेष रूप से ध्यान दें कि संघ, कोंग्रेस , जेडीएस एवं आम आदमी पार्टी के सभी कार्यकर्ता इस क़ानून का विरोध कर रहे है। क्यों कर रहे है ? वजह आप उन्ही से पूछे !!
.
"वेल्थ टेक्स पार्टी"
.
==========