Pawan Jury BhilwaraRj
राहुल गांधी ने राईट टू रिकॉल का समर्थन किया है !! उनका लक्ष्य वही है जो संघ=बीजेपी और केजरीवाल का है --- वे राईट टू रिकॉल मूवमेंट को हाईजेक करके इसे ख़त्म करने का प्रयास कर रहे है।
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हम सभी को मालूम है कि राहुल गाँधी जैसे भ्रष्ट नेता से राईट टू रिकॉल कानूनों के समर्थन की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन राईट टू रिकॉल के बढ़ते हुए समर्थको की संख्या देखते हुए राहुल गांधी ने यह बयान दिया है। वे चाहते है कि राईट टू रिकॉल के समर्थक उनका मौखिक बयान सुनकर उनके पाले में आ जाये। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि राईट टू रिकॉल के सच्चे समर्थक बयानों में नहीं मानते , बल्कि सिर्फ ड्राफ्ट में मानते है। और उन्होंने राईट टू रिकॉल के लिए कोई ड्राफ्ट नहीं दिया है। मतलब साफ़ है कि वे कार्यकर्ताओ को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे है। राहुल गांधी समझते है कि राईट टू रिकॉल के कार्यकर्ता भी कोग्रेस के नारेबाज कार्यकर्ताओ की तरह ठस बुद्धि है !! राहुल गांधी को समझना चाहिये कि रिकालिस्ट नरेंद्र मोदी के भाषणों तक की चपेट में नहीं आते, तो उनकी लपेट में कैसे आयेंगे। बहरहाल, राईट टू रिकॉल के फर्जी समर्थको की सूची में आज से राहुल गांधी का भी नाम शरीक हो गया है।
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राहुल गांधी ने कहा --- "पंचायती राज की धारा 40 के तहत चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का जनता को अधिकार मिला हुआ है. यह नियम सांसद, विधायक, प्रधानमंत्री पर क्यों नहीं लागू होता ? पंचायती राज के नेताओं पर यह लगाना चाहते हैं तो पीएम पर क्यों नहीं लगाते? हमारी पूरी कोशिश होगी, जितनी भी शक्ति आपको दे सकें, देंगे"
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ये बात समझ नहीं आ रही है कि यह प्रश्न राहुल पूछ किससे रहे है ? अरे, 2004 से 2014 तक आप सत्ता में रखकर चंगा पौ खेल रहे थे क्या ? विपक्ष में आते ही आपको राईट टू रिकॉल पीएम की जरूरत महसूस होने लगी। आपकी मंशा इस क़ानून को पास करने की थी तो तब क्यों नहीं किया !! और अब ड्राफ्ट विहीन बयान देकर लोगो को मूरख बनाने की कोशिश कर रहे हो।
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