Pawan Jury BhilwaraRj
संघ के नेता येदुरप्पा जी विश्वास मत हासिल करने में असफल क्यों रहे ?
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इस पोस्ट में 2 वर्जन है। दोनों वर्जन अलग अलग कारण बताते है। आपको जो वर्जन उचित लगे उसे ग्रहण कर सकते है।
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1) संघ के कार्यकर्ताओ का वर्जन :
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चूंकि येदुरप्पा जी संघ से आते है अत: वे एक बेहद ईमानदार व्यक्ति है , और उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी नैतिक आदर्शो का पालन करते हुए गुजारी है। उन्हें समझाया गया कि उनके पास नंबर नहीं है अत: सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करना चाहिए , जबकि यह बात साफ तौर पर नजर आ रही है कि कोंग्रेस+जेडीएस के पास नंबर है। लेकिन येदुरप्पा जी नहीं माने। उन्होंने कहा कि कोंग्रेस और जेडीएस के दो दर्जन विधायक उनके साथ आने को तड़प रहे है, अत: उन्हें सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहिए। अत: उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। बाद में कोंग्रेस+जेडीएस के कुछ 11 विधायको ने उनसे सम्पर्क किया और 20 करोड़ रूपये प्रति विधायक देने की मांग की। लेकिन येदुरप्पा ने उनसे कहा कि वे इस तरह के अनैतिक कारोबार के सख्त खिलाफ है।
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तब इन सभी विधायको ने येदुरप्पा जी से मंत्री पद के साथ 5 करोड़ माँगा। लेकिन येदुरप्पा जी ने इस से भी इनकार कर दिया। येदुरप्पा जी ने कहा कि, इस तरह की अग्रिम शर्तों और केश पेमेंट पर समर्थन लेना मुझे मंजूर नहीं है। मैं राजनीति में सेवा के उद्देश्य से आया हूँ। यदि आपको अपनी "अंतरात्मा की आवाज" के आधार पर मुझे समर्थन देना है तो दो वर्ना न दो। यह बात सुनकर सभी विधायक सुन्न हो गए। चूंकि सभी विधायक कोंग्रेस+जेडीएस के थे , अत: बुरी तरह भ्रष्ट थे और उनकी अंतरात्मा मर चुकी थी , अत: इन विधायको ने येदुरप्पा जैसे ईमानदार व्यक्ति की ईमानदार सरकार को समर्थन देने से इनकार कर दिया !!!
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संघ के सभी कार्यकर्ता इस बात का दावा कर रहे है कि सिर्फ अंतरात्मा की आवाज के कारण ही विधायको ने येदुरप्पा को समर्थन नहीं दिया और पैसे के लेनदेन की बातें सिर्फ अफवाह है। ऑफर देने के जो ऑडियो-वीडियो वगेरह सामने आने का दावा किया जा रहा है वे सभी फर्जी है और कोंग्रेस ने डुपलीकेट्स का इस्तेमाल करके इन्हें बनाया है।
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यदि किसी व्यक्ति को संघ के इस वर्जन पर कोई शुबहा हो तो वे कृपया संघ के कार्यकर्ताओ की फेसबुक वाल पर उनसे सम्पर्क करें। चूंकि संघ के कार्यकर्ता "सबूत" में बहुत ज्यादा मानते है अत: शायद उनके पास येदुरप्पा जी के बेहद ईमानदार होने कोंग्रेस+जेडीएस के विधायको की अंतरात्मा मर जाने के सभी सबूत भी मौजूद है। यदि आप उनसे आग्रह करेंगे तो वे अवश्य ही इसके सबूत आपको दिखाएँगे।
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तो संघ के कार्यकर्ताओ के वर्जन के मुख्य बिंदु निम्लिखित है --
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a) येदुरप्पा जी बेहद ईमानदार व्यक्ति है , और उनसे किसी प्रकार के अनैतिक आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। जबकि कोंग्रेस+जेडीएस के सभी विधायक भ्र्ष्ट है।
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b) येदुरप्पा जी सच्चे व्यक्ति है। कोंग्रेस+जेडीएस के 12 विधायक ने उनका समर्थन करने का वादा किया था , अत: उनका यह दावा सच्चा था कि उनके पास बहुमत है।
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c) विधायक समर्थन के बदले पैसा मांग रहे थे, अत: येदुरप्पा जी ने उन्हें इनकार करके "अंतरात्मा की आवाज" पर समर्थन देने को कहा।
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d) कोंग्रेस+जेडीएस के विधायको की अंतरात्मा मर चुकी थी , अत: वे पलट गए।
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e) येदुरप्पा जी की अंतरात्मा जिन्दा थी अत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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(2) मेरा वर्जन
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मेरा वर्जन "कॉमन सेन्स एवं तर्क" पर आधारित है।
कॉमन सेन्स एवं तर्क से आशय -- कॉमन सेन्स एवं तर्क का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी घटना का अनुसन्धान करने के लिए भौतिक सबूत प्राप्य नहीं होते। भौतिक सबूत नहीं होने पर हम परिस्थितियों का आकलन करने के लिए अपने अनुभव को , सम्बंधित सूचनाओं को , भूतकाल में वैसी ही घटनाओं और उनके नतीजो को आधार बनाते है। किसी व्यक्ति के कॉमन सेन्स के स्तर के आधार पर ये आकलन सही या गलत हो सकते है। तर्क के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष अंतिम सत्य नहीं है। अत: इन्हें चुनौती दी जा सकती है। लेकिन इन्हें चुनौती सिर्फ तर्क से ही दी जा सकती है। किन्तु यदि किसी घटना के "सबूत" मौजूद हो तो उन्हें तर्क से नहीं काटा जा सकता। तब आपको इसे काटने के लिए सबूत की ही जरूरत होगी।
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उदाहरण के लिए मेरा कहना है कि सोनिया, राहुल , मुलायम , माया , ममता , आदि नेता सर से पाँव तक भ्रष्ट है। मैं ऐसा मेरे अनुभव के आधार पर इनका शासन देखकर कह रहा हूँ। और मेरे पास इनके भ्रष्ट होने के पक्ष में सैंकड़ो ऐसे तर्क है जिन्हें काटा नहीं जा सकता। लेकिन जब भी मैं ऐसा कहता हूँ तब कोंग्रेस के कार्यकर्ता मेरी वाल पर आपका मुझसे सबूत मांगते है !!! बताइये। इनका मानना है कि किसी व्यक्ति को सिर्फ तब ही अपने माँ-बाप को पेरेंट्स मानना चाहिए जब तक कि वे डीएनए रिपोर्ट न दिखा दें !!! अरें भैया , यह बात पूरा देश जानता है कि ये सभी नेता करप्ट है। खुद कोंग्रेस के कार्यकर्ता भी यह बात जानते है। लेकिन चूँकि वे खुद भी भ्रष्ट है अत: इनकी वकालत करते है और भौतिक सबूत मांगते है।
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मेरा वर्जन है कि --
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a) येदुरप्पा जी भी उतने ही झूठे , उतने ही अनैतिक एवं उतने ही भ्रष्ट है जितने की कोंग्रेस एवं जेडीएस के नेता है।
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b) वे जानते थे कि उनके पास नम्बर नहीं है। लेकिन उन्होंने सोचा कि पैसा फेंककर विधायको को खरीद लिया जाएगा। वो विश्वस्त थे कि कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक बिकने के लिए तैयार बैठे है।
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c) कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक भी बिकने को तैयार बैठे थे।
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d) लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे की सीमा निर्धारित कर दी , और इस वजह से सारी सेटिंग एक ही दिन में करना पडी।
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e) लेकिन एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि का नकद* इंतजाम येदुरप्पा जी नहीं कर पाए , और डील अटक गयी।*
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f) येदुरप्पा जी कोंग्रेस+जेडीएस के विधयाको को कुछ पेमेंट कर चुके थे , और अब उनसे पैसा लौटने को कह रहे है।**
(*) येदुरप्पा नकद का इंतजाम क्यों नहीं कर पाए , इसके पीछे जो वास्तविक वजह मुझे जो नजर आती है -- भारत में नोटबंदी हो के चुकी है, और 2000 रू के नोट रद्द होने की लगातार सम्भावना बनी हुयी है। पिछली बार जब नोटबंदी हुयी थी तो कोंग्रेस+जेडीएस के विधयाको को इन्हें बदलवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। तब बीजेपी के नेताओं ने इन नोटों को बदलने के लिए मोटा कमिशन लिया था ( लगभग 30-40% ) ! तो ये विधायक फिर से इस चक्कर में नहीं आना चाहते थे। अत: उन्होंने 100-100 के नोट मांगे। सिर्फ 4-5 घंटो में इतनी बड़ी राशि का इंतजाम 100 के नोटों में करना मुमकिन नहीं था, क्योंकि बैंक खुद कैश की कमी से जूझ रहे है। तो येदुरप्पा नकदी का इंतजाम न कर सके। मेरा मानना है कि यदि येदुरप्पा जी को एक दिन और मिल जाता तो शायद वे इसका इंतजाम कर देते।
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(**) ऐसे मामलो में "बाद में" या उधारी का कोई काम नहीं होता। और वैसे भी कोंग्रेस+जेडीएस के विधायक एडवांस में ही मानते है, बाद में दे देंगे में नहीं। तो येदुरप्पा जी के विभिन्न व्यक्ति अलग अलग विधायको को सेट कर रहे थे, और इनमे से जो 2-3 विधायक राजी हो गए थे उन्हें पेमेंट दी जा चुकी थी। लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही येदुरप्पा जी ने इस्तीफा दे दिया। अब येदुरप्पा जी इन विधायको से पैसा लौटाने को कह रहे है, लेकिन इन विधायको का कहना है कि हमने पैसा लिया था तो आपको वोट भी दे देते , लेकिन आपन शक्ति परिक्षण नही करवाया तो हम क्या करे। और येदुरप्पा जी ने इस्तीफा इसीलिए दे दिया था कि वे सभी पर्याप्त विधायको को पेमेंट नहीं कर पाए थे , तो फ्लोर टेस्ट में सरकार गिर जाती।
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मेरे वर्जन का स्त्रोत - जैसा कि घटनाक्रम के दौरान कर्नाटक के शीर्ष नेताओं के बेहद निकटस्थ रहे संघ एवं कोंग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओ ने मुझे बताया।
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