Pawan Jury BhilwaraRj
राजिव भाई "हथियार बंद नागरिक समाज" का समर्थन करते थे .
Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate:
Dixitjee says ...
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ब्रिटिश पार्लियामेंट में क़ानून बनाने के लिए बहस क्या हुई?
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ब्रिटिश पार्लियामेंट में बहस ये हुई कि क़ानून ऐसे बनाये जाने चाहिए कि सारे भारतवासी कभी भी दुबारा से खड़े न हो सकें और अंग्रेजों के खिलाफ बगावत न कर सकें.
तो सबसे पहला क़ानून जानते हैं क्या आया? सबसे पहला क़ानून.......आपको हैरानी होगी जानकर ...... अंग्रेजों के खिलाफ जो बगावत हुई थी वो सशस्त्र बगावत थी. उसमे हथियारों का इस्तेमाल हुआ था.
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अंग्रेजों ने सबसे पहला क़ानून बनाया - कि भारत में हथियार वही रख सकेगा जिसके पास लाइसेंस होगा. लाइसेंस जिसके पास नहीं होगा वो हथियार रखने का अधिकारी नहीं होगा.
तो अंग्रेजों ने क्या किया?
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लाइसेंसिंग ऑफ़ आर्म्स एक्ट; ये पहला क़ानून बनाया . और इस क़ानून के आधार पर क्या किया गया? घर घर की तलाशियां ली गयीं, किसके घर में बन्दूक है, किसके घर में हंसिया है, छूरा है, चाकू है, क्या क्या हथियार है वो सब अंग्रेजों ने छीन लिए. क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि इन्ही हथियारों की मदद से भारतवासी फिर दुबारा बगावत कर सकते हैं. तो सबसे पहले उन्होंने लाइसेंसिंग ऑफ़ आर्म्स एक्ट बनाके हथियार छीनने का कानून बनाया. और एक बार भारतवासियों के हथियार छिन गए तो भारतवासी कमजोर हो गए और वो कमजोरी इतनी भारी पड़ी कि अगले 90 साल तक फिर अंग्रेजों की गुलामी हमें सहन करनी पड़ी.
ये एक क़ानून बनाया उन्होंने.
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ये क़ानून दुर्भाग्य से आजादी के 62 साल के बाद भी अभी चल रहा है इस देश में. मालूम है?
हथियार वही रख सकता है जिसके पास लाइसेंस हो सकता है. लाइसेंस देने का काम सरकार करती है. पहले काले गोर अंग्रेजों की सरकार वो काम करती थी अब काले अंग्रेजों की सरकार वो काम करती है.
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लेकिन अब उल्टा होता है, शरीफ आदमी लाइसेंस वाला हथियार रखता है और गुंडा आदमी बिना लाइसेंस वाला हथियार रखता है.
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