Pawan Jury BhilwaraRj
कैसे सीमांकित वोटिंग सिस्टम आने से भारत के मतदाता कोंग्रेस के भय से आजाद हो सकते है ?
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कर्नाटक में कांग्रेस+जेडीएस की सरकार जनता की राय का मखौल है। जेडीएस को 38 सीट मिली है। मतलब कर्नाटक की जनता के बड़े समूह ने उन्हें ख़ारिज कर दिया था। लेकिन अब वे सरकार चला रहे है !! कोंग्रेस को भी सिर्फ 78 सीट मिली है , और उन्हें यह वोट जेडीएस के साथ मिलाकर सरकार चलाने के लिए नहीं मिला है।
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एक दृष्टिकोण से इन दोनों पार्टियों को मिलाकर जो सीट मिली है वे बीजेपी की सीट से ज्यादा है , अत: यह सरकार जनता के बहुमत का प्रदर्शन करती है। लेकिन इसमें पेच यह है कि , जिन मतदाताओ ने कोंग्रेस को वोट दिया था उनमे ज्यादातर मतदाता जेडीएस के खिलाफ थे और यही स्थिति कोंग्रेस के मतदाताओ के साथ भी है। मतलब कोंग्रेस को जितने लोगो ने वोट किया उनमे से कई मतदाता जेडीएस के जबरदस्त खिलाफ थे , और यदि उन्हें फिर से मौका मिले तो वे कोंग्रेस की जगह बीजेपी को वोट कर देंगे। क्योंकि वे जेडीएस को सत्ता में नहीं देखना चाहते। और जेडीएस के कई मतदाताओ को भी यदि यह मालूम होता कि वे कोंग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे तो वे जेडीएस की जगह बीजेपी को वोट कर देते , ताकि कोंग्रेस को सत्ता में आने रोका जा सके।
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इस पूरे झमेले का कारण इंस्टेंट रन ऑफ़ वोटिंग सिस्टम एवं सीमांकित मतदान प्रणाली का अभाव है। सीमांकित मतदान प्रणाली में मतदाता उम्मीदवार को (-100 से 100) के बीच अंक दे सकता है। इस कारण मतदात के पास दो विकल्प आ जाते है -- १) वह किसी उम्मीदवार को कितना पसंद करता है , और २) वह किसी उम्मीदवार को कितना सख्त नापसंद करता है। आज भारत में मतदान की जो प्रणाली है वह मतदाता को बाध्य करती है कि वह बेहद बदतर उम्मीदवार को सत्ता में आने से रोकने के लिए कम बदतर उम्मीदवार को वोट करे। इस तरह जनता सिर्फ बदतर लोगो और बदतर पार्टियों को ही चुन पाती है।
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इससे एक बड़ा नुकसान यह है कि , किसी नेता या पार्टी के एक्सपोज हो जाने के बावजूद भी वह तब तक जीतता रह सकता है जब तक कि वह विपक्षी पार्टी से भी और ज्यादा एक्सपोज न हो जाए !! उदाहरण के लिए कोंग्रेस ने देश को बदतरीन शासन दिया , और इस वजह से लोगो ने बीजेपी को चुना। लेकिन मोदी साहेब भी अपने अब तक के कार्यकाल में इतने एक्सपोज हो चुके है कि उनको वोट करने वाले लगभग 90% कार्यकर्ता अब उन्हें वोट नहीं करना चाहते !! आपने सही पढ़ा है , -- "उनको वोट करने वाले लगभग 90% कार्यकर्ता अब उन्हें वोट नहीं करना चाहते !!" लेकिन फिर भी वे मोदी साहेब को वोट करने के लिए बाध्य है , क्योंकि उन्हें यह भय है कि बीजेपी को वोट न करने से कोंग्रेस सत्ता में आ जाएगी। और यह बात सही भी है कि बीजेपी को वोट न देने से कोंग्रेस सत्ता में आ जाती है। जैसे कि हमने कर्नाटक में देखा।
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मुझे शामिल करते हुए अन्य जो भी लोग राजनीति में रुचि रखते है और जिन्होंने कोंग्रेस का शासन देखा है , वे यह बात जानते है कि कोंग्रेस का शासन एक बुरे सपने से कम नहीं है। तो वे सभी लोग कोंग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए मोदी साहेब को वोट करने को बाध्य है। इस लिहाज से कर्नाटक में संघ को अधिक सीट मिलने के बावजूद उन्हें सत्ता न मिलना संघ को दूरगामी फायदा पहुंचाएगा। क्योंकि इससे अब संघ के कार्यकर्ता मतदातो में इस डर को और भी पुख्ता कर सकेंगे कि यदि आपने संघ को वोट नहीं किया तो कोंग्रेस सत्ता में आ जायेगी।
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लेकिन , यह व्यवस्था बहुत ही खतरनाक है। क्योंकि इससे मोदी साहेब की सत्ता तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक कि वे कोंग्रेस से भी ज्यादा एक्सपोज न हो जाए, या इन दोनों से आजिज आकर जब तक लोग तीसरे विकल्प ( केजरीवाल ) की तरफ दौड़ लगाना न शुरू कर दे। और तब वे केजरीवाल के जाल में फंस जायेंगे। और संघ के कार्यकर्ता इसीलिए सीमांकित मतदान प्रणाली लाने का विरोध कर रहे है क्योंकि वे जानते है कि यदि लोगो को संघ को खारिज करने के बावजूद यदि कोंग्रेस को सत्ता से दूर रखने का विकल्प मिल गया तो मोदी साहेब की लोकप्रियता का गुब्बारा फट जाएगा। दरअसल मोदी साहेब कोंग्रेस के खिलाफ देश की नफरत पर सवारी कर रहे है , खुद की लोकप्रियता पर नहीं। कोंग्रेस के सत्ता में आने का भय खत्म हो जाने पर मोदी साहेब की लोकप्रियता भी ढल जायेगी। और तब उन्हें सत्ता में रहने के लिए काम करके दिखाना होगा। फिलहाल वे अपने भाषणों से कोंग्रेस को निशाना बनाते हुए भी सत्ता में बने रहे सकते है।
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यही वजह है कि आप संघ से उनके द्वारा किये जा रहे किसी भी फैसले पर कोई भी सवाल करे वे तुरंत आपको कोंग्रेस का शासन काल याद दिलाते है। पूरे देश में हर आलोचना के जवाब में पिछले 4 सालो से "60 साल की थ्योरी" इसीलिए घोटी जा रही है। दरअसल यह कह कर संघ के नेता मतदाताओ में यह डर जगाये रखने का प्रयास करते है कि आप मोदी साहेब की आलोचना करके कोंग्रेस की सत्ता वापसी का रास्ता बना रहे है। वे कोंग्रेस के डर को जिन्दा रखना चाहते है और इसीलिए वे बार बार कोंग्रेस के कर्म गिनाते रहते है। आप मोदी साहेब के किसी भी फैसले पर अंगुली उठाये , अगले ही वाक्य में वे कोंग्रेस को ले आयेंगे। ( पुष्टि के लिए कमेन्ट बोक्स देखे )
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और मोदी साहेब को वोट करने वाले 90% कार्यकर्ताओ के सामने मोदी साहेब एक्सपोज हो चुके है इसका मंडन मैं इस बात से करता हूँ कि -- आप किसी भी कार्यकर्ता को मोदी साहेब के गलत फैसलों ( जैसे टू चाइल्ड लॉ न लाना , बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ना , धारा 370 जैसे फैसले न लेना ) के बारे में कहने पर जवाब में बहुधा यह सुनेंगे कि -- "तो आप बताओ देश के पास मोदी साहेब के अलावा दूसरा विकल्प कौन है" ? यह उनकी स्वीकारोक्ति है कि वे खुद भी जानते है कि मोदी साहेब का शासन घटिया है , लेकिन हम उन्हें सिर्फ इसीलिए समर्थन दे रहे है क्योंकि हमारे पास विकल्प नहीं है।
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ऐसे में कार्यकर्ताओ से मेरा आग्रह है कि उन्हें विकल्प के रूप में व्यक्तियों को देखना बंद करना चाहिए और अच्छे कानूनों को लागू करवाने के लिए प्रयास करना चाहिये। हमने पीएम / सीएम के चुनाव के लिए जो प्रक्रिया प्रस्तावित की है उसमे जनता सीधे पीएम् के उम्मीदवार को वोट कर सकेगी और यदि पीएम / सीएम उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो उसे किसी भी समय नौकरी से निकाल सकेगी। इसी प्रक्रिया में हमने सीमांकित वोटिंग सिस्टम की प्रक्रिया भी रखी है। ताकि मतदाता यह बता सके कि किस उम्मीदवार को वह किसी भी सूरत में जीतते देखना नहीं चाहता।
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नीचे राईट टू रिकॉल पीएम का ड्राफ्ट दिया गया है। इसमें कुल 18 धाराएं है और इसे गेजेट में प्रकशित करने से यह क़ानून देश में लागू हो जाएगा। इसके लिए किसी भी प्रकार के संविधान संशोधन की जरूरत नहीं है। सीमांकित वोटिंग सिस्टम समझने के लिए इस ड्राफ्ट की धारा 16 देखें।
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राईट टू रिकॉल प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट (संशोधित):
<https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/859858050859057>
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इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव इंस्टेंट रन ऑफ़ वोटिंग सिस्टम का है। यह प्रणाली जातीय आधार पर वोटिंग करने को हतोत्साहित करती है। इस बारे में विवरण के लिए निचे दिया गया लेख पढ़े।
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जातिवाद को कम करने के लिए इंस्टेंट रन ऑफ वोटिंग सिस्टम (आईआरवी) टू राउंड वोटिंग सिस्टम ( टीआरवी ) से बेहतर परिणाम देगा --
<https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/847905751994329>
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