Pawan Jury BhilwaraRj

संघ के ज्यादातर कार्यकताओ ( लगभग 90% ) ने मोदी साहेब से कहा है कि वे जीएसटी का हिंदी संस्करण उपलब्ध न करवाए। जीएसटी लागू होने से पहले संघ की लगभग सभी 40 हजार शाखाओ में इस ड्राफ्ट को डिस्कस किया गया था। संघ के लगभग 50 लाख कार्यकर्ताओ ने इसमें भाग लिया था। इन मीटिंग्स में संघ के कार्यकताओ ने अपने शाखा प्रमुखों से कहा कि यदि जीएसटी लागू होने से पहले इसका आधिकारिक हिंदी संस्करण मार्केट में आ गया तो ज्यादा से ज्यादा नागरिक / कार्यकर्ता इसे पढ़ सकेंगे और वे जान जाएंगे कि जीएसटी देश की छोटी इकाइयों को बड़े पैमाने पर बाहर करके बड़ी कम्पनियो को गैर वाजिब फायदा पहुंचाएगा।
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अत: बेहतर है कि जीएसटी लागू होने से पहले इसका हिंदी संस्करण किसी भी सूरत में जारी नहीं किया जाए। और हो सके तो जीएसटी लागू होने के बाद भी इसका हिंदी संस्करण जारी करने की जरूरत नहीं है। इसी तरह की मांग संघ के कार्यकर्ताओ ने मॉरीशस ट्रीटी एवं भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के बारे में भी की थी। तब शाखा प्रमुखों ने इस मांग को अपनी राज्य इकाइयों के प्रमुखों को भेजा और वहां से इस मांग को राष्ट्रीय कार्यकरिणी में पहुंचाया गया।
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तब संघ के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने यह तय किया कि इन कानूनों के हिंदी संस्करण जारी नहीं किये जाने चाहिए। तब यह प्रस्ताव मोदी साहेब तक पहुंचाया गया। मोदी साहेब ने संघ के लाखों कार्यकर्ताओ की मांग को स्वीकार करते हुए इस तरह के आदेश जारी किये कि इन कानूनों के हिंदी संस्करण जारी नहीं किये जाने चाहिए। और इसी वजह से इन कानूनों के हिंदी संस्करण मोदी साहेब ने आज तक भी जारी नहीं किये है।
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साथ ही शाखाओ के बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि कोई नागरिक इनसे पूछे कि मोदी साहेब ने इन कानूनों के हिंदी संस्करण जारी क्यों नहीं किये है तो वे यही जवाब देंगे कि -- "हमें इस बारे में कुछ नहीं मालूम"।
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सबूत - आप संघ के किसी भी कार्यकर्ता से इस बारे में पूछिए तो वे आपको यही कहेंगे कि ऐसी कोई मीटिंग कभी नहीं हुयी।
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जब हमने संघ के कुछ कार्यकर्ताओ ने संपर्क किया और उनसे कहा कि यदि आप इन कानूनों के हिंदी संस्करण जारी करने का समर्थन करते है तो मोदी साहेब को ट्वीट करिये कि इन कानूनों के हिंदी संस्करण जारी किये जाए। तो उन्होंने ऐसा कोई भी ट्वीट करने से साफ़ मना कर दिया और बात को पलटने की नियत से "हिन्दू-हिन्दी जिंदाबाद" के नारे लगाने लगे !!!
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तो आप को एक बात जान लेनी चाहिए कि संघ के कार्यकर्ता दोहरी नीति का अनुसरण करने में माहिर है। एक तरफ वे मोदी साहेब पर यह दबाव बनाते है कि देश में जो भी क़ानून लागू किये जा रहे है उनके हिंदी संस्करण जारी नहीं किये जाने चाहिए और दूसरी तरफ नागरिको को संघ=बीजेपी से चिपकाए रखने के लिए वे हिंदी जिंदाबाद के नारे लगाते है।
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यदि आप चाहते है कि जीएसटी का हिंदी संस्करण जारी किया जाना चाहिए तो कृपया पीएम को यह ट्वीट भेजे -- " @PMOIndia , please provide Hindi translation of GST. #GstHindiTranslation "
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मेरे द्वारा भेजे गए ट्वीट का लिंक -- https://twitter.com/PawanJury/status/881982323079753729
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देश के 50 करोड़ से ज्यादा नागरिक हिंदी भाषी है और अंग्रेजी भाषा पढ़ने में सक्षम नहीं है। अत: उनके लिए अंग्रेजी एवं लेटिन एक जैसी है। अत: आप पीएम को यह ट्वीट भी भेजे कि भारत में जो भी क़ानून वे लागू करते है उन्हें सिर्फ लेटिन भाषा में ही जारी करे।

पीएम को यह ट्वीट भेजे -- " @PMOIndia , please #PrintLawsInLatinOnly "
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मेरे द्वारा भेजे गए ट्वीट का लिंक - https://twitter.com/PawanJury/status/886536547469635584
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"वेल्थ टेक्स ग्रुप"
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