Pawan Jury BhilwaraRj

सहारनपुर एवं इसी प्रकार के होने वाली अन्य जातीय दंगो पर प्रस्तावित समाधान -- होने वाली सभी हत्याओं, घायलों एवं सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के सभी आरोपियों का सार्वजनिक नारको टेस्ट लिया जाए एवं इन मामलो की एवं सार्वजनिक रूप से दलितों के साथ भेदभाव करने वाले सभी मामलो की सुनवाई नागरिको की ज्यूरी द्वारा हो।
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कृपया इस बात पर विशेष रूप से ध्यान दें कि सोनिया-मोदी-केजरिवाल की तिकड़ी इन आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने का विरोध कर रही है। क्यों ?। एक बड़ी वजह यह है कि इससे उनका भ्रष्टाचार खुलकर जनता के सामने आ जाएगा। सिर्फ राईट टू रिकॉल पार्टी ही एक मात्र संगठन है जो सार्वजनिक हत्याओं, महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधो एवं गठजोड़ से किये जा रहे बड़े पैमाने के भ्रस्टाचार के आरोपियों का सार्वजनिक नारको टेस्ट लेने की मांग करता है।
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भीम सेना, ठाकुर सेना, ब्राह्मण सेना, करनी सेना -- जैसे जातीय संगठन, फिर बजरंग दल, विहिप, हिन्दू वाहिनी -- जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक संगठन, फिर गुर्जर, जाट एवं विभिन्न वर्ग --- जातिय आधार पर आरक्षण मांगने वाले, फिर गाय बचाने वाले संगठन, कट्टर इस्लामिक संगठन , फिर क्षेत्रवाद और भाषा के आधार पर संगठन , और फिर पाकिस्तान, सऊदी अरब एवं मिशनरीज जो खुद के संघठन भी चलाते है वे और दंगा करवाने के लिए दोनों पक्षों को पैसा देते है वो अलग से।
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ये सभी अराजनैतिक संगठन है किन्तु इनमें से ज्यादातर के लक्ष्य राजनैतिक है। ज्यादातर संगठनो को खुले में या भीतर से राजनीतिक प्रश्रय हासिल है और राजनितिक दल इनका इस्तेमाल वोटरों को धर्म एवं जाति के खांचो में बाटने में करते है। जब अलग खांचे बन जाते है तो अमुक वर्ग के वोटरों को अपनी पार्टी से चिपकाया जा सकता है। राजनैतिक पार्टियाँ भी इसी तरह की राजनीती में लिप्त है। सभी के पास एक कोर वोट है। यह कोर वोट लेने के लिए पहली शर्त अलगाव है।
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पहले भी ऐसे संगठन थे किन्तु तब बात अलग थी। इनकी परास जिले या नगर से आगे नहीं जा पाती थी। किन्तु सोशल मिडिया आने के बाद प्रत्येक संगठन के पास खुद को तेजी से बढ़ा सकने के अवसर है। तो सभी को आगे आना है। प्रचार पाना, समाज को खांचो में काटना, और अमुक खांचे के वोटरों को अपने संगठन से और फिर पार्टी के साथ जोड़ लेना। हर जातिगत एवं धार्मिक बवाल या दंगा किसी न किसी संगठन/पार्टी के वोटो में इजाफा कर देता है या किसी के वोट में कमी ले आता है। कुछ दंगे शुरुआत से ही प्रायोजित होते है, जबकि कुछ किसी तात्कालिक घटना से शुरू होते है और बाद में उन्हें उकसाकर दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाता है। फिर इन दंगो के दर्जन भर संस्करण आ जाते है और अलग अलग संगठन अपने एजंडे के अनुसार इनकी अलग अलग व्याख्या जनता में पहुंचाते रहते है।
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और इस पूरी कवायद से सबसे अधिक फायदा मिशनरीज एवं सऊदी अरब की लोबी को है। वे भारत को आंतरिक युद्ध में धकेलना चाहते है अत: वे अपने पेड मीडिया एवं विभिन्न संसाधनों के माध्यम से इस आग में घी डालने का काम करते है, तथा दंगा करने वाले दोनों पक्ष के संगठनों को आर्थिक मदद देते है। इस तरह सभी पक्ष नफे में है और सभी अपने लक्ष्य की और बढ़ रहे है। पार्टियों को वोट आ रहे है, संगठनों और इनके नेताओं का नाम हो रहा है और मिशनरीज एवं सऊदी अरब की लोबी के लिए भारत में जातीय व धर्म के आधार पर आंतरिक गृह युद्ध करवाने की जमीन तैयार हो रही है।
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प्रत्येक दंगा अपने साथ सामाजिक अलगाव के साथ साथ अन्य नुकसान भी लेकर आता है -- निर्दोष नागरिक मारे जाते है या गंभीर रूप से घायल हो जाते है, उनकी सम्पत्ति जला या तोड़ दी जाती है, कारोबार का नुक्सान होता है आदि। यह घटनाएं व्यापक रूप से बढ़ रही है, एवं उससे भी ज्यादा इनका प्रचार हो रहा है। ये महामारी का रूप ले सकती है।
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यदि नागरिको की ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक नारको टेस्ट लिया जाए तो अपराधी आसानी से पकड आ जायेंगे और उनका दोष सिद्ध किया जा सकेगा। नारको टेस्ट से यह भी साबित हो जाएगा कि इन दंगो में पाकिस्तान/सऊदी अरब/मिशनरीज या अमुक पार्टी की भूमिका थी। इससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
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और कृपया इस तथ्य को विशेष रूप से नोट करें कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं इनके सभी अंध भगत इन आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने का विरोध कर रहे है। क्यों ? क्योंकि दंगो में ज्यूरी द्वारा नार्को टेस्ट आने से कुछ ही समय में दंगो में भारी कमी आएगी और कार्यकर्ता बड़े पैमाने के भ्रस्टाचार के मामलो में भी सार्वनजनिक नार्को टेस्ट की मांग करेंगे। और यदि भ्रष्टाचार के मामलों में भी यदि ज्यूरी द्वारा नार्को टेस्ट लिया जाने लगा तो आज के कई चमकते चेहरे सलाखों के पीछे चले जाएंगे। उदाहरण के लिए हाल में लागू की गयी नोटबंदी के दौरान एक "राष्ट्रवादी" पार्टी के ऊँचे कद के भयंकर रूप से राष्ट्रवादी नेताओ एवं मंत्रियो ने बैंको के साथ गठजोड़ बनाकर कुछ 50 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ तक का पैसा बनाया है। अब ज्युरि द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया गया तो यह सब निकल कर सामने आ जायेगा कि नोटबंदी के दौरान कौन कौन अरब-खरब पति बना है।
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इस प्रकार के दंगो रोकने के लिए आप क्या कर सकते है ?
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(a) कृपया हत्या, दंगे, स्त्रियों के खिलाफ जघन्य अपराध, एवं बड़े पैमाने के भ्रस्टाचार के मामलो में नागरिको की ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेने के क़ानून को लागू करवाने का प्रयास करें।
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(b) हम जल्दी है इसके लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स को mygov पर अपलोड करेंगे। जब हम इसे mygov पर अपलोड कर दे कृपया इस कानून ड्राफ्ट का लिंक @pmoindia पर ट्वीट करें। इसके लिए मेरी प्रोफ़ाइल को फॉलो करे ताकि आपको वांछित क़ानून ड्राफ्ट अपलोड करने की अद्यतन जानकारी मिल सके। ड्राफ्ट अपलोड न होने तक आप प्रधानमंत्री को यह ट्वीट भेजें --- @PmoIndia pls print law to make narcotest in public compulsory in riot cases.#MakeNarcoTestInPublicMustInRiotCases .wrt - #SaharapurRiotswe
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कृपया इस ट्वीट को कॉपी पेस्ट करके ट्वीट करें
। रीट्वीट न करे --- https://twitter.com/pawanjury/status/868057212081647617
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(c) कृपया ज्यादा से ज्यादा नागरिको को यह सूचित करे कि सोनिया-मोदी-केजरीवाल एवं कांग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी के नेता संयुक्त रूप से दंगो के आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिए जाने का विरोध कर रहे है। यह इसीलिए बहुत जरुरी है ताकि देश के कार्यकर्ताओ के सामने ये नेता एक्सपोज हो और कार्यकर्ताओ का समय बर्बाद करने की इनकी क्षमता घट जाए।
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