Pawan Jury BhilwaraRj

आईटी सेक्टर में इंजीनियर्स ऑटोमेशन ( स्वचालन/ मशीनीकरण ) की वजह से नौकरियां नहीं गवां रहे है। मामूली तौर पर इसका एक कारण अमेरिका द्वारा H1B वीजा नियमो में किये गए बदलाव है। लेकिन सबसे बड़ी वजह भारत एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी एवं अमेरिका, ब्रिटेन, चाइना एवं वियतनाम की तुलना में भारतीय इंजीनियरिंग कॉलेजो का गिरता हुआ स्तर है।
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आईटी सेक्टर में स्वचालन कभी भी मानविक जरुरतो में कमी नहीं लाता। हालांकि स्वचालन निर्माण क्षेत्र में अल्पकालिक रूप से नौकरियों में कमी लाता है लेकिन आईटी सेक्टर में ऐसा नहीं होता। असल में जितना ही स्वचालन बढ़ता है आईटी क्षेत्र में और भी अधिक इंजीनियर्स की मांग खड़ी होती है।
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सही या गलत कारणों से भारत की गैर आईटी सेक्टर कम्पनियों के मुनाफे में भी कमी आ रही है। नोटबंदी ने इस स्थिति को और भी बदतर बनाया, किन्तु नोटबंदी न होने से भी यह मंदी आना तय था। भारत की गैर आईटी कंपनियों का मुनाफा गिरने का मुख्य कारण यह है कि विश्व की अन्य कम्पनियों से प्रतिस्पर्धा करने की हमारी कम्पनियां की काबिलियत लगातार घट रही है। इससे उनका मुनाफा गिर रहा है, और आईटी कम्पनियों को कांट्रेक्ट देने की उनकी क्षमता कम हो रही है। और इसी कारण आईटी कम्पनियों को तुलनात्मक रूप से कम कांट्रेक्ट मिल पा रहे है।
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पूरे विश्व में यही हो रहा है।
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दूसरा पहलू यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, विएतनाम आदि ने अपनी आईटी स्किल को इम्प्रूव करने के लिए भारी सुधार किये है। भारत में आईटी सेक्टर की शिक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं आ पाए बल्कि इनका स्तर और भी गिरता गया, और इसी वजह से अब अन्य देशो के इंजीनियर्स को प्राथमिकता मिल रही है।
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उदाहरण के लिए , जैसा मुझे गुजरात के टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बताया -- यदि आप पिछले 5-10 वर्ष के दौरान पूछे गए प्रश्नों के उत्तर रट लेते हो तो आसानी से 50% अंक लाये जा सकते है, जो कि पास होने के लिए आवश्यक 35% अंको से पर्याप्त रूप से अधिक है !!! बी.ई. डिग्री की यह दशा है !!! और बी.सी.ए. के हालात और भी बदतर है। क्यों ?
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गुजरात यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने अनाधिकृत रूप से यह बताया कि -- इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले छात्रों का स्तर कक्षा 12 की गणित-विज्ञान में इतना गिरा हुआ है कि उनमे से ज्यादातर को इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम किसी भी तरीके से समझाया नहीं जा सकता !!! इसीलिए वे चाहते है कि उन्हें जैसे तैसे पास कर दिया जाए !!!
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तो इंजीनियरिंग के छात्रों की विज्ञान-गणित का स्तर इतना गिरा हुआ क्यों है ?
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सुनने में आया है कि गुजरात में कक्षा 12 की गणित-विज्ञान की परीक्षाओं में 50% प्रश्न पाठ्य पुस्तक में से पूछे जाते है !!! अत: यदि कोई छात्र रट्टा मार ले तो वह आसानी से 50% अंक ला सकता है। दरअसल गणित विषय में पाठ्यपुस्तक या प्रचलित गाइड बुक में से एक भी प्रश्न नहीं पूछा जाना चाहिए। यदि ज्यादातर प्रश्न पाठ्यपुस्तक में से पूछे जायेंगे तो छात्रों का स्तर गिरता चला जाएगा।
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तो क्या कारण है कि प्रश्न पत्र बनाने वाले परीक्षाओ में इतने सरल प्रश्न रख रहे है ?
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उनका कहना है कि -- कक्षा 10 के छात्रों का विज्ञान-गणित का स्तर इतना घटिया है कि उनमे से ज्यादातर को कक्षा 11 एवं 12 की गणित-विज्ञान नहीं समझाई जा सकती। इसीलिए हम उन्हें जैसे तैसे पास कर देना चाहते है।
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तो आखिर क्या वजह है कि, कक्षा 10 के छात्रों का गणित-विज्ञान का स्तर इतना गिरा हुआ है ? क्योंकि भारत के केन्द्र एवं राज्यों के शिक्षा मंत्रियों ने इस तरह का क़ानून लागू किया है कि -- कक्षा 8 तक किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाएगा !!! यदि छात्र उत्तर पुस्तिका में एक शब्द भी न लिखे, तब भी अध्यापक को उसे पास करना होगा !!! इस क़ानून की वजह से अध्यापको एवं छात्रों की पढने पढ़ाने में रुचि नहीं रह गयी है , और वे इसमें अपने आप को खपाना नहीं चाहते।
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कहने की जरूरत नहीं है कि -- भारत के नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारीयों ने भारत के गणित-विज्ञान के स्तर को तोड़ने के लिए काफी मेहनत की है !!! और ऐसा वे 1990 से ही कर रहे है !!
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जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, चीन आदि देशो ने अपने स्कूल/ कोलेजों के स्तर को इतना घटिया नहीं होने दिया कि छात्र रट्टा मार कर पास हो जाए। और इसी वजह से आज उनकी कम्पनियों में बेहतर कार्मिक काम कर रहे है।
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आईटी क्षेत्र में इंजीनियर्स की मांग घट नहीं रही है। भारत में सरकारी एवं निजी क्षेत्र में ऐसी हजारो समस्याएं है जिनको आईटी क्षेत्र की इंजीनियरिंग द्वारा हल किया जा सकता है। यातायात की समस्या, अपराधो को चिन्हित करना, प्रशासनिक एवं अदालतो की सुस्त प्रक्रियाएं, प्रशासनिक एवं भू स्वामित्व के रिकोर्ड का संग्रहण और इसी तरह की सैंकड़ो समस्याओं को आईटी तकनीक का इस्तेमाल करके सुधारा जा सकता है। इस तरह की हजारो एप्लीकेशन की मांग है जिन्हें मौजूदा तकनीक के तहत बना कर लागतो में कमी लायी जा सकती है। लेकिन उच्च एवं निम्न स्तर पर भी हुनरमंद इंजीनियर्स का गंभीर रूप से अभाव है। यही वजह है कि भारत सरकार एवं निजी कम्पनियां असली काम करने के बजाय जोड़ तोड़ पर ध्यान दे रही है। इसी के चलते 1950 से ही प्रतिभाएं भारत से पलायन कर रही है एवं कोलेज संचालको की रुचि अच्छा प्रशिक्षण देने में नहीं है।
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कोलेज रटंत विद्या को बढ़ावा दे रहे है, क्योंकि भारत के केंदीय, राज्यों के शिक्षा मंत्रालयो, विश्वविद्यालयों में भारी भ्रष्टाचार है। इसी भ्रष्टाचार की वजह से निजी कोचिंग संस्थान चलाने वाले प्रतिभाशाली संचालक कोलेज खोलने में रुचि नहीं दिखाते है।
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समाधान ?
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हमेशा की तरह मेरा सुझाव है कि सरकारी विभागों एवं मंत्रालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने के लिए हमें राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम एवं वेल्थ टेक्स कानूनों को लागू करने का प्रयास करना चाहिए। सूचना तकनीक मंत्री, शिक्षा मंत्री एवं उपकुलपति पदों पर हमें राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओ की तत्काल आवश्यकता है। अन्य सरकारी विभागों में भी राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आने से सरकारी महकमो में व्याप्त समग्र भ्रष्टाचार में कमी आएगी जिससे भारत की उत्पादकता बढ़ेगी व परिणामस्वरूप बेरोजगारी में कमी आएगी।
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राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट यहाँ देखें -- https://www.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112
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