Pawan Jury BhilwaraRj
बीजेपी कार्यकर्ताओ के एक वर्ग का मोदी साहेब से मोह भंग हो चुका है। विकल्प के रूप में अब ये कार्यकर्ता योगी जी का समर्थन कर रहे है। क्या योगी पीएम बन सकते है ?
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१) पहली बात यह कि भारत में संसदीय लोकतंत्र है, अत: भारत के नागरिको को अपने सांसद को चुनने का अधिकार है, प्रधानमंत्री चुनने का नहीं। मोदी साहेब को भी सांसदों ने चुना है। और यही स्थिति मुख्यमंत्री पद की है। अत: योगी जी को भी विधायकों ने ( मतलब पार्लियामेंट्री बोर्ड ने ) चुना है। अगला पीएम भी इसी तरह चुना जाएगा। योगी समर्थक सिर्फ फूल के निशान पर ठप्पा लगा सकते है। पीएम कौन होगा यह तय करने का अधिकार पार्लियामेंट्री बोर्ड के पास है।
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मोदी साहेब ने बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के मालिकों, मिशनरीज एवं मिडिया कर्मियों के साथ इतना मजबूत गठजोड़ बना लिया है कि विदेशी एवं देशी धनिक उनसे बेहद खुश है। इन लोगो के पास टिकट वितरण का अधिकार है, तथा मीडिया भी है। तो मोदी मण्डली ही यह तय करेगी कि टिकेट किसे दिया जाए। वे अपने चमचो को ही टिकट देंगे और इस तरह पहले राउंड में योगी जी पिछड़ जाएंगे। अगर योगी जी के कुछ समर्थको को टिकट मिल जाता है तो उनके पास दूसरे राउंड में मीडिया है। मीडिया ही यह तय करेगा कि किसके वोट काटने है और किसके जोड़ने है।
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और जब बीजेपी के सांसद चुनकर आयेंगे तो बचे खुचे सांसद रातों रात नोटों की गड्डियों से तुल जायेंगे। और पैसो से तौलने की मोदी साहेब के प्रायोजको की इस ताकत के सामने योगी जी कहीं नहीं टिकते। तो यह तय है कि बीजेपी के कार्यकर्ता कितना भी दम लगा ले, तकनिकी तौर पर यह तय है कि 2019 में पीएम फिर से मोदी साहेब ही बनेंगे। या आप यूँ कह सकते है कि जब तक बीजेपी सत्ता में रहेगी, पीएम मोदी साहेब ही रहने वाले है।
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समाधान - एक समाधान यह है कि प्रधानमंत्री को चुनने का अधिकार सीधे नागरिको को दे दिया जाए। किन्तु भारत में सिर्फ राईट टू रिकॉल पार्टी ही एक मात्र पार्टी है जिसने यह मांग रखी है तथा इसका लिखित ड्राफ्ट भी दिया है। यदि यह ड्राफ्ट गेजेट में आ जाता है तो भारत के नागरिको को अपने प्रधानमंत्री को सीधे चुनने का अधिकार मिल जाएगा। आज पीएम मोदी साहेब है अत: इस क़ानून का सबसे प्रचंड विरोध वे ही कर रहे है। कोंग्रेस, आम आदमी पार्टी एवं अन्य राजनैतिक दल भी इस क़ानून के धुर विरोधी है।
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यदि आप यह चाहते है देश के प्रधानमंत्री को चुनने का सीधा अधिकार आपको मिले तो इस क़ानून का समर्थन करें --- प्रधानमंत्री को नागरिको द्वारा सीधे चुनने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/545154402329425
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२) दूसरी बात यह कि, तब भी मोदी साहेब को हटाने और योगी जी को पीएम बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को अगले 2 वर्ष तक इन्तजार करना होगा। ठीक उसी तरह जिस तरह देश की जनता मनमोहन सिंह जी को हटाने के लिए 2012 से ही 2014 का इन्तजार कर रही थी। चाहे जो हो किन्तु मोदी साहेब को 2019 से पहले हटाया नहीं जा सकता। वैसे 2019 में भी नहीं हटाया जा सकता। क्योंकि जनता कोंग्रेस एवं आम पार्टी से इतना घबराई हुयी है वोट तो उन्हें आखिर बीजेपी को ही करना पड़ेगा। और बीजेपी को वोट करने के बाद इसका फैसला पार्लियामेंट्री बोर्ड करेगा कि पीएम कौन बनेगा। तो वो तो मोदी साहेब ही बनेंगे। क्योंकि तब तक पार्लियामेंट्री बोर्ड के बचे खुचे सदस्यों की राजनीति भी मोदी साहेब ख़त्म कर चुके होंगे। सिर्फ चमचे ही बचेंगे बोर्ड में।
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समाधान - यदि भारत के नागरिको के पास प्रधानमंत्री को सीधे चुनने के अधिकार के साथ साथ यह अधिकार भी मिल जाए कि नागरिक किसी भी समय अपने मत का प्रयोग करके प्रधानमंत्री को नौकरी से निकाल सके, तो मोदी साहेब को नौकरी से निकालकर योगी जी 2019 से पहले ही पीएम बनाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि कार्यकर्ताओ का एक बड़ा वर्ग इसीलिए भी मोदी साहेब का समर्थन करने के लिए बाध्य है क्योंकि वे जानते है कि 2019 से पहले अब कुछ भी हो नही सकता। 2019 तक तो पीएम मोदी साहेब ही रहेंगे। अत: समझदारी इसी में है कि इनका ही समर्थन करते रहो। विरोध करके क्या उखाड़ लेंगे।
यह कहने की जरूरत नहीं है कि मोदी साहेब ऐसे किसी भी क़ानून का विरोध कर रहे है जिससे देश के नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके प्रधानमन्त्री को नौकरी से निकाल सके। कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी भी इस तरह का कोई अधिकार नागरिको को देना नहीं चाहते। अत: वे भी इस प्रकार के क़ानून के विरोधी है।
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यदि आप यह चाहते है देश के प्रधानमंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार आपको मिले तो इस क़ानून का समर्थन करें --- प्रधानमंत्री को नागरिको द्वारा नौकरी से निकालने के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/545154402329425
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३) तीसरी एवं सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यदि भारत के नागरिको के पास अपने प्रधानमंत्री को नौकरी से निकालने का अधिकार होता था तो मोदी साहेब को नौकरी से निकालने की नौबत ही न आती थी। जैसे जैसे मोदी साहेब देश विरोधी फैसले लेते जाते वैसे वैसे उनके वोट कटते जाते और उन्हें यह भय जकड़ लेता कि मेरी नौटंकी से कार्यकर्ताओ का एक बड़ा वर्ग नाराज है और वे देश के नागरिको को इस बात पर सहमत कर रहे है कि मोदी साहेब को नौकरी से निकालकर योगी जी पीएम की कुर्सी पर बिठा देना चाहिए। और अपनी कुर्सी जाते देख मोदी साहेब में रातों रात परिवर्तन आता और वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की दलाली करने की जगह वे फैसले लेने लगते जिससे देश की व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आये। इस तरह न तो मोदी साहेब को कुर्सी छोडनी पड़ती और न ही वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हितो को साधने के चक्कर में देश हित से समझौता करते।
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कार्यकर्ताओ को यह बात समझनी चाहिए कि चाहे मोदी हो या टोदी हो, काम सभी उसी के लिए करते है जो उन्हें नौकरी से निकाल सकता है। जनता के पास अब मोदी साहेब को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है इसीलिए वे जनता को रूपये में पांच पैसे का भी भाव नहीं देते। यदि भारत के नागरिको के पास उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार आ जाएगा तो अगले दिन से ही वे देश हित में फैसले लेने शुरू कर देंगे।
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समाधान - पीएम को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया का ड्राफ्ट ऊपर दिया गया है। प्रधानमन्त्री को ट्विट भेजे कि -- यदि आपने राईट टू रिकॉल क़ानून को गेजेट में प्रकाशित नहीं किया तो मैं बीजेपी को 2019 क्या कभी भी वोट नहीं करूँगा। इससे मोदी साहेब को यह बात समझ आएगी कि यदि मैंने इस क़ानून को लागू नहीं किया तो बीजेपी के वोट कट जायेगे, और मैं 2019 में पीएम नहीं बन पाऊंगा। यदि निर्णायक संख्या में मोदी साहेब को इस तरह के ट्विट किये जाते है और 2019 के चुनावों के एन पहले यह मुद्दा खड़ा हो जाता है तो मोदी साहेब पर इस क़ानून को लागू करने के लिए वांछित दबाव बन जाएगा।
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यह क़ानून लागू होने के बाद देश के नागरिको को अपने प्रधानमन्त्री को सीधे चुनने एवं उसे नौकरी से निकालने की प्रक्रिया मिल जायेगी। उसके बाद आप पीएम पद के लिए मोदी साहेब को वोट करे या योगी जी को। इससे मुझे कोई लेना देना नहीं है। मेरा मुद्दा सिर्फ यह है कि भारत के नागरिको के पास अपने पीएम को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया होनी चाहिए। पीएम अच्छा काम करे तो नागरिक उसे पीएम बनाए रखे और वह बुरे फैसले ले तो लात मारकर उसे तुरंत कुर्सी से हटा दे। पर मेरा मानना है कि यदि कोई पीएम नागरिको को इस तरह का अधिकार दे देता है, तो शुकराने के तौर पर नागरिको को चाहिए कि वे एक बार अपना वोट फिर से उन्हें ही दे।
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