Pawan Jury BhilwaraRj

EVM पर
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क्या किसी टीवी में दो रिसीवर लगाए जा सकते है ताकि उसे दो रिमोट द्वारा ऑपरेट किया जा सके ?
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टीवी एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसे रिमोट द्वारा कमांड दी जाती है। आपके टीवी का एक रिमोट आपके पास है। पर यदि कम्पनी या डीलर या कोई मेकेनिक चाहे तो वे उसमे एक और रिसीवर फिट कर सकते है। इस रिसीवर का प्रयोग करके वे अपने रिमोट से आपके टीवी को ऑपरेट कर सकते है। पर वे ऐसा करते नहीं है। क्योंकि उन्हें आपके टीवी को ऑपरेट करने में कोई रुचि नहीं है।
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इसी तरह से पेट्रोल पम्प पर जो तेल मापने की जो मशीने लगी है उनमे लगे हुए पीसीबी को यदि बदल दिया जाए तो बदलने वाला व्यक्ति पेट्रोल का माप कम ज्यादा दिखा सकता है। पेट्रोल पम्प मालिक अपनी मशीन का पीसीबी बदल देते है और आपको एक लीटर की जगह सिर्फ 950 मिलीलीटर तेल ही देते है। लेकिन उनके द्वारा किये गए प्रोग्राम के कारण मशीन स्क्रीन पर आपको एक लीटर का माप ही दिखाती है।
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जब माप तौल अधिकारी पेट्रोल पम्प पर उपकरण चेक करने जाएगा तो पम्प मालिक अपने द्वारा लगाए गए नकली पार्ट को निकालकर फिर से ओरिजनल पार्ट लगा देते है। इस तरह से माप तौल अधिकारी के जांचने पर मशीन तेल का सही माप ही दिखाएगी। किन्तु उसके जाने के बाद पम्प मालिक फिर से इस ओरिजनल पार्ट को बदल देते है।
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ज्यादा सुविधाजनक तरीका यह है कि ( और ज्यादातर यही इस्तेमाल में लाया जाता है ) पेट्रोल पम्प मालिक माप तौल अधिकारी को महीने का पैसा दे देते है। कुछ बीस साल पहले मेरे एक परिचित जो कि अजमेर में माप तौल इंस्पेक्टर थे वे उस समय शहर के प्रत्येक पम्प से 10 हजार रुपये मासिक का हफ्ता वसूल करते थे !!! मतलब यह घोटाला नया नहीं है। दशकों से चल रहा है।
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निष्कर्ष यह है कि इस प्रकार के किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को जिसमें चिप या पीसीबी का प्रयोग हुआ हुआ हो, को आसानी से अपने मन मुताबिक प्रोग्राम किया जा सकता है। बशर्ते आपको ओरिजिनल इसकी चिप/पीसीबी को डुप्लीकेट से बदलने का मौका मिले।
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भारत में 1999 में evm का प्रयोग शुरू हुआ। तब से ही देश के कई इंजिनियर यह दावा कर रहे है कि इन्हे आसानी से मेन्यूपिलेट किया जा सकता है। इन कार्यकर्ताओ ने चुनाव आयोग ने कहा कि हमें आप evm करवाए ताकि हम यह देख सके कि क्या इसे मेन्यूपिलेट किया जा सकता है। लेकिन चुनाव आयोग ने evm देने से इंकार कर दिया। चुनाव आयोग ने तब 2009 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके evm को टेबल पर सजाया और कहा कि, "यदि आप इसके वोट बदल के दिखा सकते तो बिना evm को हाथ लगाए रिमोट से इसके वोट बदल कर दिखाओ"। इंजीनियर्स का कहना था कि जब तक हमें इसे खोलकर देखने का मौका नहीं मिलेगा तब तक कोई भी इसके वोट नहीं बदल सकेगा। किन्तु यदि आप हमें यह मशीन आधा घंटे के लिए उपलब्ध करवा दो तो हम यह साबित कर सकते है कि इसके साथ छेड़खानी की जा सकती है। चुनाव आयोग ने इंकार कर दिया।
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तो पहला प्रश्न यहाँ यह खड़ा होता है कि --

a) यदि आप अपने टीवी को किसी को हाथ न लगाने दे तो क्या वे अपने रिमोट से आपके टीवी को ऑपरेट कर सकते है ? नहीं कर सकते। क्योंकि आपने उन्हें अपने टीवी में रिसीवर रखने का मौका नहीं दिया है।

b) इसी तरह, यदि पेट्रोल पम्प मालिक अपनी मशीन से छेड़खानी नहीं करे तो क्या वह ऐसा कर सकता है कि वह आपको 950 मिलीलीटर तेल दे किन्तु स्क्रीन 1 लिटर दिखाए ? नहीं कर सकता। पेट्रोल पम्प का मालिक जब मशीन लेकर आता है तो यह मशीन बिलकुल सही माप ही बताती है। और जब तक इसकी चिप/पीसीबी को डुप्लीकेट द्वारा बदल नहीं दिया जाए तब तक पम्प मालिक चाहे जो कर ले, इसे मेन्युपिलेट नहीं कर पायेगा। लेकिन मशीन उसके स्वामित्व एवं नियंत्रण में रहती है इसीलिए वह इसके साथ छेड़खानी करके जनता को चूना लगाता है।
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तो चुनाव आयोग की मक्कारी एवं हरामखोरी की वजह से 1999 से 2009 यह प्रश्न बना रहा कि, क्या evm के साथ छेड़खानी करके इसके वोटो को बदला जा सकता है। तब 1999 से लेकर 2009 तक श्री राहुल मेहता एवं श्री हरिप्रसाद समेत कई कार्यकर्ता इस बारे में मुहीम चला रहे थे कि evm से छेड़खानी करके इसके वोटो को रिमोट से बदला जा सकता है। किन्तु इनके पास कोई प्रूफ नहीं था। क्योंकि चुनाव आयोग किसी भी कीमत पर evm देने को राजी नहीं था।
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तब श्री हरिप्रसाद हैदराबाद में 40-50 कर्मचारियों की एक आईटी कम्पनी चलाते थे। उन्होंने एक जोखिम उठाया। उन्होंने हैदराबाद के कलेक्टर कार्यालय से एक evm चुरा लिया तथा एक वीडियो बनाया जिसमे उन्होंने यह साबित करके दिखाया कि यदि evm से छेड़खानी करने का अवसर मिले तो सिर्फ 3 मिनिट में evm को इस तरह से प्रोग्राम किया जा सकता है कि evm स्क्रीन पर उसी तरह से वोट दिखायेगी जिस तरह आप चाहते है। और इस तरह वोटिंग के बाद रिमोट से evm के वोटो को बदला जा सकता है। विडियो का प्रूफ आने के बाद कार्यकर्ताओं का पक्ष मजबूत हो गया था और उन्होंने देश के नागरिको तक इस बारे में जानकारी पहुंचाना शुरू कर दिया।
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यह वीडियो यू ट्यूब पर आने से भ्रष्ट चुनाव आयोग एवं तात्कालीन सरकार के तन बदन में आग लग गयी। उन्होंने श्री हरीप्रसाद जी पर चोरी का केस दर्ज किया एवं उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनकी कम्पनी स्टाफ को परेशान किया गया एवं उनकी कम्पनी बंद हो गयी। इस तरह चुनाव आयोग ने श्री हरिप्रसाद जी को बर्बाद कर दिया।
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तो दूसरा प्रश्न यहाँ अब यह उठता है कि ---

जब 2009 में यह साबित हो गया कि यदि evm के साथ छेड़खानी करने का अवसर मिले तो इसके वोटो को रिमोट से बदला जा सकता है तो अगला प्रश्न यह है कि क्या evm के साथ बड़े पैमाने पर छेड़खानी करने के अवसर मौजूद है ?
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चूंकि evm बनने से लेकर संचालन तक चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहते है अत: पहले हमें यह देखना होगा कि हमारा चुनाव आयोग कितना भ्रष्ट और इसके आयुक्त कितने हरामखोर है।
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जब डिंपल यादव कन्नौज संसदीय सीट से उपचुनाव के लिए प्रत्याशी थी तो पूरे संसदीय क्षेत्र से किसी ने भी फॉर्म नहीं भरा और डिंपल यादव निर्विरोध चुनाव जीत गयी !!!
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बीजेपी ( तब अध्यक्ष गडकरी थे ) कांग्रेस, बसपा एवं सीपीएम ने अखिलेश से उमीदवार न उतारने के लिए पैसा खा लिया था। लेकिन पूरे संसदीय क्षेत्र से किसी भी छोटी पार्टी या निर्दलीय ने फॉर्म क्यों नहीं भरा ?
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अखिलेश जानते थे कि जनता इतनी त्राहत है कि, यदि एक भी उम्मीदवार खड़ा हो गया तो डिंपल हार जायेगी। अत: उन्होंने चुनाव आयुक्त को घूस खिलाई। चुनाव आयुक्त पैसा खाकर उनकी यह बात मानने पर राजी हो गया कि यदि कोई उम्मीदवार नामांकन भरता है और अखिलेश के गुंडे उसे पीटते है तो चुनाव आयोग उन उम्मीदवारों को कोई भी सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगा। इस तरह से जब निर्दलीय उम्मीदवार फॉर्म लेने गए तो जिला कलेक्टर ने उन्हें कई दिनों तक फॉर्म ही नहीं दिए। और जो जो लोग फॉर्म लेने गए थे उन्हें अखिलेश के गुंडों ने पीट कर भगा दिया। जब उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से पुलिस सुरक्षा की मांग की तो चुनाव आयोग ने उन्हें सुरक्षा नहीं दी। उलटे अखिलेश को यह बता दिया कि ये ये लोग सुरक्षा मांग रहे है। अखिलेश के गुंडों ने उन्हें और भी बुरी तरह से पीटा।
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तब अखिलेश के गुंडे कलेक्टर कार्यालय में सुबह से शाम तक बैठे रहते थे। जो भी फॉर्म लेने आता उसे समझा बुझा कर व नहीं मानने पर पीट कर भगा देते थे। अंत में दो उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे। लेकिन अंतिम दिन और अंतिम समय पर चुनाव आयोग के कहने पर कलेक्टर ने उन्हें धमकाया और उन्होंने अपने फॉर्म एन मौके पर वापिस कर लिए। और इस तरह डिम्पल यादव निर्विरोध चुनाव जीत गयी।
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चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों को सुरक्षा देने से मना क्यों कर दिया, यह प्रश्न आप स्वंय चुनाव आयोग से ट्वीट करके पूछिए।
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इसी तरह से 1951 में मौलाना आजाद चुनाव हार गए थे। किन्तु जवाहर लाल ने चुनाव आयुक्त से कहा कि -- "अरे नहीं नहीं, इन्हे तो जीतना चाहिए था। ऐसे थोड़े ही होता है। कैसे भी कर के जिटवाओ"। तब चुनाव आयोग ने कहा कि वोटो की गिनती फिर से करवा देते है। इससे ये जीत जाएंगे। तब वोटो की फिर से गिनती की गयी और मौलाना आजाद जीत गए !!
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मतलब चुनाव आयोग खुद ही एक माफिया संगठन है, और इसे जो पैसा फेंकता है ये उसकी धुन पर नाचने लगता है।
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तो अब मुख्य प्रश्न यह है कि ---

क्या evm के साथ बड़े पैमाने पर छेड़खानी करने के अवसर मौजूद है ? बिलकुल मौजूद है।
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(1) कोई अंदर का आदमी कुछ evm को टूटी हुई चिन्हित कर सकता है तथा इन्हें नष्ट करने के एवज में चुरा सकता है। इसके बाद सर्किट को रिवर्स इंजीनियरिंग द्वारा समझ सकता है। या फिर बेल ( भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड ) के कर्मचारियों को घूस खिलाकर सारे सिस्टम के key-point ले सकता है।
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(2) अब यह आदमी इसके डुप्लीकेट पार्ट बना सकता है जो कि हूबहू असली जैसे ही होंगे किन्तु इसमें रिसीवर होगा जिसे प्रोग्रामर रिमोट द्वारा संकेत भेज सकेगा।
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(3) अब प्रश्न है कि इन्हें evm में फिट कैसे और कब किया जाएगा ? तो इन्हें तब बदला जा सकता है जब बंगलौर से ट्रको द्वारा पूरे देश में इन्हें पहुंचाया जाता है। ट्रक जब इन्हें ले जाते है तो ट्रांसपोर्ट कम्पनी के मालिक के पास तय की जाने वाली दूरी के अनुसार 2-3 दिन का समय होता है। जबकि 1000 evm की चिपों को 20-25 आदमियों की टीम 3-4 घंटे में ही बदल सकती है। तो जिस आदमी के पास ट्रांसपोर्ट का ठेका होगा उससे सांठ गाँठ होने के बाद यह करना आसान है। या उसे ही इसका ठेका दिलवाया जा सकता है जिससे सांठ गाँठ है। और यदि सरकार या चुनाव आयोग भी इस मिली भगत में शामिल है तो ऐसा करना बच्चो का खेल है। आराम से बैठकर चिप बदले जा सकते है।
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(4) और जब वोटिंग हो जाए तो रिमोट की सहायता से evm में मौजूद कुल वोटो में से अपने उम्मीदवार को मर्जी पड़े उतने वोट ट्रांसफर किये जा सकते है।

और यही सब श्री हरिप्रसाद जी ने 2009 में वीडियो में करके दिखाया था।
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यदि सीआईए चाहे तो वे जापान एवं अमेरिका से आयात किये जाने वाली इन चिपों में पहले से ही रिसीवर लगवा सकते है। इस तरह उन्हें चिप बदलने की जरुरत ही नहीं होगी। ओरिजिनल चिप में ही रिसीवर मौजूद है। उन्हें सिर्फ रिमोट से उसे कमांड देनी है। इसी तरह के कई तरीके मौजूद है। किन्तु चुनाव आयोग पिछले 20 साल से यह सर्कस चला रहा है कि evm हैक नहीं किये जा सकते !!!
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और यही दशा कोंग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी एवं बसपा की है। इन सभी पार्टियों के शीर्ष नेता यह बात पिछले 20 साल से जानते है कि evm को हैक किया जा सकता है। पर आज तक इन में से एक ने भी संसद में इस तरह का क़ानून नहीं रखा कि evm को रद्द किया जाए। ये समय समय पर पब्लिक में आकर नौटंकी करते है कि evm रद्द करो। अरे कपटी मनुष्यों, evm चुनाव आयोग अपने मन से नहीं लेकर आया था। संसद में यह बिल पास किया गया था कि चुनाव आयोग बेलेट पेपर के साथ साथ evm भी प्रयोग कर सकता है। तो तुम संसद में बैठकर अपनी ऐसी तैसी करवा रहे हो क्या ? तुम सांसद हो। संसद में इस तरह का प्रस्ताव रखो कि, "चुनाव आयोग सिर्फ बेलेट पेपर से ही चुनाव करवाएगा"। अगर प्रस्ताव गिर जाता है तो तुम्हारी ईमानदारी पर तो संदेह नहीं रहेगा और यदि प्रस्ताव पास हो जाता है तो evm अपने आप ही रद्द हो जायेगी। पर इन्हें संसद से कुछ लेना देना नहीं है। इन्हें जनता में नौटंकी करनी है।
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और अब चुनाव आयोग फिर से जनता की आँखों में धुल झोंकने की तैयारी कर रहा है। चुनाव आयोग फिर से एक मजमा लगाने वाला है जिसमे वह कहेगा कि, आओ और evm को हैक कर के दिखाओ। किन्तु आयोग ने फिर से evm देने या उसे हाथ लगाने देने से इनकार कर दिया है !!!
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VVPATचुनाव आयोग की इसी नौटंकी का दूसरा भाग है।
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चुनाव आयोग ने यह बताने से इनकार कर दिया है कि पेपर ट्रेल की गिनती किस दशा में की जायेगी !!! चुनाव आयोग का इरादा इन पर्चियों की गिनती करवाने का नहीं है। ये पर्चियां सिर्फ वोटर को 3 सेकेण्ड के लिए दिखाई जायेंगी और फिर खुद ही कटकर डिब्बे में गिर जायेगी। काउंटिंग फिर भी इवीएम् से ही होगी। तो यदि रिमोट से इवीएम् के वोटो को बदल दिया गया है तो पर्चियों को गिन कर यह कभी भी नहीं जाना जा सकेगा कि वोटो को बदल दिया गया था !!! असल में evm काफी बदनाम हो चुकी है इसीलिए चुनाव आयोग एवं राजनैतिक पार्टियां लोगो का विश्वास फिर से कायम करने के लिए VVPAT का चुप्पा दे रहे है।
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इस मामले में अंधभगतो की दशा सबसे दयनीय है।
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बीजेपी के नेता और उनके अंधभगत तब evm का विरोध कर रहे थे जब वे विपक्ष में थे और कांग्रेस सत्ता में थी। क्योंकि तब चुनाव आयोग की नियुक्ति कांग्रेस के हाथ में थी। जब से बीजेपी सत्ता में आयी है तब से ये लोग evm का समर्थन करने लगे है और कांग्रेस के अंध भगत evm का विरोध करने लगे है !! आम आदमी पार्टी और सपा-बसपा evm का सिर्फ तब विरोध करते है जब वे हारते है !!! और इन सब के अंध भगत अपने नेताओ की चाल देखकर अपनी चाल बदलते रहते है।

इन अंधभक्तो को नहीं पता कि evm कितने देशो में बेन है और क्यों बेन है ? इन्हे नहीं पता कि भारत में EVM कौन बनाता है और इन्हे कैसे बूथ तक पहुंचाया जाता है ! इन्हे नहीं पता कि भारतीय evm इलेक्ट्रॉनिक है या इलेक्ट्रिकल या कम्प्यूटराइज्ड !!! इन्हे नहीं पता कि evm की चिप कहाँ बनती है किस देश से आयात की जाती है। और क्यों आयात की जाती है या आयात की जाती है या निर्यात की जाती है। इन्हे पता नहीं कुछ भी और न ही इन्हे सूचनाओं को खोज कर उन तक पहुंचने में रुचि है। ये आपसे evm के पक्ष में घंटो घंटो बहस कर सकते है। और इन बहसों में ये वही सब कुछ उगलेंगे जो पेड मीडिया इनके दिमाग में ठूंस रहा है। इनका कोई स्टेण्ड नहीं। आज इधर है कल उधर। कल यदि कांग्रेस या आम आदमी पार्टी सत्ता में आ गयी और बीजेपी हार गयी तो ये सड़को पर evm के खिलाफ आत्मदाह करते नजर आ सकते है !!! इनका इलाज है. इनसे किसी भी बात को समझने की उम्मीद न रखे। इनकी एक अलग दुनिया है। ये उसमे ही रहते है। इन्हे डिस्टर्ब न करे। वर्ना ये आपके बटका भर सकते है।
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समाधान - 1 : पेट्रोल पम्प की लूट का समाधान यह है कि वाहनों में इन बिल्ट मापन यंत्र लगा होना चाहिए। इससे उपभोक्ता यह जान सकेगा कि उसे कितना तेल दिया गया है। तथा पेट्रोल पम्पस में मापने के इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को पुराने यंत्रो से बदल दिया जाना चाहिए। उनके साथ भी छेड़खानी की जा सकती है। किन्तु उनमे हेरा फेरी रिमोट कंट्रोल द्वारा नहीं की जा सकेगी।
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( चूंकि साहेब ने यह चोरी रोकने के लिए अब तक इस तरह का कोई क़ानून नहीं बनाया है अत: अंधभगतो का मानना है कि देश हित में थोडा कम तेल लेना वाजिब बात है। लेकिन यदि साहेब इस तरह का क़ानून ले आते है तो ये लोग उसी दिन से इसे एक अच्छा क़ानून बताने लगेंगे।
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समाधान - 2 --- जो नागरिक/कार्यकर्ता यह मानते है कि evm को हैक किया जा सकता है एवं इन्हे चुनावी प्रक्रिया से निकाल देना चाहिए। उन्हें प्रधानमंत्री को #CancelEvm का ट्वीट करना चाहिए।
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