Pawan Jury BhilwaraRj

राईट टू रिकॉल सांसद एवं विधायक के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया का ( संशोधित संस्करण )
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श्री वरुण गांधी ने राईट टू रिकॉल सांसद एवं विधायक के लिए "लोक जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951" में संशोधन का प्रस्ताव किया है। किन्तु हमारा मानना है कि उनके द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट में इतनी कमियां है कि इसके लागू होने से व्यवस्था और भी बदतर हो जायेगी।
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निचे हमारे द्वारा प्रस्तावित क़ानून का ड्राफ्ट दिया गया है। नागरिको से आग्रह है कि दोनों प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का अध्ययन करें तथा जो क़ानून उन्हें बेहतर लगता है उस ड्राफ्ट के लिंक का ट्वीट प्रधानमंत्री एवं वरुण गांधी जी को भेजे तथा उन्हें निर्देशित करें कि इसे संसद में रखा जाए। भेजे जाने वाले ट्वीट का नमूना इसी पोस्ट में निचे दिया गया है। ( यदि आप ट्विटर पर नहीं है, तो कृपया ट्विटर पर अपना एकाउंट खोले )
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दोनों क़ानून ड्राफ्ट के बीच तुलनात्मक अंतर का विवरण देखने के लिए कमेंट बॉक्स देखें।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट को संसद में रखने के लिए यह ड्राफ्ट भारत सरकार को भेजा गया है। लिंक -- https://www.mygov.in//comment/101162781
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यह ड्राफ्ट प्रधानमंत्री को उनके ट्विटर हेंडल पर भेजा गया है। लिंक -- https://twitter.com/PawanJury/status/847003994736246784
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श्री वरुण गांधी ने राईट टू रिकॉल सांसद-विधायक के लिए ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है। अतः हमारे द्वारा प्रस्तावित यह ड्राफ्ट वरुण गांधी को भी भेजा गया है -- https://twitter.com/PawanJury/status/847004268368478208
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डाऊनलोड करने के लिए इस ड्राफ्ट का हिन्दी में पीडीएफ़ यहाँ देखें -- https://www.facebook.com/groups/LawDrafts/1703624716603907/
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डाऊनलोड करने के लिए इस ड्राफ्ट के मूल अंग्रेजी संस्करण का पीडीएफ़ यहाँ देखें -- https://www.facebook.com/groups/ProposedLawDrafts/1817458538471475/
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कॉपी करने के लिए इस ड्राफ्ट के मूल अंग्रेजी संस्करण का फेसबुक स्टेटस ( टेक्स्ट फाइल ) यहाँ देखें -- https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10154242393706922
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद का क़ानून ड्राफ्ट यहाँ देखा जा सकता है -https://www.facebook.com/groups/LawDrafts/1693095374323508/
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इस ड्राफ्ट को प्रकाशित किये जाने के बाद इसे सम्पादित नहीं किया जा सके, इसके लिए इस ड्राफ्ट की sha1 तथा md5 हैश नीचे दी गयी है :
sha1 hash - 7b208b2392e4ee76143779a6534bd253c2a58df9
md5 hash - 89ebb66077c4a166c73d4558f0a4dfd7
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प्रधानमंत्री एवं वरुण गाँधी को भेजे जाने वाले ट्वीट का नमूना :
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@pmoindia , @varungandhi80 , I instruct you - https://www.mygov.in//comment/101162781, sha1 hash - 7b208b2392e4ee76143779a6534bd253c2a58df9
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राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित --- मतदाताओ द्वारा सांसद-विधायक को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रक्रिया - ( लोक जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 ; संशोधन )
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दिया गया मसौदा 'लोक जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951' के वर्तमान क़ानून में जोड़ा जाएगा।

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========सांसद को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का प्रारम्भ========
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(C0) [ सामान्य टिप्पणियां ]
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(C0.1) टिप्पणियां मूल विधेयक का भाग नहीं है। मतदाता एवं कार्यकर्ता टिप्पणियों का प्रयोग किसी प्रस्ताव का समर्थन या विरोध करने में कर सकते है, तथा ज्यूरी मंडल इन टिप्पणियों के संदर्भ का उपयोग किसी विवाद का निपटान करने में कर सकते है। ये टिप्पणियां किसी भी पक्षकार पर बाध्य नहीं है।
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(C0.2) इस ड्राफ्ट के महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद (3), (6) व (8) है।
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(1) (1.1) इस अधिनियम में शब्द 'नागरिक' से आशय किसी लोकसभा संसदीय क्षेत्र या भारत में पंजीकृत मतदाता है।
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(1.2) इस अधिनियम में शब्द "कर सकता है" से आशय है -- कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका स्पष्ट आशय है कि "कर सकता है" या "करने की आवश्यकता नहीं है" है।
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(2) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त अधिकारी के लिए निर्देश ]
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(2.1) किसी संसदीय क्षेत्र में आम चुनाव या उप चुनाव के नतीजे घोषित होने के 7 दिवस पश्चात् भारत के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी मतदाता किसी संसदीय क्षेत्र में पदस्थापित सांसद को प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर कार्यालय में व्यक्तिशः रूप से उपस्थित होकर स्वयं को लोकसभा सांसद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर सांसद का चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक तय राशि जमा करके उसके नामांकन को स्वीकार करेगा।
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(2.2) उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत किये गए नामांकन प्रपत्र का प्रारूप अनिवार्य रूप से लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले नामांकन प्रपत्र के सदृश होगा। उम्मीदवार को उन सभी अर्हताओ को पूरा करना होगा जो लोकसभा सदस्य का उम्मीदवार होने के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय की गयी है। जिला कलेक्टर अगले 7 दिनों की अवधि के भीतर प्रस्तुत नामांकन की जांच करके इसे स्वीकार या खारिज करेगा।
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(2.3) यदि नामांकन ख़ारिज हो जाता है तो 1000 रूपये की कटौती करके उम्मीदवार द्वारा जमा की गयी शेष राशि उम्मीदवार को पुनः लौटा दी जायेगी। यदि उम्मीदवार अपना नामांकन फिर से प्रस्तुत करना चाहता है तो वह पुनः ऐसा कर सकता है।
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(2.4) फॉर्म स्वीकार होने के बाद जिला कलेक्टर उम्मीदवार को एक क्रमांक जारी करेगा तथा उसका नाम व अन्य सम्बंधित विवरण चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रखेगा।
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(2.5) जिला कलेक्टर वर्तमान सांसद तथा पिछले चुनावों में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले 5 उम्मीदवारों को बिना कोई शुल्क एवं आवेदन पत्र लिए पंजीकृत करेगा। वर्तमान सांसद का वरीयता क्रमांक 1 तथा अन्य 5 उम्मीदवारों के क्रमांक पिछले चुनाव में उनके द्वारा प्राप्त मतों के अनुसार होंगे। अधिक मत प्राप्त उम्मीदवार को उच्च क्रमांक एवं कम मत प्राप्त उम्मीदवार को निम्न क्रम दिया जाएगा।
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(2.6) वर्तमान सांसद और प्रतिस्थापन के इच्छुक अन्य उम्मीदवारों के अनुमोदनो की संख्या आम चुनाव, उपचुनाव, रिकॉल चुनाव एवं उम्मीदवारों के पंजीकृत होने के बाद शून्य कर दी जायेगी।
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(3) [ तलाटी या पटवारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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(3.1) यदि कोई मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रू शुल्क अदा करता है, तथा सांसद पद के लिए अधिक से अधिक पांच व्यक्तियों को अनुमोदित (वर्तमान सांसद को शामिल करते हुए) करता है, तो पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। पटवारी मतदाता की पहचान पत्र संख्या, तारीख, समय और अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम भी रसीद में दर्ज करेगा।
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(3.2) यदि पटवारी के पास इस प्रक्रिया के संचालन के लिए कंप्यूटर आदि नहीं है तो जब तक पटवारी को कंप्यूटर आदि उपलब्ध नही होता, जिला कलेक्टर यह कार्य तहसीलदार कार्यालय को सुपुर्द करेगा।
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(3.3) चुनाव आयोग एक ऐसा सिस्टम बना सकते है जो क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मतदाता को उसके अनुमोदनों के बारे में एस.एम.एस द्वारा अद्यतन जानकारी दे।
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(3.4) चुनाव आयोग अनुमोदन को दर्ज करने की प्रक्रिया के दौरान मतदाता की फोटो और अंगुलीयों की छाप लेकर रसीद देने के लिए आवश्यक कंप्यूटर आदि उपकरण पटवारी को उपलब्ध करवा सकेगा।
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(3.5) चुनाव आयोग ऐसा सिस्टम बना सकता है जिससे मतदाता अपना अनुमोदन ए टी एम, एस एम एस, मोबाईल ऐप, या इंटरनेट द्वारा दर्ज करवा सके। चुनाव आयोग इस हेतु नागरिको से आवश्यक शुल्क ले सकेगा।
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(3.6) पटवारी मतदाताओ के वोटर आई.डी. नंबर तथा उन उम्मीदवारों के नाम जिनको उसने अनुमोदित किया है, को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा।
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(C3) [ टिपण्णी ]
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(C3.1) यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर अनुमोदन दर्ज करने का कपटपूर्ण प्रयास करता है तो धारा (3.3) में दिए अनुसार क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर एस एम एस प्राप्त होने से मतदाता को इसकी जानकारी तत्काल रूप से मिल सकेगी, और वह इस बारे में शिकायत दर्ज करवा सकेगा। साथ ही फिंगर प्रिंट एवं छाया चित्र के आधार पर अनुमोदन दर्ज किये जाने की व्यवस्था लागू होने से जालसाजी की संभावनाएं काफी कम हो जायेगी।
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(C3.2) अनुमोदन दर्ज करने की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सार्वजनिक रहेगी। मतदाताओ द्वारा दर्ज किये गए सभी अनुमोदन चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रखे जाएंगे, तथा इन्हें कोई भी देख सकेगा।
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(4) [ तलाटी या पटवारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]

यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन रद्द करने आता है, तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा। चुनाव आयोग नागरिको को यह अनुमति देगा कि वे अपने अनुमोदन का रद्दीकरण एस एम एस, ए टी एम, इंटरनेट, मोबाईल ऐप आदि की माध्यम से कर सके। रद्द किये गए अनुमोदन को भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रखा जाएगा।
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(5) कोई अनुमोदन तब तक ही वैध माना जाएगा जब कि उसे रद्द नही किया जाता, या फिर अनुमोदन दर्ज कराने वाले मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा नहीं दिया जाता। इस तरह से जब कोई मतदाता किसी उम्मीदवार को अनुमोदित करेगा तो अमुक उम्मीदवार को प्राप्त अनुमोदनों की संख्या बढ़ेगी, तथा यह संख्या सिर्फ तब ही घटेगी जब किसी मतदाता ने अपना अनुमोदन रद्द कर दिया है, या ऐसे मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है जिसने की अनुमोदन किया था।
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(6) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

यदि वर्तमान सांसद को प्रतिस्थापित करने के इच्छुक किसी उम्मीदवार को यदि उतने अनुमोदन प्राप्त हो जाते है जो कि --
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(6.1) वर्तमान सांसद को प्राप्त अनुमोदनों से अधिक हो, तथा
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(6.2.a) यह अनुमोदन वर्तमान सांसद को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो से उतने अधिक है जितने उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 5% के बराबर हो, अथवा
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(6.2.b) उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% से अधिक हो।
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सिर्फ ऊपर दी गयी परिस्थिति के घटित होने पर ही चुनाव आयोग अमुक संसदीय क्षेत्र में प्रतिस्थापन-चुनाव ( रिकॉल-पोल ) आयोजित करवाएगा।
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(C6) [ धारा-6 के स्पष्टीकरण हेतु टिप्पणियां ]
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(C6.1) प्रतिस्थापन-चुनाव करवाने के लिए धारा [(6.1) और ((6.2.a) या (6.2.b))] की शर्तो का पूरा होना आवश्यक होगा। उदाहरण के लिए, यह आवश्यक होगा कि धारा (6.1) में दी गयी शर्त पूरी हो तथा धारा ((6.2.a) या (6.2.b)) में से किसी एक धारा में दी गयी शर्त पूरी हो।
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(C6.2) धारा (6.2.a) में दिए गए '5%' से आशय उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 5% से है। उदाहरण के लिए, यदि किसी संसदीय क्षेत्र में कुल मतदाताओ की संख्या 20 लाख है तो वर्तमान सांसद को प्राप्त हुए मतों की संख्या से उदासीन रहते हुए यह संख्या 1 लाख होगी।
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(C6.3) मान लीजिये कि किसी संसदीय क्षेत्र में कुल दर्ज मतदाताओ की संख्या 20 लाख है, तथा वर्तमान विजित सांसद को पिछले आम चुनाव में या उप चुनाव में 360,000 मत मिले है।
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(C.6.3.1) अतः यदि किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को कम से कम उतने अनुमोदन प्राप्त होते है जो कि उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 5% ( आशय 20,00,000 का 5% ) यानि कि वर्तमान सांसद को प्राप्त वोटो से 100,000 अधिक है, और वर्तमान सांसद को प्राप्त अनुमोदनों से भी अधिक है, सिर्फ और सिर्फ तब ही प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाएगा। तब भी जबकि वर्तमान सांसद के अनुमोदनों की संख्या शून्य है। दूसरे शब्दो में, यदि किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को 460,000 अनुमोदन मिलते है और वर्तमान सांसद के अनुमोदनों की संख्या 460,000 से कम है, सिर्फ और सिर्फ तब ही प्रतिस्थापन-चुनाव करवाया जाएगा।
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(C6.3.2) मान लीजिये कि किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को 500,000 अनुमोदन प्राप्त होते है, किन्तु वर्तमान सांसद के अनुमोदनों की संख्या यदि 510,000 है तो ऐसी परिस्थिति में प्रतिस्थापन-चुनाव संचालित नहीं किया जाएगा।
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(C6.4) मान लीजिये कि किसी संसदीय क्षेत्र में 20,00,000 मतदाता है। मान लीजिये कि पिछले आम चुनाव या उप चुनाव में विजित सांसद को 12,00,000 मत मिले है। इस स्थिति में प्रतिस्थापन चुनाव सिर्फ तब आयोजित किया जाएगा जब किसी प्रतिस्थापित उम्मीदवार को अमुक संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% से अधिक ( अभिप्राय 51% * 20,00,000) यानि कि 10,20,001 अनुमोदन मिले। तथा यह अनुमोदन वर्तमान सांसद को प्राप्त अनुमोदनों से भी अधिक हो।
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(7) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

प्रतिस्थापन-रिकॉल चुनाव के दौरान पदासीन सांसद के नाम को मतपत्र ( या EVM ) में पहले स्थान पर रखा जाएगा, तथा उसे नामांकन पत्र दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन 7 व्यक्तियों को सर्वाधिक अनुमोदन मिले है और जिन व्यक्तियों को प्राप्त अनुमोदनो की संख्या कुल मतदाताओ की संख्या के 5% से अधिक है, तो उनके नाम भी प्रतिस्थापन-चुनाव के मतपत्र में रखे जाएंगे, तथा इन्हें भी नामांकन पत्र दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी। इनके अतिरिक्त यदि अन्य कोई व्यक्ति उम्मीदवारी प्रस्तुत करना चाहता है वह चुनाव आयोग के समक्ष नामांकन प्रस्तुत कर सकता है। प्रतिस्थापन-चुनाव में मतदान गोपनीय होगा।
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(8) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

यदि प्रतिस्थापन-चुनाव में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को प्राप्त मतो की संख्या -
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(8.1) वर्तमान सांसद को प्राप्त मतों की संख्या से अधिक हो, तथा
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(8.2.a) वर्तमान सांसद को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो की संख्या से उतनी अधिक है जितनी उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 5% के बराबर हो। अथवा
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(8.2.b) उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% से अधिक हो।
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सिर्फ और सिर्फ इसी परिस्थिति में चुनाव आयोग एवं लोकसभा अध्यक्ष वर्तमान सांसद को सेवा मुक्त करके प्रतिस्थापक उम्मीदवार को सांसद घोषित करेगा। यदि ऊपर दी गयी दोनों स्थितियां घटित नहीं होती है तो चुनाव आयोग वर्तमान सांसद को पद पर बनाये रखेगा।
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(C8) [ धारा-8 के स्पष्टीकरण हेतु टिप्पणियां ]
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(C8.a) मान लीजिये कि किसी लोकसभा संसदीय क्षेत्र में कुल 20,00,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में कुल 12,00,000 मतों का मतदान हुआ एवं विजित सांसद को इसमें से 700,000 मत प्राप्त हुए। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान सांसद को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान सांसद से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या वर्तमान सांसद को पिछले चुनावों में मिले मतों की संख्या ( अभिप्राय 700,000 + 20,00,000 का 5% = 800,000 ) से अधिक हो।
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(C8.b) मान लीजिये कि किसी लोकसभा संसदीय क्षेत्र में कुल 20,00,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में विजित सांसद को इसमें से 11,00,000 मत प्राप्त हुए है। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान सांसद को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान सांसद से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% ( अभिप्राय 20,00,000 का 51% = 10,20,000 ) यानि 10,20,000 से अधिक हो।
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(C8.c) मान लीजिये कि किसी लोकसभा संसदीय क्षेत्र में कुल 20,00,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में विजित सांसद को इसमें से 9,50,000 मत प्राप्त हुए है। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान सांसद को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान सांसद से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या उस संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% ( अभिप्राय 20,00,000 का 51% = 10,20,000 ) यानि 10,20,000 से अधिक हो।
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(9) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

किसी प्रतिस्थापक-चुनाव के संपन्न होने के बाद इस तथ्य से निरपेक्ष रहते हुए कि प्रतिस्थापक चुनाव में प्रतिस्थापन सफल रहा है या असफल, सभी उम्मीदवारों के अनुमोदनो को शून्य कर दिया जायेगा। विद्यमान उम्मीदवारों को नामांकन प्रपत्र दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी।
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(10) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

प्रतिस्थापक चुनावो के लिए नए मतदाताओ ( जिन्हें मतदाता सूची में पिछले आम चुनाव, या उपचुनाव या प्रतिस्थापक चुनाव संपन्न होने के बाद पंजीकृत किया गया है ) के अनुमोदनों को शामिल नही किया जाएगा। तथा ऐसे मतदाताओ के अनुमोदनों को भी शामिल नहीं किया जाएगा जिनका नाम मतदाता सूची में से हटा दिया गया है। यहाँ "कुल मतदाताओ की संख्या" से आशय है -- पिछले आम चुनाव या उप चुनाव के दिन मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओ की संख्या में से उन मतदाताओ की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या, जिनका नाम मतदाता सूची में से हटा दिया गया है।
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(11) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]

यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक के किसी अनुच्छेद में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के मतदाता पहचान पत्र के छाया चित्र एवं अन्य विवरण के साथ चुनाव आयोग की वेबसाईट पर रखेगा।
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(12) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]

किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसके किसी अनुच्छेद पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड 11 के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।
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(C13) [ सीमांकित मतदान या रेंज वोटिंग के लिए टिप्पणी ]
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अबाध्यकारी निर्देश - इस विधेयक के लागू होने के बाद चुनाव आयोग मतदाताओ को यह अनुमति दे सकेगा कि वे किसी उम्मीदवार को 0 से 100 के बीच अंक दे सके या फिर सामान्य रूप से हाँ / नहीं का अनुमोदन कर सके। यदि मतदाता द्वारा सामान्य अनुमोदन किया जाता है तो इस अनुमोदन को 100 अंको के समकक्ष माना जाएगा। किन्तु यदि मतदाता उम्मीदवार को अंक देता है तो मतदाता द्वारा दिए गए अंक ही मान्य होंगे। उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किये गए सभी अंक ही उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या मानी जायेगी। वर्तमान सांसद के कुल अंको की मान्य संख्या दी गयी दोनों परिस्थितियों में से उच्च अंक को निर्दिष्ट करने वाली संख्या को माना जाएगा -- (अ) वर्तमान सांसद को प्राप्त कुल मत * 67, (ब) चुनाव के बाद वर्तमान सांसद द्वारा प्राप्त अंक। प्रतिस्थापक चुनाव तब आयोजित किया जाएगा जब किसी उम्मीदवार के कुल अंको की संख्या ( वर्तमान सांसद के कुल अंको की संख्या + अमुक संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या * 100 / 10 ) के बराबर हो। तथा वर्तमान सांसद का प्रतिस्थापन तब होगा जब उम्मीदवार को वर्तमान सांसद से अधिक वोट मिलते है , और उम्मीदवार को वर्तमान सांसद को पिछले चुनावों में मिले वोटो से 10% अधिक वोट मिलते है, या फिर उम्मीदवार को संसदीय क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% मतों से ज्यादा मिलते है। इस विधेयक की धारा 12 का उपयोग करते हुए यदि देश के कुल मतदाताओं के 51% नागरिक यदि इस व्यवस्था को लागू करने के "हाँ" दर्ज कर देते है तो चुनाव आयोग इस प्रणाली को लागू कर सकता है या नही भी कर सकता है। यह कथित सीमांकित मतदान प्रणाली या रेंज वोटिंग सिस्टम ऐरो की कथित असम्भाव्यता प्रमेय ( Arrow’s Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
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====== सांसद को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का समापन ====
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मतदाताओ द्वारा विधायक को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया - ( लोक जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 ; संशोधन )
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=====विधायक को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
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(C0) [ सामान्य टिप्पणियां ]
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(C0.1) टिप्पणियां मूल विधेयक का भाग नहीं है। मतदाता एवं कार्यकर्ता टिप्पणियों का प्रयोग किसी प्रस्ताव का समर्थन या विरोध करने में कर सकते है, तथा ज्यूरी मंडल इन टिप्पणियों के संदर्भ का उपयोग किसी विवाद का निपटान करने में कर सकते है। ये टिप्पणियां किसी भी पक्षकार पर बाध्य नहीं है।
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(C0.2) राईट टू रिकॉल विधायक की इस प्रक्रिया में अधिकारियों एवं नागरिको के लिए दिए जाने वाले सामान्य निर्देशो को व्यक्त नहीं किया गया है। सामान्य निर्देशो के अर्थ के लिए ऊपर दर्ज किये गए राईट टू रिकॉल-सांसद के अनुच्छेद देखें।
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(C0.3) इस ड्राफ्ट के महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद (3), (6) व (8) है।
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(1) (1.1) इस अधिनियम में शब्द 'नागरिक' से आशय किसी विधानसभा क्षेत्र या भारत में पंजीकृत मतदाता है।
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(1.2) इस अधिनियम में शब्द "कर सकता है" से आशय है -- कोई भी नैतिक-कानूनी बंधन नहीं। इसका स्पष्ट आशय है कि "कर सकता है" या "करने की आवश्यकता नहीं है"।
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(2) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त अधिकारी के लिए निर्देश ]
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(2.1) किसी विधानसभा क्षेत्र में आम चुनाव या उप चुनाव के नतीजे घोषित होने के 7 दिवस पश्चात् भारत के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी मतदाता किसी विधानसभा क्षेत्र में पदस्थापित विधायक को प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर कार्यालय में व्यक्तिशः रूप से उपस्थित होकर स्वयं को विधायक के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करता है, तो जिला कलेक्टर विधायक का चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक तय राशि जमा करके उसके नामांकन को स्वीकार करेगा।
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(2.2) फॉर्म स्वीकार होने के बाद जिला कलेक्टर उम्मीदवार को एक क्रमांक जारी करेगा तथा उसका नाम व अन्य सम्बंधित विवरण चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रखेगा।
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(2.3) जिला कलेक्टर वर्तमान विधायक तथा पिछले चुनावों में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले 5 उम्मीदवारों को बिना कोई शुल्क एवं आवेदन पत्र लिए पंजीकृत करेगा। वर्तमान विधायक का वरीयता क्रमांक 1 तथा अन्य 5 उम्मीदवारों के क्रमांक पिछले चुनाव में उनके द्वारा प्राप्त मतों के अनुसार होंगे। अधिक मत प्राप्त उम्मीदवार को उच्च क्रमांक एवं कम मत प्राप्त उम्मीदवार को निम्न क्रम दिया जाएगा।
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(3) [ तलाटी या पटवारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]
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(3.1) यदि कोई मतदाता पटवारी कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रू शुल्क अदा करता है, तथा वर्तमान विधायक को शामिल करते हुए इस पद की उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले अधिक से अधिक पांच उम्मीदवारों को अनुमोदित करता है, तो पटवारी उसके अनुमोदनो को कंप्यूटर में दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। पटवारी मतदाता की पहचान पत्र संख्या, तारीख, समय और अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम भी रसीद में दर्ज करेगा।
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(3.2) पटवारी मतदाताओ के वोटर आई.डी. नंबर तथा उन उम्मीदवारों के नाम जिनको उसने अनुमोदित किया है, को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर रखेगा। ताकि इन्हें किसी भी व्यक्ति द्वारा देखा जा सके।
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(3.3) चुनाव आयोग ऐसा सिस्टम बना सकता है जिससे मतदाता अपना अनुमोदन ए टी एम, एस एम एस, मोबाईल ऐप, या इंटरनेट द्वारा दर्ज करवा सके। चुनाव आयोग इस हेतु नागरिको से आवश्यक शुल्क ले सकेगा।
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(4) [ तलाटी या पटवारी या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]

यदि कोई मतदाता अपना अनुमोदन रद्द करने आता है, तो तलाटी एक या अधिक अनुमोदन बिना कोई शुल्क लिए रद्द कर देगा।
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(5) कोई अनुमोदन तब तक ही वैध माना जाएगा जब कि अमुक मतदाता द्वारा उसे रद्द नही किया जाता, या फिर अनुमोदन दर्ज कराने वाले मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटा नहीं दिया जाता।
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(6) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

यदि वर्तमान विधायक को प्रतिस्थापित करने के इच्छुक किसी उम्मीदवार को उतने अनुमोदन प्राप्त हो जाते है जो कि --
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(6.1) वर्तमान विधायक को प्राप्त अनुमोदनों से अधिक है, तथा
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(6.2.a) यह अनुमोदन वर्तमान विधायक को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो से उतने अधिक है जितने उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 10% के बराबर से अधिक हो, अथवा
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(6.2.b) उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% से अधिक है।
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सिर्फ ऊपर दी गयी परिस्थिति के घटित होने पर ही चुनाव आयोग अमुक विधानसभा क्षेत्र में प्रतिस्थापन-चुनाव ( रिकॉल-पोल ) आयोजित करवाएगा।
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(C6) [ धारा-6 के स्पष्टीकरण हेतु टिप्पणियां ]
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(C6.1) प्रतिस्थापन-चुनाव करवाने के लिए धारा [(6.1) और ((6.2.a) या (6.2.b))] की शर्तो का पूरा होना आवश्यक होगा। उदाहरण के लिए, यह आवश्यक होगा कि धारा (6.1) में दी गयी शर्त पूरी हो तथा धारा ((6.2.a) या (6.2.b)) में से किसी एक धारा में दी गयी शर्त पूरी हो।
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(C6.2) धारा (6.2.a) में दिए गए '10%' से आशय उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 10% से है। उदाहरण के लिए, यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओ की संख्या 3 लाख है तो वर्तमान विधायक को प्राप्त हुए मतों की संख्या से उदासीन रहते हुए यह संख्या 30,000 होगी।
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(C6.3) मान लीजिये कि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल दर्ज मतदाताओ की संख्या 3 लाख है, तथा वर्तमान विजित विधायक को पिछले आम चुनाव में या उप चुनाव में 100,000 मत मिले है।
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(C.6.3.1) अतः यदि किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को कम से कम उतने अनुमोदन प्राप्त होते है जो कि उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 10% ( आशय 3,00,000 का 10% ) यानि कि वर्तमान विधायक को प्राप्त वोटो से 30,000 अधिक ( 100,000 + 30,000 = 130,000 ) यानि 130,000 है, और वर्तमान विधायक को प्राप्त अनुमोदनों से भी अधिक है, सिर्फ और सिर्फ तब ही प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाएगा।
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(C6.3.2) यदि वर्तमान विधायक के अनुमोदनों की संख्या शून्य है, ऐसी स्थिति में भी रिकॉल पोल तब कराया जाएगा जबकि प्रतिस्थापक उमीदवार को कम से कम 130,000 अनुमोदन मिले
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(C6.3.3) मान लीजिये कि किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को 145,000 अनुमोदन प्राप्त होते है, किन्तु वर्तमान विधायक के अनुमोदनों की संख्या यदि 145,001 है तो ऐसी परिस्थिति में प्रतिस्थापन-चुनाव संचालित नहीं किया जाएगा।
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(C6.4) मान लीजिये कि किसी विधानसभा क्षेत्र में 300,000 मतदाता है। मान लीजिये कि पिछले आम चुनाव या उप चुनाव में विजित विधायक को 170,000 मत मिले है। इस स्थिति में प्रतिस्थापन चुनाव सिर्फ तब आयोजित किया जाएगा जब किसी प्रतिस्थापक उम्मीदवार को अमुक विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ के 51% से अधिक ( अभिप्राय 51% * 300,000) यानि कि 153,001 अनुमोदन मिले हो। तथा यह अनुमोदन वर्तमान विधायक को प्राप्त अनुमोदनों से भी अधिक हो।
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(7) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

प्रतिस्थापन-रिकॉल चुनाव के दौरान पदासीन विधायक के नाम को मतपत्र ( या EVM ) में पहले स्थान पर रखा जाएगा, तथा उसे नामांकन पत्र दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन 7 व्यक्तियों को सर्वाधिक अनुमोदन मिले है और जिन व्यक्तियों को प्राप्त अनुमोदनो की संख्या कुल मतदाताओ की संख्या के 5% से अधिक है, तो उनके नाम भी प्रतिस्थापन-चुनाव के मतपत्र में रखे जाएंगे, तथा इन्हें भी नामांकन पत्र दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी। इनके अतिरिक्त यदि अन्य कोई व्यक्ति उम्मीदवारी प्रस्तुत करना चाहता है वह चुनाव आयोग के समक्ष नामांकन प्रस्तुत कर सकता है। प्रतिस्थापन-चुनाव में मतदान गोपनीय होगा।
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(8) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

यदि प्रतिस्थापन-चुनाव में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को प्राप्त मतो की संख्या -
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(8.1) वर्तमान विधायक को प्राप्त मतों की संख्या से अधिक हो, तथा
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(8.2.a) वर्तमान विधायक को पिछले चुनावो में प्राप्त होने वाले मतो की संख्या से उतनी अधिक है जितनी उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 10% के बराबर हो।
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(8.2.b) उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% से अधिक है।
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सिर्फ और सिर्फ इसी परिस्थिति में चुनाव आयोग एवं लोकसभा अध्यक्ष वर्तमान विधायक को सेवा मुक्त करके प्रतिस्थापक उम्मीदवार को विधायक घोषित करेगा। यदि ऊपर दी गयी दोनों स्थितियां घटित नहीं होती है तो चुनाव आयोग वर्तमान विधायक को पद पर बनाये रखेगा।
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(C8) [ धारा-8 के स्पष्टीकरण हेतु टिप्पणियां ]
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(C8.a) मान लीजिये कि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल 300,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में विजित विधायक को इसमें से 90,000 मत प्राप्त हुए। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान विधायक को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान विधायक से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या क्षेत्र के कुल मतदाताओ की संख्या के 10% के बराबर ( अभिप्राय 90,000 + 300,000 का 10% = 120,000 ) से अधिक हो।
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(C8.b) मान लीजिये कि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल 300,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में विजित विधायक को इसमें से 160,000 मत प्राप्त हुए है। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान विधायक को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान विधायक से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या उस क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% ( अभिप्राय - 300,000 का 51% = 153,000 ) से भी अधिक हो।
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(C8.c) मान लीजिये कि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल 300,000 पंजीकृत मतदाता है, तथा पिछले आम चुनाव या उपचुनाव में विजित विधायक को इसमें से 145,000 मत प्राप्त हुए है। अब यदि प्रतिस्थापन-चुनाव आयोजित किया जाता है तो वर्तमान सांसद को नए प्रतिस्थापक उम्मीदवार से सिर्फ तब प्रतिस्थापित किया जा सकेगा जब प्रतिस्थापक उम्मीदवार को वर्तमान विधायक से अधिक मत मिले हो तथा प्रतिस्थापक उम्मीदवार को प्राप्त मतों की यह संख्या उस विधानसभा क्षेत्र में दर्ज कुल मतदाताओ की संख्या के 51% ( अभिप्राय - 300,000 का 51% = 153,000 ) से अधिक हो।
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(9) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

किसी प्रतिस्थापक-चुनाव के संपन्न होने के बाद इस तथ्य से निरपेक्ष रहते हुए कि प्रतिस्थापक चुनाव में प्रतिस्थापन सफल रहा है या असफल, सभी उम्मीदवारों के अनुमोदनो को शून्य कर दिया जायेगा। विद्यमान उम्मीदवारों को नामांकन प्रपत्र दाखिल करने की जरूरत नहीं होगी।
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(10) [ चुनाव आयोग के लिए निर्देश ]

प्रतिस्थापक चुनावो के लिए नए मतदाताओ ( जिन्हें मतदाता सूची में पिछले आम चुनाव, या उपचुनाव या प्रतिस्थापक चुनाव संपन्न होने के बाद पंजीकृत किया गया है ) के अनुमोदनों को शामिल नही किया जाएगा। तथा ऐसे मतदाताओ के अनुमोदनों को भी शामिल नहीं किया जाएगा जिनका नाम मतदाता सूची में से हटा दिया गया है। यहाँ "कुल मतदाताओ की संख्या" से आशय है -- पिछले आम चुनाव या उप चुनाव के दिन मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओ की संख्या में से उन मतदाताओ की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या, जिनका नाम मतदाता सूची में से हटा दिया गया है।
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(11) [ जिला कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी के लिए निर्देश ]

यदि देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता इस विधेयक के किसी अनुच्छेद में बदलाव चाहता हो अथवा वह इस विधेयक से सम्बन्धित कोई शिकायत दर्ज करना चाहता हो तो ऐसा नागरिक मतदाता जिला कलेक्टर के कार्यालय में उपस्थित होकर एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 30 रूपए प्रति पृष्ठ का शुल्क लेकर दर्ज करेगा तथा एक सीरियल नंबर जारी करके इस शपथपत्र को स्कैन करके अमुक मतदाता के मतदाता पहचान पत्र के छाया चित्र एवं अन्य विवरण के साथ चुनाव आयोग की वेबसाईट पर रखेगा।
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(12) [ तलाटी अथवा पटवारी के लिए निर्देश ]

किसी पटवारी कार्यालय के कार्यक्षेत्र में निवास करने वाला कोई भी नागरिक मतदाता यदि इस विधेयक अथवा इसके किसी अनुच्छेद पर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता हो अथवा ऊपर दिए खण्ड 11 के तहत प्रस्तुत किसी भी शपथपत्र पर अपनी हां / नहीं दर्ज कराना चाहता हो तो वह अपना मतदाता पहचान पत्र लेकर तलाटी के कार्यालय में जाएगा और उपलब्ध आवेदन पर शपथपत्र का सीरियल नंबर दर्ज करके अपनी हाँ / नही दर्ज करेगा। पटवारी 3 रूपए का शुल्क लेकर इस हाँ / नहीं को दर्ज करके एक रसीद जारी करेगा। मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ / नहीं को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मतदाता के नाम, मतदाता पहचान संख्या, दिनांक एवं अन्य विवरणों के साथ रखा जाएगा।

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========== विधायक को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट का समापन ======