Pawan Jury BhilwaraRj

352 सीट जीतने वाली इंदिरा जी भी पेड मिडिया को काबू नहीं कर सकी थी, आज मिडिया की ताकत 100 गुना ज्यादा होने के बावजूद सिर्फ 282 सीटो से मोदी साहेब ने मिडिया को "साध" लिया है !!!
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तब पेड मिडिया इंदिरा जी के खिलाफ था और उन्हें प्रेस पर प्रतिबन्ध लगाना पड़ा था, जबकि आज पेड मिडिया मोदी साहेब को सकारात्मक कवरेज दे रहा है।
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1947 से पहले भी और इंदिरा जी के समय भी, पेड मिडिया विदेशी एवं देशी धनिको के नियंत्रण में था, जबकि तब मिडिया में एफडीआई नहीं थी। 2014 से पहले भी और आज भी पेड मीडिया विदेशी कंपनियों के पूर्ण नियंत्रण में है। जबकि अब मीडिया में 100% विदेशी निवेश होने से यह खुली हुयी बात है कि मीडिया विदेशियो के नियंत्रण में है।
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लोकसभा + राज्य सभा = संसद भारत में सर्वोच्च है। संसद में बैठने के लिए चुनाव जीतने होते है। चुनाव जीतने के लिए वोट चाहिए। और किसी नेता के पक्ष में वोट खड़े करने के लिए मीडिया सबसे ताकतवर औजार है।
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या तो तब इंदिरा जी की नीतियां देशी-विदेशी धनिको को पसन्द नहीं थी, अतः उन्होंने इंदिरा जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, या फिर तब इंदिरा जी की नीतियां देश के खिलाफ थी और पेड मीडिया देश भक्त था !!
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या तो मनमोहन सरकार की नीतियाँ विदेशी धनिको को पसन्द थी इसीलिए वे मनमोहन सिंह को 8 साल तक सकारात्मक कवरेज दे रहे थे, या फिर मनमोहन देश हित में काम कर रहे थे और विदेशी धनिको द्वारा संचालित पेड मीडिया देश भक्त था !!
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या तो मोदी साहेब की नीतियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं मिशनरीज को बेहद पसन्द आ रही है, या फिर बहुराष्ट्रीय कंपनियां एवं मिशनरीज आज भी देश भक्त व हिन्दूवादी है।
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इस बात को भी अच्छे से समझ लेना चाहिए कि इंदिरा जी हो या मनमोहन या मोदी साहेब, जो शासन व्यवस्था एवं क़ानून भारत में है उनके तहत पेड मीडिया को काबू नहीं किया जा सकता। उन्हें बस "साधा" जा सकता है। मतलब उन्हें खुश रखा जा सकता है। यहाँ खुश रखने से आशय उनके एजेंडे पर कार्य करने से है, ताकि इनके मालिको यानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को मौद्रिक लाभ एवं मिशनरीज के लिए धर्मान्तर के अवसर तैयार हो।
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कहते है कि, मीडिया लोकतंत्र का चौथा खम्बा है। लेकिन व्यवहारिक रूप से लोकतंत्र के शेष दो खम्बे ( कार्यपालिका एवं विधायिका ) भी मीडिया पर ही टिके हुए है। यदि मीडिया आपके साथ है तो ही आप कार्यपालिका एवं विधायिका में प्रवेश कर सकते है। और भारत में पेड मीडिया बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं मिशनरीज द्वारा संचालित है।
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यदि आप मीडिया की ताकत एवं इनके संचालन सूत्रों को समझ ले तो मीडिया द्वारा दिए जा रहे कवरेज को आधार बनाकर राजनीति की वास्तविकता को समझा जा सकता है।
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और बुरी खबर यह है कि, पेड मीडिया योगी जी बेहिसाब सकारात्मक कवरेज दे रहा है !!
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