Pawan Jury BhilwaraRj
यदि आपके क्षेत्र का सांसद ठीक से काम नहीं कर रहा है, और आप उसके खिलाफ रिकॉल याचिका दायर करते है तो वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित क़ानून आपको जेल में पहुंचा सकता है !!
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित क़ानून की धारा 78C. (1) के अनुसार ; सांसद को रिकॉल करने के लिए उस संसदीय क्षेत्र के कुल मतदाताओ के 25% यानी 5 लाख मतदाताओ के हस्ताक्षर इकट्ठे करने होंगे। लेकिन इन हस्ताक्षरों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी नागरिको के सिर पर डाल दी गयी है। चुनाव आयोग या सरकारी तंत्र इसमें कोई भूमिका नहीं निभाएगा। जो कार्यकर्ता सांसद को रिकाल करना चाहते है उन्हें अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके इन हस्ताक्षरों को इकट्ठा करना होगा।
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अब वरुण द्वारा प्रस्तावित क़ानून की धारा 78M कहती है कि --- 'यदि कोई व्यक्ति जाली हस्ताक्षर करेगा या उन्हें इकट्ठा करेगा इन हस्ताक्षरों के साथ छेड़छाड़ करेगा या किसी व्यक्ति को हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करेगा या किसी व्यक्ति को आनंद देने के लिए याचिका दायर करेगा तो ऐसे व्यक्ति को 5 साल के लिए जेल भेज दिया जाएगा' !!!
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78M. "जो कोई --
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a) स्पीकर को प्रस्तुत की गयी याचिका में जाली हस्ताक्षरों का प्रयोग या उनके साथ छेड़छाड़ करेगा ; या
b) एक ही याचिका को दुबारा दायर करेगा ; या
c) खुद या किसी एजेंट के माध्यम से, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई उपहार, या लाभ देने का कोई वादा करके या अन्य किसी प्रकार से परितुष्ट* करके या परितुष्टि का वचन देकर ऐसी रिकाल याचिका दायर करने या इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उसे प्रेरित करेगा ; या
d) स्वयं या किसी एजेंट के माध्यम से, किसी व्यक्ति या उसके एजेंट से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में कोई उपहार, या किसी लाभकारी प्रस्ताव या किसी परितुष्टि का वचन प्राप्त करके किसी रिकाल याचिका पर हस्ताक्षर करेगा ;
तो वह 5 वर्ष तक के कारावास या 10 लाख तक के अर्थदंड अथवा दोनों दोनों प्रकार के दंड का भागी होगा।
*स्पष्टीकरण - इस धारा में "परितुष्टि" में सिर्फ वित्तीय या मौद्रिक तुष्टि ही शामिल नहीं है बल्कि परितुष्टि में सभी प्रकार के मनोरंजन, रोजगार, इनाम आदि के प्रतिफल निहित है।"
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इस व्यवस्था के होने से नागरिक किसी रिकॉल याचिका पर हस्ताक्षर करने का जोखिम नहीं उठायेगे। उन्हें भय रहेगा कि हमें फंसाया जा सकता है। कोई कार्यकर्ता या कार्यक्रताओ का समूह यदि हस्ताक्षर इकट्ठे करके याचिका दायर कर देता है तो सांसद कुछ 100-50 लोगो को अपनी तरफ मिला लेगा और ये लोग कह देंगे कि -- 'हमने तो कोई साइन नहीं किये थे या हमे इन्होने फुसलाकर हमारे साइन ले लिये'। या सांसद जब देखेगा कि कोई कार्यकर्ता रिकाल याचिका दायर करने के लिए हस्ताक्षर इकट्ठे कर रहा है तो वह अपने 100-50 आदमियों से उस याचिका पर हस्ताक्षर करने को कह देगा। और जब याचिका दायर हो जायेगी तो वो अपने लोगो को पलट जाने को कह देगा। इस तरह से याचिका कर्ता को जेल हो जायेगी और पूरे देश में कोई भी कार्यकर्ता कभी रिकाल याचिका दायर करने के बारे में सोचेगा भी नहीं।
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इसके अलावा, चूंकि हस्ताक्षर इकट्ठा करने का अभियान आम नागरिको को चलाना होगा अत: वह फ्रेम में आ जाएगा और सांसद के आदमी हस्ताक्षर करने के बहाने उसके पास जायेगे और उसके साथ मारपीट करके उसके हस्ताक्षरों का पोथा फाड़ देंगे या उसे उठाकर ले आयेगे। यदि नागरिक थाने में रिपोर्ट करने जाएगा तो सांसद उसे थाने में पिटवाएगा वो अलग से।
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कुल मिलाकर वरुण राईट टू रिकाल के विरोधियो में अब तक सबसे बढ़कर निकले। अन्ना-केजरीवाल गिरोह ने राईट टू रिकॉल मूवमेंट को तोड़ने के लिए इसका सिर्फ मौखिक समर्थन किया था लेकिन इसका ड्राफ्ट कभी नहीं दिया। लेकिन वरुण गांधी अन्ना-केजरीवाल से भी ज्यादा धूर्त बनकर सामने आए है। इन्होने राईट टू रिकॉल कानूनों को बदनाम करने और रिकॉल की मांग करने वाले नागरिको को सबक सिखाने की ठानी है। ये ऐसा क़ानून लेकर आये है जिससे उन नागरिको को जेल पहुंचाया जा सके जो अपने सांसद के रिकॉल की मांग करते है।
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद का एक नकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट -
https://www.facebook.com/groups/LawDrafts/1693095370990175/
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राईट टू रिकॉल द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद का एक सकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट -
https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1205223182929249
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