Pawan Jury BhilwaraRj

शायद फिरोज वरुण गांधी इस बात से अनभिग्य है कि भारत की एक बड़ी आबादी साक्षर नहीं है, या फिर वे सांसद को रिकॉल करने का अधिकार निरक्षर नागरिको को देना नहीं चाहते। इसीलिए वरुण ने सांसद को रिकॉल करने की जो प्रक्रिया प्रस्तावित की है उसमे यह प्रावधान रखा है कि --- किसी सांसद को रिकॉल करने के लिए कम से कम 5 लाख मतदाताओ के "हस्ताक्षरों" की आवश्यकता होगी।
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वरुण गांधी को शायद इस बात का भी इल्म नहीं है कि चुनाव आयोग के पास मतदाताओ के हस्ताक्षरों को जांचने के लिए आवश्यक डेटा नहीं है। अत: चुनाव आयोग यह कभी भी जांच नहीं सकेगा कि रिकाल याचिका में किये गए हस्ताक्षर असली है या फर्जी।
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मेरे विचार में वरुण गांधी इतने भी बेवकूफ नहीं है, किन्तु भारत के मतदाताओ को वे जरूर बेवकूफ समझते है। इसीलिए उन्होंने जानबूझकर इस तरह की प्रक्रिया प्रस्तावित की है।
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद की वह धारा जो निरक्षर नागरिको को रिकॉल याचिका में सहभागी होने से वंचित करती है --
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78C. (1) Any elector of a particular constituency, may, if not satisfied with the
performance of elected member of that constituency, file a recall petition, signed by not
less than one-fourth of the total number of electors of that constituency, with the
Speaker in such manner as may be prescribed.
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यदि किसी क्षेत्र का मतदाता सांसद को रिकॉल करना चाहता है तो उसे एक रिकॉल याचिका दायर करनी होगी। यह आवश्यक है कि इस याचिका में उस संसदीय क्षेत्र के कुल मतदाताओ के कम से कम 25% मतदाताओ के हस्ताक्षर होने चाहिए।
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वरुण गांधी द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद का एक नकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट -
https://www.facebook.com/groups/LawDrafts/1693095370990175/
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राईट टू रिकॉल द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल सांसद का एक सकारात्मक क़ानून ड्राफ्ट -
https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1205223182929249
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राईट टू रिकॉल सांसद : वरुण गांधी Vs राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित प्रकियाओं में अंतर यहाँ देखें --
https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/1205873529530881
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