Pawan Jury BhilwaraRj
पर्यावरण का हवाला देकर बीकानेर के विश्व प्रसिद्ध करणी माता मंदिर में अगबत्ती, चुनरी, ध्वजा, श्रृंगार सामग्री, नारियल आदि चढाने पर रोक लगा दी गयी है। मैं कभी देशनोक नहीं गया, अतः मुझे जानकरी नहीं है कि इन चढ़ावो से पर्यावरण को कितना नुकसान पहुँच रहा है। किन्तु यह सामान्य समझ का विषय है कि पर्यावरण से इन सब का कोई लेना देना नहीं है। स्वच्छता बनाये रखने और सामग्री के आधिक्य के निपटान के लिए अतिरिक्त स्टाफ लगाया जा सकता है व ऐसी व्यवस्था बनायी जा सकती है जिससे मंदिर का पर्यावरण स्वच्छ बना रहे। किन्तु यदि मंशा मंदिर गामी श्रद्धालुओ की आस्था को ठेस पहुँचाना हो तो फैसले इसी दिशा में किये जाते है।
.
------------------
ई पेपर लिंक -- http://epaper.bhaskar.com/detail/1115234/122921757640/0/map/tabs-1/12-29-2016/158/1/image/
.
पुरानी खबर ( 29 दिसम्बर 2016 )
.
------------------
2008 के आम चुनावो में बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में वादा किया था कि यदि वे सत्ता में आते है तो मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर देंगे। किन्तु 2014 में बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं मिशनरीज ने मोदी साहेब को बाध्य किया कि यदि उन्हें पीएम की कुर्सी चाहिए तो उन्हें इस वादे को अपने मेनिफेस्टो से निकाल देना होगा। चूंकि भारत में पेड मिडिया मिशनरीज के नियंत्रण में है और पीएम बनने के लिए मोदी साहेब के मिशनरीज द्वारा संचालित पेड मिडिया का सहयोग चाहिए था अतः उन्होंने उनकी बात मान ली।
.
भारत के मंदिर लगातार सरकारी नियंत्रण में जा रहे है और मिशनरीज सरकार के माध्यम से मंदिर ट्रस्टियों पर दबाव बनाकर हिन्दू मंदिरो को कंट्रोल करती है। उद्देश्य मंदिरो की दशा बिगड़ना है ताकि मंदिर गामी श्रद्धालुओ में कमी आये। साथ ही मंदिरो में आये दान का इस्तेमाल भी अन्य धर्मो के ट्रस्टो आदि को दिया जाता है ताकि मंदिरो की संपत्ति का ह्रास हो।
.
समाधान - मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करके इन्हें हिन्दू नागरिको के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए। ताकि हिन्दू श्रद्धालु मंदिर के प्रशासन तथा कोष के उपयोग को नियंत्रित कर सके। प्रस्तावित प्रक्रिया देखने के लिए दिए गए लिंक को क्लिक करें।
.
राष्ट्रीय हिन्दू देवालय प्रबंधक ट्रस्ट के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/570764579768407
.
=========